Homeआरा भोजपुरजगदीशपुरवीर कुंवर सिंह विजयोत्सव की तैयारी को लेकर बैठक

वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव की तैयारी को लेकर बैठक

Kunwar Singh Vijayotsav-2024: देश के महान स्वंत्रता सेनानी बाबू वीर कुंवर सिंह विजय उत्सव को ले कर तैयारी शुरू हो गई है।

Kunwar Singh Vijayotsav-2024: देश के महान स्वंत्रता सेनानी बाबू वीर कुंवर सिंह विजय उत्सव को ले कर तैयारी शुरू हो गई है। बाबू वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव समारोह की तैयारी को लेकर जगदीशपुर अनुमंडल कार्यालय में एक बैठक का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता जगदीशपुर अनुमंडलाधिकारी संजीत कुमार ने की।

  • हाइलाइट :- Kunwar Singh Vijayotsav-2024
    • जगदीशपुर अनुमंडल कार्यालय में एसडीएम संजीत कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक
    • 23 अप्रैल को राजकीय महोत्सव के रूप में मनाया जाता है बाबू वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव

आरा/जगदीशपुर: देश के महान स्वंत्रता सेनानी बाबू वीर कुंवर सिंह विजय उत्सव को ले कर तैयारी शुरू हो गई है। बाबू वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव समारोह की तैयारी को लेकर जगदीशपुर अनुमंडल कार्यालय में एक बैठक का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता जगदीशपुर अनुमंडलाधिकारी संजीत कुमार ने की।

जगदीशपुर किला मैदान में बाबू वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव दिवस 23 अप्रैल को राजकीय महोत्सव के रूप में मनाया जाना है। इससे संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी के कार्यालय में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी राजीव चंद्र सिंह सहित विभिन्न पदाधिकारी के साथ तैयारी से संबंधित बैठक की गई तथा आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए।

आइये जानते हैं कौन हैं वीर कुंवर सिंह ?

वीर कुंवर सिंह का जन्म 13 नवंबर सन 1777 में बिहार के भोजपुर जिला अंतर्गत जगदीशपुर में हुआ था। कुंवर सिंह के पिता का नाम बाबू साहबजादा सिंह व माताजी का नाम पंचरत्न कुंवर था। जिन्हें राजा भोज का वंशज बताया जाता है। कुंवर चार भाई थे। उनके छोटे भाई अमर सिंह, दयालु सिंह और राजपति सिंह थे। साल 1826 में उनके पिता की मौत के बाद कुंवर सिंह जगदीशपुर के तालुकदार बन गए थे। कहा जाता है कि कुंवर ने 1857 के युद्ध में अंग्रेजों को चने चबवा दिए थे। वीर कुंवर की जिस बात का आज भी जिक्र होता है वो ये कि उन्होंने 80 साल की उम्र में भी अपनी वीरता को कायम रखा और अंग्रेजों से अपनी लड़ाई जारी रखी।

बताया जाता है कि, साल 1857 में आजादी की पहली लड़ाई के दौरान उन्होंने बिहार में अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे। साल 1848 से लेकर 1849 के दौरान जब अंग्रेजों ने विलय नीति अपनाई थी जो कुंवर सिंह को पसंद नहीं आयी और उनके खिलाफ वो खड़े हो गए। उन्होंने रामगढ़ के सिपाहियों और बंगाल के बैरकपुर के साथ मिलकर अंग्रेजों पर हमला बोला और अपने साहस, कुशल सैन्य नेतृत्व से वो अंग्रेजों को घुटनों पर ले आए। वीर कुंवर सिंह ने आरा, जगदीशपुर समेत आजामगढ़ को आजाद कराया।

खुद कांट दी थी अपनी बांह और कर दिया गंगा मैया को अर्पण

सन 1858 में वीर कुंवर ने जगदीशपुर में अंग्रेजों का झंडा हटाकर अपना झंडा लहराया था। बताया जाता है कि बलिया होकर भोजपुर के शिवपुर गंगा घाट के तरफ में वो अपनी सेना के साथ गंगा नदी पार कर थे कि अंग्रेजों ने उन्हें घेर लिया और गोलीबारी कर दी। जानकार बताते हैं कि, इस दौरान उनके हाथ पर गोली लग गई थी और गोली का जहर उनके शरीर में फैल रहा था। कुंवर नहीं चाहते थे कि वो जिंदा या मुर्दा हालत में अंग्रेजों के हाथ लगे जिस कारण उन्होंने तलवार से अपनी बांह काट दी थी और गंगा मैया को अर्पण कर दिया था।

23 अप्रैल 1858 को कुंवर सिंह अंग्रेजों से लड़कर अपने महल पहुंचे थे। इस दौरान उन्हें काफी चोटें आयी थी। उनका घाव इतना गहरा था कि उन्हें बचाया नहीं जा सका और 26 अप्रैल 1858 को उनकी मौत हो गई। वहीं, 23 अप्रैल को पूरे बिहार में कुंवर सिंह विजयोत्सव दिवस मनाया जाता है

Khabre Apki
Khabre Apki
Khabre Apki covers all Breaking News in Hindi
- Advertisment -
Bharat Ji Shahpur
School AD

Most Popular