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बिहिया में ट्रक चालको को पिटते रहे बदमाश, पुलिस की सुस्ती पर उठे सवाल

Bihiya police: डायल-112 की विफलता और पुलिस की सुस्ती: बिहिया राजा बाजार में ट्रक चालकों की पिटाई से कानून व्यवस्था पर सवाल

  • हाईलाइट:Bihiya police
  • राजा बाजार में मारपीट के बाद आवेदन, पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
  • थाना को सूचना देने के बाद समय से पुलिस पहुँची होती तो टल सकता था घटना

आरा: भोजपुर जिले के बिहिया थाना क्षेत्र अंतर्गत राजा बाजार में सोमवार सुबह हुई एक शर्मनाक घटना ने स्थानीय पुलिसिंग और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां अज्ञात बदमाशों द्वारा ट्रक चालकों के साथ न केवल बेरहमी से मारपीट की गई, बल्कि उनसे नकदी भी छीन ली गई। इस पूरी घटना के दौरान सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि पीड़ितों द्वारा बार-बार डायल-112 पर मदद की गुहार लगाने के बावजूद पुलिस समय रहते घटनास्थल पर नहीं पहुंची।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजस्थान निवासी ट्रक चालक गुड्डू यादव अपने साथियों के साथ बिहिया की विभिन्न ट्रेडिंग कंपनियों में सामान पहुंचाने आए थे। सोमवार की सुबह जब चालक अपनी ट्रकों में सो रहे थे, तभी एक चारपहिया वाहन से आए कुछ दबंगों ने उन पर हमला कर दिया। पीड़ितों का आरोप है कि हमलावरों ने उनके साथ जमकर मारपीट की और उनसे लगभग 22 हजार रुपये छीन लिए। पीड़ित चालकों शिवम यादव और दीपक कुमार ने बताया कि जब उन्होंने बचाव की कोशिश की, तो उन्हें भी निशाना बनाया गया।

Bihiya police : बिहिया थाना में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ लिखित शिकायत

इस घटना के बाद पीड़ितों ने बिहिया थाना में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि विवाद की जड़ एक छोटी सी घटना थी, जिसमें सड़क किनारे खड़े ट्रक और एक चारपहिया वाहन के आपस में छू जाने के बाद कहासुनी शुरू हुई थी। हालांकि, यह मामूली विवाद देखते ही देखते हिंसक हो गया।

घटना के बाद से ही स्थानीय नागरिकों और पीड़ितों में भारी आक्रोश है। लोगों का मानना है कि यदि डायल-112 पर कॉल करने के तुरंत बाद पुलिस सक्रियता दिखाती और घटनास्थल पर पहुंचती, तो न केवल ट्रक चालकों को पिटाई से बचाया जा सकता था, बल्कि बदमाशों को रंगे हाथों पकड़ा भी जा सकता था। पुलिस की इस देरी ने सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है।

इतना ही नहीं, जब बिहिया थानाध्यक्ष सुदेश्वर कुमार दास के सरकारी मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन उठाने के बजाय उसे बार-बार काट दिया। जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों का इस तरह का रवैया आम नागरिकों के बीच भय और अविश्वास पैदा करता है।

फिलहाल, घटना के काफी देर बाद पहुंची पुलिस मामले की जांच की बात कह रही है, लेकिन सवाल यह है कि आपातकालीन सेवाओं के बावजूद आम आदमी की सुरक्षा सुनिश्चित करने में इतनी बड़ी चूक क्यों हुई? क्या पुलिस की सुस्त कार्यशैली अपराधियों के हौसले बुलंद नहीं कर रही है?

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