Water ATM Shahpur: भीषण गर्मी के इस दौर में, जब आम जनता को पानी की सबसे अधिक आवश्यकता है, तब ये मशीनें कबाड़ में तब्दील होकर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही हैं।
- हाइलाइट: Water ATM Shahpur
- कही धूल फांक रही हैं तो कही लावारिस हालत में पड़ी हैं
आरा,भोजपुर। जिले के शाहपुर नगर पंचायत में लाखों की लागत से स्थापित वाटर एटीएम आज उपेक्षा और प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ चुके हैं। किसी समय यह योजना स्थानीय निवासियों, राहगीरों और दूर-दराज से आने वाले ग्रामीणों के लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर उभरी थी, लेकिन आज यह केवल सरकारी फाइलों में सिमटी एक असफल पहल बनकर रह गई है। भीषण गर्मी के इस दौर में, जब आम जनता को पानी की सबसे अधिक आवश्यकता है, तब ये मशीनें कबाड़ में तब्दील होकर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही हैं।
शाहपुर नगर पंचायत के विभिन्न प्रमुख स्थानों पर जनहित को ध्यान में रखते हुए वाटर एटीएम स्थापित किए गए थे ताकि लोगों को शुद्ध और ठंडा पानी सुलभ हो सके। इन मशीनों के पीछे सरकार का उद्देश्य स्पष्ट था कि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को बाजार के महंगे पानी पर निर्भर न रहना पड़े। दुर्भाग्यवश, सही योजना और नियमित रखरखाव के अभाव में यह नेक पहल पूरी तरह विफल साबित हो रही है।
Water ATM Shahpur : वाटर एटीएम मशीनें धूल फांक रही
हाल ही में जब स्थिति का जमीनी जायजा लिया गया, तो तस्वीर बेहद निराशाजनक सामने आई। नगर कार्यालय परिसर में खड़ी वाटर एटीएम मशीनें धूल फांक रही हैं, वहीं बड़ी मठिया के पास लगी मशीनें लावारिस हालत में पड़ी हैं। इन मशीनों की ऐसी स्थिति यह बयां करती है कि स्थापना के बाद इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। रखरखाव के अभाव में न केवल मशीनें खराब हो चुकी हैं, बल्कि कई स्थानों पर तो यह पूरी तरह से निष्क्रिय पड़ी हैं।
वही, लोगों को जानकारी तक नहीं है कि नगर में ऐसी कोई सुविधा उपलब्ध भी है या नहीं। अपनी प्यास बुझाने के लिए उन्हें बाजार से महंगे दामों पर बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि प्रशासन ने इन वाटर एटीएम को सही और सुलभ स्थानों पर लगाया होता और समय-समय पर इनकी मरम्मत की होती, तो आज यह योजना लोगों के लिए वास्तव में एक वरदान सिद्ध होती।
नगर पंचायत प्रशासन के दावों और हकीकत के बीच का अंतर इस भीषण गर्मी में और भी स्पष्ट हो गया है। प्रशासन द्वारा जगह-जगह प्याऊ खोलने का जो दावा किया गया था, वह भी खोखला साबित हुआ है। अधिकांश प्याऊ या तो बंद हैं या उनमें पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। योजना के क्रियान्वयन में बरती गई गंभीर लापरवाही का एक बड़ा उदाहरण स्थानों का गलत चयन भी है।


