Homeआरा भोजपुरशाहपुरकुंडवा शिव मंदिर में 24 घंटे के अखंड हरिकीर्तन का आयोजन

कुंडवा शिव मंदिर में 24 घंटे के अखंड हरिकीर्तन का आयोजन

बाबा कुण्डेश्वरनाथ मंदिर (कुंडवा शिव ) भोजपुर जिला मुख्यालय से करीब 28 किलोमीटर पश्चिम आरा-बक्सर मुख्य मार्ग NH-922 से बिल्कुल सटे बिलौटी एवं शाहपुर के बीचोबीच अवस्थित है। मंदिर से शाहपुर प्रखंड मुख्यालय की दूरी लगभग 2 किलोमीटर है।

Kundwa Shiva Temple: बाबा कुण्डेश्वरनाथ मंदिर (कुंडवा शिव) भोजपुर जिला मुख्यालय से करीब 28 किलोमीटर पश्चिम आरा-बक्सर मुख्य मार्ग NH-922 से बिल्कुल सटे बिलौटी एवं शाहपुर के बीचोबीच अवस्थित है। मंदिर से शाहपुर प्रखंड मुख्यालय की दूरी लगभग 2 किलोमीटर है।

  • हाइलाइट : Kundwa Shiva Temple
    • तैयारी में जुटे बाबा कुण्डेश्वरनाथ सेवा ट्रस्ट एवं प्रबंधन समिति के सदस्य सहित ग्रामीण

आरा: शाहपुर NH-922 स्थित बाबा कुण्डेश्वरनाथ मंदिर (कुंडवा शिव ) में पवित्र श्रावण मास के समाप्ति के शुभ अवसर पर 24 घंटे का अखंड हरिकीर्तन आयोजन रविवार को किया गया है। बाबा कुण्डेश्वरनाथ सेवा ट्रस्ट एवं प्रबंधन समिति सदस्यों के द्वारा बताया गया कि मंदिर परिसर में पूजा अर्चना के साथ-साथ 24 घंटे के अखंड हरिकीर्तन का आयोजन लोगो की सुख, शांति, समृद्धि, बारिश तथा भक्तों के मन को शांति के साथ घरों में खुशहाली के लिए की जा रही है।

बता दें की कुंडवा शिव, जो कि एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है, यहां की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता भी अपार है। यहां की विशेषताएँ इसे अन्य स्थानों से अलग बनाती हैं। विशेष रूप से, हवन कुंड से निकले शिवलिंग का महत्व अत्यंत गहरा आस्था का एक जीवंत उदाहरण है। धार्मिक आस्था का केन्द्र बाबा कुण्डेश्वरनाथ मंदिर (कुंडवा शिव) पुरातात्विक व ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी काफी महत्वपूर्ण मंदिर है। बिना ईट के बने इस शिव मंदिर की बनावट व शिल्पकारी इसे पुरातन मंदिरों की श्रेणी में खड़ा करता है।

बाबा कुण्डेश्वरनाथ मंदिर (कुंडवा शिव) का मुख्य द्वार पश्चिम की ओर खुलता है। बिना ईट के प्रयोग किये वृहद शिलाखंडों से निर्मित इस मंदिर के दीवारों पर उकेरी गयी कलाकृतियां तत्कालीन शिल्पकारों के कला कौशल को दर्शाता है। ठीक इसी प्रकार की बनावट वाली पार्वती एवं एक अन्य मंदिर है जो पुरातात्विक एवं ऐतिहासिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण एवं वर्तमान में धरोहर है।

बाबा कुण्डेश्वरनाथ मंदिर की वर्तमान स्थिति:

वर्तमान में मंदिर का अवशेष एक आयताकार झाड़ीनुमा ऊंचे टीले पर अवस्थित है। जिसका क्षेत्रफल लगभग पांच एकड़ में फैला है। टीले के बीचोबीच उत्तर तरफ प्रधान प्राचीन शिव मंदिर निर्मित है। सतह पर मंदिर की स्थिति लगभग 30 फीट लंबी ,10 फीट चौड़ी तथा 30 फीट ऊंचे गुंबज वाले इस मंदिर का द्वार पश्चिम की ओर खुलता है। गर्भ गृह में स्थापित शिवलिंग गोलाकार लंबा न होकर चपटा है।

कहां अवस्थित है यह प्राचीन मंदिर:

बाबा कुण्डेश्वरनाथ मंदिर (कुंडवा शिव) भोजपुर जिला मुख्यालय से करीब 28 किलोमीटर पश्चिम आरा-बक्सर मुख्य मार्ग NH-922 से बिल्कुल सटे बिलौटी एवं शाहपुर के बीचोबीच अवस्थित है। मंदिर से शाहपुर प्रखंड मुख्यालय की दूरी लगभग 2 किलोमीटर है।

क्या है मंदिर से जुड़ी किदवंती :

किदवंतियों के अनुसार राजा वाणासुर इसी स्थान पर आकर गंगा नदी के किनारे तपस्या करता था। कुछ वर्षो की तपस्या के उपरांत उसने यहां महायज्ञ करने की ठानी। यज्ञ के लिए हवन कुंड की खुदाई होने लगी। इसी खुदाई के दौरान श्रमिकों का फावड़ा किसी पत्थर से टकराई तथा उससे रक्त बहने लगा। इसकी सूचना वाणासुर को दी गयी। रक्त रंजित पत्थर को निकालकर बाहर रखा गया जो शिवलिंग की आकृति का था।

कहा जाता है कि रात्रि पहर भगवान शिव ने राजा वाणासुर के स्वप्न में आकर आदेश दिये कि वह इस शिवलिंग की स्थापना करे। राजा वाणासुर द्वारा भगवान के आदेश पर इसे स्थापित किया गया। चूंकि यह शिवलिंग हवन कुंड की खुदाई के दौरान प्राप्त हुआ था इसलिए नाम पड़ा कुंडवा शिव। मान्यता है की कुंडवा शिव की पूजा से जीवन में शांति, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

कब और किसने बनवाया मंदिर:

कुंडवा शिव मंदिर के निर्माण से जुड़े कोई लिखित प्रमाण तो नहीं हे। लेकिन स्थानीय लोक गाथाओं, किदवंतियों, मंदिर की बनावट एवं यहां स्थापित कलाकृतियों से यह अनुमान लगाया जाता है कि यह मंदिर महाभारत कालीन राजाओं द्वारा बनवाया गया होगा। किदवंतियों के अनुसार, राजा वाणासुर के द्वारा केवल शिवलिंग स्थापना की कथा कही जाती है। तब यहां से पवित्र गंगा नदी की मुख्यधारा यही से गुजरती थी। इसका प्रमाण छठवी शताब्दी के आसपास महाकवि वाणभट्ट द्वारा रचित हर्षचरित में भी मिलता है।

RAVI KUMAR
RAVI KUMAR
बिहार के भोजपुर जिला निवासी रवि कुमार एक भारतीय पत्रकार है एवं न्यूज पोर्टल खबरे आपकी के प्रमुख लोगों में से एक है।
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