Saturday, March 6, 2021
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जीवन भर सीखने की भावना को रखे जागृत-बक्शी विकास

Bakshi vikas की शिष्या कथक नृत्यांगना सृष्टि प्रिया ने तीनताल में कुछ खास बंदिशों को प्रस्तुत किया

आरा शहर के चर्चित कथक गुरू बक्शी विकास (Bakshi vikas) से कला और संगीत पर खास बातचीत की गई। “खास मुलाकात” नेशनल शो में राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिलब्ध कलाकारों के बीच आरा के गुरू बक्शी विकास ने भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य की दशा और दिशा पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। गुरू विकास ने कहा कि एक सच्चा कलाकार बनने के लिए अपने भीतर जीवन भर सीखने की भावना को जागृत रखना होगा।

संगीत की वर्तमान चुनौतियों पर संचालिका दुर्गेश्वरी सिंह ‘महक’ द्बारा पूछे गए प्रश्न पर अपनी राय रखते हुऐ गुरू विकास (Bakshi vikas) ने कहा की रात के अंधेरे में सड़क पर गाड़ियों की टिमटिमाती लाइटों की तरह कई तरह के संगीत आज हमारे सामने हैं। हर कोई खुद के सृजन को सर्वश्रेष्ठ बनाने की होड़ में लगा है, जिससे हमारी मौलिक कलाओं का मूल तत्व नष्ट हो रहा हैं। वेदों में वर्णित हमारे संगीत के मूल तत्व को संरक्षित करना आज के परिवेश में सबसे बड़ी चुनौती है।

इस परिचर्चा में गुरू विकास की शिष्या कथक नृत्यांगना सृष्टि प्रिया ने तीनताल में कुछ खास बंदिशों को प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी। गुरू विकास ने महाराज बिंदादीन जी की रचना “श्याम छवि अति बनी माथे मुकुट धरी” पर भाव के माध्यम पुरुष और स्त्री दोनों के श्रृंगार की अभिव्यक्ति की। इस अवसर पर महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बंगाल, बिहार व अन्य प्रांतो के कला एवं साहित्य जगत के विशेषज्ञो ने ऑनलाइन कमेंट के माध्यम से खास मुलाकात शो के इस एपिसोड को कला संगीत के लिए लाभप्रद बताया।

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