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होल्डिंग टैक्स की विसंगतियों को लेकर शाहपुर नगर में तनाव की स्थिति

Holding tax – शाहपुर नगर पंचायत: होल्डिंग टैक्स की विसंगतियों को लेकर गहराता विवाद, निवासियों में भारी असंतोष

jay kumar
  • हाइलाइट: Holding tax
  • टैक्स निर्धारण के वर्षों में स्पष्टता की कमी
  • अलग-अलग समयावधि से की जा रही वसूली
  • स्थानीय निवासियों और कर संग्राहकों के बीच तनाव

आरा। जिले के शाहपुर नगर पंचायत में इन दिनों होल्डिंग टैक्स की वसूली को लेकर आम जनमानस के बीच तरह-तरह की चर्चाएं और विवाद की स्थिति बनी हुई है। टैक्स निर्धारण के वर्षों में स्पष्टता की कमी और अलग-अलग समयावधि से की जा रही वसूली ने स्थानीय निवासियों और कर संग्राहकों के बीच तनाव की स्थिति सामने आ रही है।

विवाद की जड़ें शाहपुर नगर पंचायत के प्रथम चुनाव से जुड़ी हैं। विदित हो कि नगर पंचायत का पहला चुनाव वर्ष 2007 में संपन्न हुआ था। उस समय चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने वाले अभ्यर्थियों और उनके समर्थकों व प्रस्तावकों के लिए यह अनिवार्य किया गया था कि वे वर्ष 1996 से बकाया होल्डिंग टैक्स का भुगतान करें। इसके विपरीत, वर्तमान में यह देखा जा रहा है कि सामान्य रूप से टैक्स की वसूली वर्ष 2013 से प्रभावी मानी जा रही है। टैक्स निर्धारण के इन दो अलग-अलग पैमानों ने अब विवाद का रूप ले लिया है।

हाल ही में वार्ड संख्या 06 में इस विसंगति का सीधा प्रभाव देखने को मिला। पुराने कर संग्राहक सुनील चौबे जब क्षेत्र में टैक्स वसूली के लिए पहुंचे, तो वहां दो स्थानीय निवासियों के साथ उनकी तीखी गहमागहमी हो गई। निवासियों का तर्क था कि जब दूसरे वार्डों में वर्ष 2013 से होल्डिंग टैक्स जमा किया जा रहा है, तो उनसे 1996 से टैक्स की वसूली क्यों की गई है? असंतोष इस कदर बढ़ा कि निवासियों ने अपनी जमा की गई रसीद को रद्द करने और तत्काल पैसे वापस करने की मांग की।

कर संग्राहक सुनील चौबे ने प्रशासनिक नियमों का हवाला देते हुए निवासियों को समझाने का काफी प्रयास किया, लेकिन वे अपनी मांग पर अड़े रहे। अंततः, स्थिति को बिगड़ता देख कर संग्राहक को दोनों रसीदें निरस्त करनी पड़ीं और निवासियों को उनकी जमा राशि वापस लौटानी पड़ी।

इस घटना के बाद सुनील चौबे ने बताया कि टैक्स वसूली की इस प्रक्रिया में उन्हें काफी मानसिक और व्यवहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आम जनता के साथ-साथ कई पूर्व प्रत्याशी, जिन्होंने चुनाव के समय 1996 से टैक्स भरा था, अब वे भी सक्रिय हो गए हैं। उनकी मांग है कि 2013 से पूर्व जमा किए गए उनके टैक्स को या तो भविष्य के लिए समायोजित किया जाए या फिर उन्हें वह राशि वापस की जाए। टैक्स के नियमों में एकरूपता की कमी के कारण नगर पंचायत क्षेत्र में असमंजस का माहौल है।

Bijay singh
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