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भोजपुर के अंचल कार्यालयों में थमा कामकाज का पहिया

Strike by revenue officials: आरा सदर, शाहपुर, जगदीशपुर, पीरो और बिहिया जैसे अंचलों में उमड़ रही भीड़, मायूस लौट रहे लोग

  • हाइलाइट: Strike by revenue officials
  • भोजपुर में राजस्व कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से कई काम ठप
  • दाखिल खारिज से लेकर परिमार्जन तक के सारे काम ठप, अंचलों में पसरा सन्नाटा
  • 17 सूत्री मांगों पर अड़ा संघ, राजस्व व्यवस्था हुई ध्वस्त

आरा। भोजपुर समेत पूरे प्रदेश में राजस्व प्रशासन की रीढ़ कहे जाने वाले राजस्व कर्मचारियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से राजस्व विभाग का तंत्र पूरी तरह चरमरा गया है। बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ (संयुक्त संघर्ष मोर्चा) के आह्वान पर बुधवार से शुरू हुई इस हड़ताल ने आम आदमी को परेशान किया है।

भोजपुर के अंचलों के कार्यालयों में फाइलों की पेंडेंसी और सर्वर पर आवेदनों का अंबार लग गया है। कर्मचारी अपनी 17 सूत्री मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन ने भी कड़ा रुख अख्तियार करते हुए वैकल्पिक व्यवस्था के आदेश जारी किए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि विशेषज्ञता के अभाव में राजस्व कार्य पूरी तरह ठप पड़ गए हैं।

दाखिल-खारिज और परिमार्जन का संकट: जिले में दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के हजारों मामले लंबित हो गए हैं। परिमार्जन प्लस पोर्टल पर होने वाले सुधार कार्य पूरी तरह बंद हैं, जिससे जमीन की खरीद-बिक्री करने वाले लोग परेशान हैं।

प्रमाणपत्रों पर लगा ब्रेक: छात्र-छात्राओं के लिए सबसे बड़ी मुसीबत जाति, आय और आवासीय प्रमाणपत्रों के सत्यापन को लेकर खड़ी हो गई है। राजस्व कर्मचारियों की रिपोर्ट के बिना अंचल अधिकारी इन प्रमाणपत्रों को निर्गत नहीं कर पा रहे हैं।

राजस्व महाअभियान हुआ बाधित: सरकार की ओर से चलाए जा रहे विशेष राजस्व महाअभियान के तहत होने वाली आधार सीडिंग, किसान पंजीकरण और ई-मापी की प्रक्रिया ठप पड़ गई है।

विकास कार्यों की जांच रुकी: विभिन्न पंचायतों में होने वाले सरकारी निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक स्थल जांच और एनओसी देने वाला कोई नहीं है, जिससे विकास योजनाओं की गति धीमी पड़ गई है।

डीएम का आदेश: प्रशासन की सख्ती और वैकल्पिक इंतजाम हड़ताल से उत्पन्न गतिरोध को तोड़ने के लिए भोजपुर डीएम ने उच्चस्तरीय आदेश (पत्रांक 521) जारी किया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सरकारी काम रुकने नहीं दिया जाएगा। आदेश के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

प्रभार का हस्तांतरण: जिले के सभी अंचलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि हड़ताल पर गए राजस्व कर्मचारियों का प्रभार तत्काल पंचायत सचिवों और अंचल अमीनों को सौंप दिया जाए।

तकनीकी बदलाव: हड़ताली कर्मियों के डिजिटल सिग्नेचर (डोंगल) को तत्काल प्रभाव से डी-एक्टिवेट करते हुए, उनके स्थान पर प्रभार लेने वाले पंचायत सचिवों के डोंगल को सक्रिय करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

संसाधनों की वापसी: विभाग ने आदेश दिया है कि कर्मचारियों को सरकार द्वारा दिए गए लैपटॉप, मॉडम और अन्य उपकरण तुरंत कार्यालय में जमा कराए जाएं।

दस्तावेजों की सुरक्षा: राजस्व अभिलेखों और हल्का कार्यालयों की चाबियां प्रशासन ने अपने नियंत्रण में लेने का निर्देश दिया है ताकि रिकॉर्ड के साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके।

कर्मचारियों की मुख्य मांगें: क्यों थमा कामकाज का पहिया? संघ के जिला सचिव संजय कुमार सिंह और अन्य पदाधिकारियों का कहना है कि वे शौक से नहीं बल्कि मजबूरी में हड़ताल पर हैं। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

ग्रेड पे और वेतन सुधार: वर्तमान ग्रेड पे 1900 (लेवल-2) को बढ़ाकर 2800 (लेवल-5) किया जाए। संघ का तर्क है कि स्नातक योग्यता होने के बावजूद उन्हें कम वेतन दिया जा रहा है।

गृह जिला पदस्थापन: नवनियुक्त राजस्व कर्मचारियों को उनके गृह जिले में तैनात करने की मांग की गई है ताकि वे बेहतर ढंग से कार्य कर सकें।

पदनाम में बदलाव: राजस्व कर्मचारी के पदनाम को बदलकर सहायक राजस्व पदाधिकारी या क्षेत्रीय राजस्व अधिकारी करने की मांग लंबे समय से लंबित है।

काम का बोझ और भत्ता: एक कर्मचारी पर एक ही हल्का (पंचायत) का प्रभार हो। यदि अतिरिक्त पंचायत का कार्य लिया जाता है, तो मूल वेतन का 50 प्रतिशत अतिरिक्त भत्ता दिया जाए। साथ ही क्षेत्र भ्रमण के लिए मोटरसाइकिल और ईंधन की सुविधा मिले।

ग्राउंड रिपोर्ट : अंचलों में उमड़ रही भीड़, मायूस लौट रहे लोग, आरा सदर, शाहपुर, जगदीशपुर, पीरो और बिहिया जैसे अंचलों से मिल रही रिपोर्ट के अनुसार सुबह से ही लोग अपने जमीन संबंधी कार्यों के लिए अंचल कार्यालय पहुंच रहे हैं। लेकिन जब पता चलता है कि कर्मचारी हड़ताल पर हैं, तो उनके चेहरे पर निराशा साफ दिखाई देती है।

अंचल कार्यालयों में तैनात कुछ पंचायत सचिवों का कहना है कि उन्हें राजस्व कार्यों का गहन अनुभव नहीं है, जिसके कारण ऑनलाइन आवेदनों को निपटाने में काफी समय लग रहा है। तकनीकी जटिलताओं और डोंगल मैपिंग की प्रक्रिया के कारण फिलहाल सुधार की संभावना कम दिख रही है।

कर्मचारी संघ का साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और लिखित आश्वासन नहीं मिलता, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। दूसरी ओर, प्रशासन की सख्ती और प्रभार हस्तांतरण की प्रक्रिया ने टकराव की स्थिति पैदा कर दी है। यदि यह गतिरोध जल्द नहीं सुलझा, तो आने वाले दिनों में जिले की राजस्व व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है, जिसका सीधा असर आम जनता की जेब और सरकारी खजाने पर पड़ेगा।

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