Ajit Kushwaha Dumraon: डुमरांव के पूर्व विधायक अजित कुशवाहा ने ईंधन की उपलब्धता और प्रशासनिक दावों के बीच के विरोधाभास को रेखांकित करते हुए सिस्टम और सरकार की विफलता पर निशाना साधा है।
- हाइलाइट: Ajit Kushwaha Dumraon
- पम्प वाले कह रहे हैं की तेल नहीं है।
- अब तो लिख कर भी दे रहे हैं की तेल नहीं है।
- जनता कह रही है की तेल नहीं मिल रहा है।
- डीएम साहब लोग कह रहे हैं की तेल की कोई कमी नहीं है। ज्यादा पैनिक नहीं होना है
- इरान में होर्मूज जल डमरू मध्य में तनाव चल रहा है।
- भारत के प्रधान मन्त्री बंगाल में झाल-मुड़ी खा रहे हैं।
- गृह मन्त्री उल्टा लटका के सीधा कर रहे हैं।
- मन्त्री लोग बंगाल में सनातन को बचाने के लिए बिना लहसुन-प्याज के मछली खा रहे हैं।
- और देश का जेन-जी रील बनाने में व्यस्त है।
- बाकी लोग अपनी -अपनी ज़िन्दगी में मस्त हैं।
बक्सर। डुमरांव के पूर्व विधायक अजित कुशवाहा ने प्रदेश और देश की वर्तमान स्थिति पर कटाक्ष करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने ईंधन की उपलब्धता और प्रशासनिक दावों के बीच के विरोधाभास को रेखांकित करते हुए सिस्टम की विफलता पर निशाना साधा है।
अजित कुशवाहा ने कहा कि एक तरफ जमीनी हकीकत यह है कि पेट्रोल पंप संचालकों द्वारा साफ तौर पर तेल न होने की बात कही जा रही है और अब तो लिखित में भी इसकी सूचना दी जाने लगी है। आम जनता तेल के लिए परेशान है और उन्हें आवश्यक ईंधन प्राप्त करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके विपरीत, जिला प्रशासन और डीएम स्तर के अधिकारी सार्वजनिक रूप से यह दावा कर रहे हैं कि तेल की कोई कमी नहीं है और जनता को पैनिक न होने की सलाह दी जा रही है। उन्होंने इस विरोधाभास को सरकार की संवेदनहीनता का प्रतीक बताया है।
Ajit Kushwaha Dumraon: प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के बंगाल दौरों पर कटाक्ष
अपने तीखे लहजे में पूर्व विधायक ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार की प्राथमिकताओं की आलोचना की। उन्होंने कहा कि एक ओर ईरान के होर्मूज जल डमरू मध्य में तनाव के कारण वैश्विक परिस्थितियाँ संवेदनशील बनी हुई हैं, जिसका प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ना स्वाभाविक है। वहीं दूसरी ओर, केंद्र के शीर्ष नेतृत्व की प्राथमिकताएं देश की गंभीर समस्याओं से कोसों दूर दिखाई देती हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के बंगाल दौरों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब देश ईंधन के संकट और अन्य बुनियादी चुनौतियों से जूझ रहा है, तब शासन की बागडोर संभालने वाले नेता राजनीतिक रैलियों और चुनावी गतिविधियों में व्यस्त हैं।
बंगाल में सनातन को बचाने के लिए बिना लहसुन-प्याज के मछली खा रहे हैं
अजित कुशवाहा ने आगे कहा कि आज के दौर में सत्ताधारी दल के नेता सनातन संस्कृति के संरक्षण की बात तो करते हैं, लेकिन उनके कृत्य विरोधाभासी हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस तरह से जनता के हितों को दरकिनार कर केवल दिखावे और चुनावी माहौल बनाने पर जोर दिया जा रहा है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है।
अजित कुशवाहा ने देश की युवा पीढ़ी और समाज के अन्य वर्गों की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज का युवा, जिसे ‘जेन-जी’ कहा जाता है, अपनी ऊर्जा सोशल मीडिया पर रील बनाने जैसे कार्यों में खर्च कर रहा है, जबकि बाकी समाज अपनी-अपनी समस्याओं और दिनचर्या में इस कदर मग्न है कि देश के बिगड़ते हालातों पर उनका ध्यान ही नहीं है।

