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शिवपुर गंगा घाट: वीर कुंवर सिंह की वीरता की अनूठी गाथा

Shivpur Ganga Ghat: 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में बिहार के जगदीशपुर से क्रांति की मशाल जलाने वाले बाबू कुंवर सिंह का जीवन राष्ट्रप्रेम और स्वाभिमान की अनूठी गाथा है।

  • हाइलाइट: Shivpur Ganga Ghat
  • जनमानस की रक्षा के लिए अस्सी वर्ष की आयु में भी जब कुंवर सिंह ने अपनी तलवार उठा ली…

आरा। वीर कुंवर सिंह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक ऐसा नाम है, जो वीरता, शौर्य और अदम्य साहस का प्रतीक माना जाता है। 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में बिहार के जगदीशपुर से क्रांति की मशाल जलाने वाले बाबू कुंवर सिंह का जीवन राष्ट्रप्रेम और स्वाभिमान की अनूठी गाथा है।

अस्सी वर्ष की आयु में भी जिस जोश और जज्बे के साथ उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध का नेतृत्व किया, वह विश्व इतिहास में दुर्लभ है। जब ब्रिटिश हुकूमत भारत की जड़ों को खोखला कर रही थी, तब कुंवर सिंह ने अपनी जागीर और जनमानस की रक्षा के लिए अपनी तलवार उठा ली। उनकी सैन्य रणनीति इतनी सटीक थी कि तत्कालीन ब्रिटिश जनरल भी उनकी युद्ध कौशल की प्रशंसा करने पर मजबूर हो गए थे।

Shivpur Ganga Ghat: अपने हाथ को तलवार से काटकर गंगा मैया को अर्पित कर दिया

कुंवर सिंह की सबसे बड़ी विशेषता उनका अटूट धैर्य और निडरता थी। शिवपुर गंगा घाट का प्रसंग बाबू कुंवर सिंह के जीवन का वह अध्याय है, जो वीरता की पराकाष्ठा को दर्शाता है। बलिया से गंगा पार कर अपने गृह क्षेत्र जगदीशपुर लौटते समय, अंग्रेजों की एक गोली उनके हाथ में लगी, तो उन्होंने क्षण भर भी विलंब न करते हुए अपने हाथ को तलवार से काटकर गंगा में प्रवाहित कर दिया। उन्होंने यह संदेश दिया कि देश की आजादी के लिए यदि शरीर का कोई हिस्सा भी बाधा बने, तो उसे त्यागने में संकोच नहीं करना चाहिए। यह घटना उनके समर्पण की पराकाष्ठा को दर्शाती है।

अंतिम समय तक लड़े और अंग्रेजी सेना की चूलें हिला दी…

उनकी कार्यप्रणाली केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं थी। उन्होंने आरा, सासाराम, मिर्जापुर और आजमगढ़ तक अंग्रेजों को कड़ी टक्कर दी। अपनी छापामार युद्ध नीति से उन्होंने अंग्रेजी सेना की चूलें हिला दी थीं। उनकी रणनीतिक सूझबूझ का ही परिणाम था कि वे अंतिम समय तक किसी भी विदेशी ताकत के सामने नहीं झुके। 26 अप्रैल 1858 को इस महान क्रांतिकारी ने मातृभूमि की सेवा करते हुए अपने प्राण त्याग दिए, लेकिन उनके द्वारा बोया गया स्वतंत्रता का बीज बाद में भारत की आजादी की नींव बना। ऐसे अमर बलिदानी को शत-शत नमन।

RAVI KUMAR
RAVI KUMAR
बिहार के भोजपुर जिला निवासी रवि कुमार एक भारतीय पत्रकार है एवं न्यूज पोर्टल खबरे आपकी के प्रमुख लोगों में से एक है।
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