Homeबिहारआराप्रथम स्वाधीनता संग्राम का मूक गवाह है आरा हाउस

प्रथम स्वाधीनता संग्राम का मूक गवाह है आरा हाउस

Arrah House: 23 अप्रैल 1976 को मगध विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति ने यहां कुंवर सिंह संग्रहालय का उद्घाटन किया

Bijay singh
  • हाइलाइट: Arrah House
  • प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ रही यह स्मारक

आरा। वर्ष 1857, प्रथम स्वतंत्रता संग्राम भारतीय इतिहास की एक युगांतरकारी घटना है। इस महाक्रांति ने न केवल अंग्रेजों की नींव हिला दी थी, बल्कि शाहाबाद जिले के प्रत्येक नागरिक के भीतर स्वाधीनता की अलख जगा दी थी। इस गौरवशाली इतिहास के प्रमुख नायकों में वीर कुंवर सिंह का नाम अग्रणी है। उनकी वीरता और उनके शौर्य की गाथा आज भी शाहाबाद की धरती पर स्थित आरा हाउस के रूप में जीवित है, जो इस महान क्रांति का एक मूक गवाह है।

Arrah House: तत्कालीन मजिस्ट्रेट एचसी वेक ने शहर के सभी यूरोपियों के साथ लिया शरण

इतिहासकारों के अनुसार, जुलाई 1857 के अंतिम सप्ताह तक शाहाबाद जिला ब्रिटिश शासन के लिए विद्रोह का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका था। 25 जुलाई 1857 को दानापुर के सिपाहियों द्वारा किए गए विद्रोह के पश्चात परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं। विद्रोह की आहट पाते ही तत्कालीन मजिस्ट्रेट एचसी वेक ने शहर के सभी यूरोपियों को एकत्रित कर ईस्ट इंडिया कंपनी के इंजीनियर के दो मंजिला मकान में शरण लेने का निर्णय लिया। यह भवन, जिसे आज हम आरा हाउस के नाम से जानते हैं, 26 जुलाई 1857 की शाम तक अंग्रेजों का अभेद्य किला बन गया। सुरक्षा के दृष्टिगत वहां पर्याप्त भोजन सामग्री और रसद का प्रबंध कर लिया गया था।

आरा हाउस पर कुंवर सिंह की विजय

अगले ही दिन, 27 जुलाई को दानापुर की विद्रोही पलटन के साथ मिलकर बाबू कुंवर सिंह ने आरा स्थित अंग्रेजी छावनी को चारों ओर से घेर लिया। विद्रोही सैनिकों ने आरा कलेक्ट्री स्थित सरकारी खजाने पर नियंत्रण करने के उपरांत आरा हाउस पर आक्रमण कर दिया। मौत को अपने समीप देख विवश होकर अंग्रेज अफसरों ने वीर कुंवर सिंह के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। इस विजय के साथ ही आरा हाउस पर कुंवर सिंह का अधिकार हो गया। उसके बाद से ही यह भवन बाबू कुंवर सिंह की वीरता और जनपद की जनता की आजादी के प्रति जुझारूपन का प्रतीक बन गया।

कुंवर सिंह संग्रहालय का उद्घाटन

लेकिन वर्तमान में प्रशासनिक उदासीनता के कारण आरा हाउस उपेक्षित है। 23 अप्रैल 1976 को मगध विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति ने यहां कुंवर सिंह संग्रहालय का उद्घाटन किया। लेकिन भवन के जर्जर स्थिति को देख उसे अन्यत्र हटा लिया गया। बाद में राज्य सरकार द्वारा इसे सुरक्षित स्मारक घोषित किया गया। लगभग 50 फीट चौड़ा, 30 फीट ऊंचा इस भवन के जीर्णोद्धार के लिए वर्ष 2003-04 में लाखों रुपए की राशि स्वीकृत हुई। जिसमें 16 लाख 28 हजार 345 रुपए का भुगतान जीर्णोद्धार के लिए तथा 1 लाख 93 हजार विद्युत कार्य करने के लिए मुहैया कराया गया था। 5 जुलाई 2003 को भवन के संरक्षण और विकास कार्यों का शिलान्यास हुआ था।

आरा हाउस : स्वतंत्रता संग्राम की अमूल्य थाती

जिले की यह अमूल्य धरोहर, ऐतिहासिक भवन अपनी जीर्ण-शीर्ण अवस्था में जीर्णोद्धार की बाट जोह रहा है। यह मात्र ईंट-पत्थरों से बनी इमारत नहीं, बल्कि हमारे स्वतंत्रता संग्राम की वह अमूल्य थाती है, जो आने वाली पीढ़ियों को त्याग और बलिदान की प्रेरणा देती है। बावजूद इसके, अत्यंत खेद का विषय है कि गौरवशाली इतिहास का यह स्मारक प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ रही है।

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KRISHNA KUMAR
KRISHNA KUMAR
बिहार के निवासी डॉ. कृष्ण कुमार एक भारतीय पत्रकार है। हिंदी दैनिक समाचार पत्र राष्ट्रीय सहारा, नव संदेश, न्यूज वेबसाईट खबरें आपकी के संपादक, ट्रस्टी, मां आरण्य देवी मंदिर विकास ट्रस्ट तथा सचिव, सनातनी गंगा फाउंडेशन, भोजपुर, आरा।

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