Megaliths Bihar: यह स्मारक न तो कोई मंदिर है, न ही कोई मूर्ति और न ही किसी मध्यकालीन राजा की कब्र। यह एक महापाषाणीय समाधि, मेगालिथ है, जिसकी अनुमानित आयु 2500 से 3500 वर्ष के बीच मानी जाती है।
- हाइलाइट: Megaliths Bihar
- बिहार के रोहतास और कैमूर की पहाड़ियों पर मौजूद महापाषाणिक संस्कृति का अवशेष
आरा,पटना। बिहार के रोहतास जिले में स्थित रोहतासगढ़ किला अपने ऐतिहासिक वैभव और स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है। पर्यटक और इतिहास प्रेमी अक्सर यहाँ के महलों और विशाल दीवारों को देखने आते हैं। हालांकि, इस ऐतिहासिक दुर्ग के रास्ते में एक ऐसा पुरातात्विक स्थल भी है, जो किले के निर्माण से भी हजारों साल पहले के इतिहास को समेटे हुए है। लोहे की जाली के भीतर संरक्षित एक साधारण सा दिखने वाला पत्थर, वास्तव में बिहार के अति प्राचीन इतिहास का मूक गवाह है।
Megaliths Bihar : पूर्वजों के प्रति सम्मान और श्रद्धा के प्रतीक
यह स्मारक न तो कोई मंदिर है, न ही कोई मूर्ति और न ही किसी मध्यकालीन राजा की कब्र। यह एक महापाषाणीय समाधि या मेगालिथ है, जिसकी अनुमानित आयु 2500 से 3500 वर्ष के बीच मानी जाती है। ग्रीक भाषा के दो शब्दों ‘मेगा’ यानी विशाल और ‘लिथ’ यानी पत्थर से मिलकर बने इस शब्द का अर्थ उन विशाल पत्थरों से है, जिन्हें प्राचीन काल में महत्वपूर्ण व्यक्तियों की स्मृति में स्थापित किया जाता था। ये स्थल केवल दफनाने के स्थान नहीं थे, बल्कि उस काल के समाज के लिए अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान और श्रद्धा के प्रतीक थे।
रोहतास और कैमूर की पहाड़ियों पर हजारों साल पहले…
बिहार के रोहतास और कैमूर की पहाड़ियों पर हजारों साल पहले इस क्षेत्र में एक उन्नत और संगठित सभ्यता का अस्तित्व था। आज भी रोहतासगढ़ के आसपास पत्थरों के गोल घेरे, विशाल सीधे खड़े पत्थर और प्राचीन समाधियों के अवशेष देखे जा सकते हैं। पहले मान्यता थी कि भारत में इस संस्कृति का उदय और प्रसार दक्षिण भारत में हुआ था। जब उत्तर भारत से महापाषाणिक संस्कृति के अवशेष मिले, तो इसे भारतीय पुरातत्त्व की एक बड़ी उपलब्धि माना गया था।
पूर्वजों की स्मृति को पत्थरों के माध्यम से अमर…
दुर्भाग्यवश, इन स्थलों के बारे में व्यापक जानकारी का अभाव है। रोहतासगढ़ आने वाले अधिकांश पर्यटक किले की भव्यता में इतने लीन हो जाते हैं कि वे रास्ते में मौजूद इन अनमोल विरासतों को अनदेखा कर देते हैं। यह स्थल हमें उस कालखंड का साक्षात्कार कराता है, जब न तो मुगल साम्राज्य का विस्तार हुआ था और न ही शेरशाह सूरी का शासन। यह वह समय था जब मानव सभ्यता अपनी परंपराओं और पूर्वजों की स्मृति को पत्थरों के माध्यम से अमर बना रही थी।
समय की गहराइयों में जाकर देखें बिहार के प्राचीनतम इतिहास
यह अनुभूति ही इस स्थान को अद्वितीय बनाती है कि जिस भूमि पर आज हम खड़े हैं, वहां तीन हजार साल पहले भी लोग अपने प्रियजनों के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे थे। रोहतासगढ़ की यात्रा केवल एक ऐतिहासिक किले को देखने का अनुभव नहीं है, बल्कि समय की गहराइयों में जाकर बिहार के प्राचीनतम इतिहास को समझने का एक अवसर भी है। यह छोटा सा बोर्ड आपको एक ऐसे कालखंड से परिचित कराएगा, जो बिहार की समृद्ध ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की नींव का हिस्सा है।




