Junior Engineer Shahpur: पटना के रिशुश्री से कम नहीं है भोजपुर के शाहपुर नगर पंचायत के कनीय अभियंता जयनंदन चौधरी के कारनामे
- हाइलाइट: Junior Engineer Shahpur
- शाहपुर नगर पंचायत में भ्रष्टाचार का नया अध्याय
- कागजों पर बनी सड़क और कार्यालय से गायब रहते जेइ
आरा। विकास कार्यों में भ्रष्टाचार की खबरें अक्सर सुर्खियां बटोरती रही हैं, लेकिन शाहपुर नगर पंचायत से सामने आया ताजा मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अपने कार्यों को लेकर लगातार चर्चा में रहने वाली यह नगर पंचायत एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। इस बार मामला केवल अनियमितता का नहीं, बल्कि सरकारी धन की खुली लूट का है, जहाँ विकास की एक ऐसी सड़क का निर्माण किया गया जो धरातल पर कहीं मौजूद ही नहीं है।
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब पता चला कि जिस सड़क का अस्तित्व ही नहीं है, उसका भुगतान भी नगर पंचायत द्वारा कर दिया गया। यह स्थिति न केवल सरकारी कोष के दुरुपयोग को दर्शाती है, बल्कि उन विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाती है जो इस पूरी प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार हैं। कागजों पर सड़क तैयार हो गई, बिल पास हो गए और भुगतान भी हो गया।
Junior Engineer Shahpur : पूरे महीने में महज चार से पांच दिन ही कार्यालय आना
इस पूरे घटनाक्रम के बाद जब सच्चाई जानने के लिए नगर पंचायत के कनीय अभियंता जयनंदन चौधरी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो स्थिति और भी चिंताजनक सामने आई। नगर कार्यालय पहुँचने पर पता चला कि कनीय अभियंता अपने कार्यालय में उपस्थित ही नहीं हैं। छानबीन में जो तथ्य सामने आए, वे और भी हैरान करने वाले हैं। सूत्रों के अनुसार, कनीय अभियंता जयनंदन चौधरी पूरे महीने में महज चार से पांच दिन ही कार्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं।
एक जिम्मेदार पद पर आसीन अधिकारी का इस प्रकार गैर-जिम्मेदाराना रवैया यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर शाहपुर नगर पंचायत का कामकाज कैसे चल रहा है। जब विभाग के मुख्य अभियंता ही कार्यालय में मौजूद नहीं होंगे, तो फाइलों का निपटारा, योजनाओं का क्रियान्वयन और कार्यों की मॉनिटरिंग कौन करेगा? यह स्पष्ट है कि उच्चाधिकारियों की ढिलाई और जवाबदेही के अभाव में ही ऐसे भ्रष्टाचार पनपते हैं।
इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग
कागजों पर बनी सड़क का भुगतान होना और कनीय अभियंता का कार्यालय से नदारद रहना, किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है। यह केवल एक सड़क का मामला नहीं है, बल्कि नगर पंचायत की कार्यप्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार की एक बानगी भर है। यदि इसकी उच्च स्तरीय जांच नहीं कराई गई, तो सरकारी धन का यह बंदरबांट जारी रहेगा और स्थानीय जनता विकास के नाम पर केवल छलावा पाती रहेगी।
इधर, नगर के कई समाजसेवियों ने कहा कि इस मामले में जिला प्रशासन को कड़ी संज्ञान लेना चाहिए। न केवल इस कथित सड़क निर्माण की जांच होनी चाहिए, बल्कि उन तमाम लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने सरकारी धन के लूट में साथ दिया है।
इसके अलावा, कार्यालय में अधिकारियों की अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए उन पर भी प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही को रोका जा सके। फिलहाल, शाहपुर नगर पंचायत की कार्यशैली एक बार फिर कटघरे में है और देखना है क्या यह मामला भी फाइलों के ढेर में दबकर रह जाएगा?

