Tuesday, February 17, 2026
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अंचल और डीसीएलआर कार्यालयों में ‘शिकायत पेटी’ रखने का निर्देश

CO and DCLR offices: बिहार में भूमि सुधारों को लेकर उपमुख्यमंत्री सिन्हा का कड़ा रुख: भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े पर होगी सख्त कार्रवाई

  • हाइलाइट: CO and DCLR offices
    • औचक जांच के लिए ‘उड़न दस्ता’ गठित किया जाएगा: डिप्टी सीएम

पटना, बिहार में भूमि सुधारों और राजस्व प्रशासन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री, श्री विजय कुमार सिन्हा ने पटना स्थित ज्ञान भवन में आयोजित “भूमि सुधार जन कल्याण कार्यशाला” में राज्य भर के भूमि अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया। इस कार्यशाला में राज्य के अपर समाहर्ता (एडीएम), अनुमंडल भूमि सुधार पदाधिकारी (डीसीएलआर) और अंचलाधिकारी (सीओ) सहित राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। डिप्टी सीएम ने विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता लाने तथा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए कई नई पहल और कड़े निर्देश जारी किए।

CO and DCLR offices: शिकायत पेटी केवल संबंधित अंचलाधिकारी व डीसीएलआर ही खोलेंगे

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आम जनता को भूमि संबंधी समस्याओं से मुक्ति दिलाने के लिए जमीनी स्तर पर व्यापक सुधार आवश्यक हैं। इसी क्रम में उन्होंने सभी अंचल और डीसीएलआर कार्यालयों में एक ‘शिकायत पेटी’ स्थापित करने का निर्देश दिया। इस शिकायत पेटी में आम नागरिक जमीन से जुड़े मामलों की शिकायतें दर्ज कर सकेंगे। यह व्यवस्था शिकायत निवारण प्रक्रिया को अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाएगी। विशेष रूप से, अंचलाधिकारी कार्यालय की शिकायत पेटी केवल संबंधित अंचलाधिकारी ही खोलेंगे, जबकि डीसीएलआर कार्यालय में प्राप्त शिकायतों की पेटी संबंधित डीसीएलआर द्वारा खोली जाएगी, जिसमें अंचलाधिकारियों के विरुद्ध भी शिकायतें दर्ज की जा सकेंगी। यह प्रणाली अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और शिकायतकर्ता को सीधे उच्चाधिकारी तक पहुँच प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगी।

डिप्टी सीएम ने भूमि संबंधी मामलों में फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ सख्त आपराधिक कार्रवाई करने की चेतावनी दी। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि 31 दिसंबर तक ऐसे सभी फर्जीवाड़े के मामलों में आपराधिक कानूनों के तहत प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराई जाए। यह निर्देश भूमि माफियाओं और धोखेबाजों के खिलाफ सरकार के कड़े रुख को दर्शाता है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि कार्यालयों की कार्यप्रणाली में सुधार लाने के उद्देश्य से एक विशेष टीम का गठन किया जाएगा। दस्तावेजों में हेराफेरी करने वाले और आम जनता को गुमराह करने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि “आम जनता को बरगलाना महंगा पड़ेगा।” इसके अतिरिक्त, औचक जांच के लिए ‘उड़न दस्ता’ गठित किया जाएगा, जो भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने वालों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। वहीं, दूसरी ओर, बेहतर कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को पुरस्कृत कर प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि सकारात्मक कार्य संस्कृति को बढ़ावा मिले।

श्री सिन्हा ने क्षेत्रीय स्तर पर पदस्थापित पदाधिकारियों को समय-सीमा के भीतर सभी प्रकार की सेवाएँ उपलब्ध कराने का स्पष्ट निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि आवेदनों को बेवजह लटकाने वाले अधिकारी अब बख्शे नहीं जाएंगे। कार्यशाला के दौरान अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों पर भी उन्होंने सख्त रुख अपनाया और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करने का आदेश दिया। मंत्री ने कहा, “भागने से काम नहीं चलेगा। जो भागेंगे उनका पीछा अंतिम समय तक करेंगे।” यह दर्शाता है कि विभाग अब किसी भी प्रकार की लापरवाही या कार्य में कोताही बर्दाश्त नहीं करेगा।

उपमुख्यमंत्री ने सभी अंचलाधिकारियों को उनके कानूनन प्रदत्त अधिकारों का पूर्ण उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि झूठा शपथ पत्र देने वालों के खिलाफ तुरंत प्राथमिकी दर्ज कराई जाए और यह भी सुनिश्चित किया जाए कि सही एवं ईमानदार लोगों को बेवजह परेशान न किया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जनता अपनी शिकायतें सीधे उनसे मिलकर भी कर सकती है, जिससे सरकार की जनता के प्रति जवाबदेही और भी मजबूत होगी। इन सभी उपायों का उद्देश्य बिहार में एक पारदर्शी, जवाबदेह और जन-हितैषी राजस्व प्रशासन स्थापित करना है, जिससे आम जनता को भूमि संबंधी समस्याओं से त्वरित और न्यायसंगत राहत मिल सके।

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