Shahpur Tender: लोक निधि का सदुपयोग और विकास परियोजनाओं का समयबद्ध निष्पादन ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सुशासन की प्राथमिक शर्त है। लेकिन यह शर्त बिहार के भोजपुर जिला अंतर्गत शाहपुर नगर पंचायत के लिए शायद नहीं है।
- हाइलाइट: Shahpur Tender
- वर्ष 2023 का टेंडर, तीन साल बाद भी अधूरा पड़ा विकास कार्य
- इस परियोजना का प्रकाशन 08 अगस्त 2023 को किया गया था
- निविदा राशि (Tender Value) 15,29,943 रुपये निर्धारित थी
- निविदा की वैधता अवधि (Offer Validity) मात्र 120 दिनों की थी
- इस कार्य को 2024 की शुरुआत तक पूर्ण हो जाना चाहिए था
- लेकिन मार्च 2026 तक जमीनी स्तर पर कार्य की स्थिति अब भी अधूरी
- नगर प्रशासन द्वारा अब तक संवेदक पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई
आरा। नगर पंचायत शाहपुर के वार्ड संख्या 07 में, मेन रोड से मोहन पांडेय व शिवजी यादव के घर होते हुए चंद्रशेखर पांडेय के घर तक मिट्टी भराई, ईंट सोलिंग, पीसीसी (PCC) एवं नाली निर्माण कार्य के लिए जारी किया गया टेंडर वर्ष 2026 की पहली तिमाही बीत जाने के बाद भी अधूरा है। यह स्थिति नगर के प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है।
Shahpur Tender: समय सीमा का उल्लंघन और अधर में लटका कार्य
विदित हो कि इस परियोजना का प्रकाशन 08 अगस्त 2023 को किया गया था, जिसकी कुल निविदा राशि (Tender Value) 15,29,943 रुपये निर्धारित थी। शाहपुर के तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी रजनीश कुमार द्वारा इस टेंडर को सृजित किया गया था। नियमों के अनुसार, इस निविदा की वैधता अवधि (Offer Validity) मात्र 120 दिनों की थी। तकनीकी और प्रशासनिक दृष्टिकोण से इस कार्य को 2024 की शुरुआत तक पूर्ण हो जाना चाहिए था, लेकिन मार्च 2026 तक जमीनी स्तर पर कार्य की स्थिति अब भी अधूरी बनी हुई है।
प्रशासनिक मौन पर उठते सवाल
सबसे गंभीर विषय यह है कि कार्य अधूरा होने के बावजूद नगर पंचायत प्रशासन द्वारा अब तक इस टेंडर को रद्द करने की दिशा में कोई आधिकारिक कदम नहीं उठाया गया है। टेंडर को लंबे समय तक लंबित रखने और उसे रद्द न करने से इस आशंका को बल मिलता है कि इस मद की राशि की निकासी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। सरकारी धन के इस संभावित दुरुपयोग और कार्य में बरती गई अत्यधिक शिथिलता ने विभाग की कार्यशैली और पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा दिया है।


