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राज्य निर्वाचन आयोग के आदेश ने बढ़ाई बिहिया चेयरमैन की मुश्किलें

Bihiya Chairman order: प्रतिवादी का यह दावा कि बिहार नगरपालिका अधिनियम-2007 की धारा-18 में बैठक नहीं करने पर अयोग्यता का प्रावधान नहीं है, आयोग द्वारा अस्वीकार्य कर दिया गया है।

  • हाइलाइट: Bihiya Chairman order
    • वाद संख्या-42/2025, में राज्य निर्वाचन आयोग का महत्वपूर्ण निर्णय
    • बैजनाथ प्रसाद बनाम सचिन कुमार गुप्ता, मामले में आया प्रारंभिक निर्णय

पटना। राज्य निर्वाचन आयोग ने वाद संख्या-42/2025, बैजनाथ प्रसाद बनाम सचिन कुमार गुप्ता, मामले में अपना प्रारंभिक निर्णय सुनाया है, जिससे बिहिया नगर पंचायत के चेयरमैन सचिन कुमार गुप्ता की मुश्किलें बढ़ गई हैं। यह मामला बिहार नगरपालिका अधिनियम-2007 के तहत कर्तव्यों के निर्वहन से संबंधित है और आयोग द्वारा इसकी गहन समीक्षा कर आदेश पारित की गई है।

आयोग ने इस मामले में दोनों पक्षों के तर्कों, वाद के साथ संलग्न साक्ष्यों, बिहार नगरपालिका अधिनियम-2007 के संगत प्रावधानों तथा माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा ‘रजनी कुमारी वाद’ में निर्धारित मार्गदर्शक सिद्धांतों की विस्तृत परीक्षण के उपरांत, आयोग ने वादी के तर्क को नियम संगत पाया है। आयोग इस बात से सहमत है कि यह वाद बिहार नगरपालिका अधिनियम-2007 की धारा-18 के अंतर्गत आता है, क्योंकि इसमें मुख्य पार्षद के वैधानिक कर्तव्यों के निर्वहन में कथित विफलता का आरोप है।

नगर निकाय बोर्ड की सामान्य बैठक एवं सशक्त स्थायी समिति की बैठक बुलाने की वैधानिक जिम्मेदारी मुख्य पार्षद की होती है। बिहार नगरपालिका अधिनियम-2007 की धारा-27 (A) (1) में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि नगरपालिका के सभी कार्य मुख्य पार्षद के पर्यवेक्षण और नियंत्रण में किए जाएंगे। अतः, वैधानिक प्रावधानों के अधीन, बोर्ड एवं सशक्त स्थायी समिति की बैठकें आयोजित करना मुख्य पार्षद का कर्तव्य है। इसी कारणवश, यह मामला उक्त अधिनियम की धारा-18 (1) के अंतर्गत शामिल होता है। आयोग का मानना है कि कर्तव्यों का निर्वहन जान-बूझकर नहीं किया गया है अथवा किसी अन्य कारण से, यह वाद के ‘मेरिट’ का विषय है जिस पर सुनवाई के दौरान विस्तृत विचार किया जाएगा।

प्रतिवादी का यह दावा कि बिहार नगरपालिका अधिनियम-2007 की धारा-18 में बैठक नहीं करने पर अयोग्यता का प्रावधान नहीं है, आयोग द्वारा अस्वीकार्य कर दिया गया है। आयोग ने इस तर्क को स्वीकार योग्य नहीं पाया, क्योंकि धारा-18 में कर्तव्यों के निर्वहन से संबंधित प्रावधान हैं, और कर्तव्यों का पालन न करना उसकी परिधि में आता है।

प्रतिवादी द्वारा प्रस्तुत प्रारंभिक आपत्ति (Preliminary Objection) को खारिज कर दिया गया है। आयोग ने यह निर्णय लिया है कि बिहार नगरपालिका अधिनियम-2007 की धारा-18 (1) (1) एवं अन्य सुसंगत धाराओं के अंतर्गत इस मामले की सुनवाई की जाएगी। इस मामले में सुनवाई की अगली तिथि 03.02.2026 निर्धारित की गई है।

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