MLC elections: भोजपुर जिला अंतर्गत शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक राहुल तिवारी ने एमएलसी चुनाव के औचित्य पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एक गंभीर प्रश्न खड़ा किया है।
- हाइलाइट: MLC elections
- शाहपुर के पूर्व विधायक राहुल तिवारी ने कहा: यह चुनाव जनता पर बेवजह का बोझ डाल रहा है
- एमएलसी चुनाव विशिष्ट वर्ग और प्रभावशाली लोगों के वर्चस्व को बनाए रखने का एक साधन मात्र
- धन्ना सेठ पृष्ठभूमि या दबंग प्रवृत्ति वाले लोग पहुंच रहे सदन, यह आम नागरिकों के हित में नहीं
पटना। भारतीय राजनीति में चुनाव का महत्व एक सशक्त लोकतंत्र की आधारशिला है। हमारे देश में समय-समय पर विभिन्न स्तरों पर चुनाव संपन्न कराए जाते हैं, ताकि जनहितैषी नीतियां बन सकें और जनता की आवाज सदन तक पहुंच सके। हालांकि, हाल के दिनों में एमएलसी (विधान परिषद सदस्य) चुनाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है। भोजपुर जिला अंतर्गत शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक राहुल तिवारी ने इस विषय पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एक गंभीर प्रश्न खड़ा किया है। उनका यह बयान न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि चुनावी सुधार की दिशा में एक विचारणीय मुद्दा भी है।
MLC elections : जनता पर बेवजह का बोझ : पूर्व विधायक
पूर्व विधायक राहुल तिवारी ने अपने वक्तव्य में स्पष्ट रूप से कहा है कि एमएलसी चुनाव का दौर अब समाप्त होना चाहिए, क्योंकि यह जनता पर बेवजह का बोझ डाल रहा है। उनका तर्क है कि वर्तमान समय में इन चुनावों की प्रासंगिकता कम होती जा रही है और यह आम नागरिकों के हित में कहीं से भी दिखाई नहीं देते। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस प्रकार की चुनावी प्रक्रियाएं नेताओं की छवि पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही हैं, जो कि लोकतांत्रिक ढांचे के लिए कतई उचित नहीं है।
धन्ना सेठ पृष्ठभूमि या दबंग प्रवृत्ति वाले लोगों का बना मंच
तिवारी के अनुसार, वर्तमान में एमएलसी चुनाव की सबसे बड़ी विसंगति यह है कि इसमें बाहुबली और दबंग छवि वाले लोग अधिक सक्रिय दिखाई देते हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ये चुनाव एक ऐसा मंच बन गया हैं जहाँ धन्ना सेठ पृष्ठभूमि या दबंग प्रवृत्ति वाले लोग आसानी से अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर लेते हैं। ऐसे में, आम आदमी या जमीनी स्तर पर सेवा करने वाले ईमानदार राजनेताओं के लिए सदन तक पहुंचना अत्यंत कठिन हो गया है।
प्रभावशाली लोगों के वर्चस्व को बनाए रखने का यह साधन
ऐतिहासिक संदर्भ को जोड़ते हुए पूर्व विधायक ने यह भी उल्लेख किया कि यह चुनावी नियम संभवतः अंग्रेजों के शासनकाल से चले आ रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि औपनिवेशिक युग की व्यवस्थाएं वर्तमान समय की चुनौतियों के साथ मेल नहीं खातीं। आज के आधुनिक भारत में हमें ऐसी प्रणाली की आवश्यकता है जो पारदर्शी हो और जिसमें केवल योग्य और जनसेवा के लिए समर्पित व्यक्ति ही स्थान पा सकें।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नीति-निर्माताओं को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और यह तय करना चाहिए कि क्या ये चुनाव वाकई जनता की सेवा के लिए हैं या फिर केवल विशिष्ट वर्ग और प्रभावशाली लोगों के वर्चस्व को बनाए रखने का एक साधन मात्र हैं।
राहुल तिवारी का यह स्पष्ट मानना है कि एमएलसी चुनाव के कारण बड़े व्यापारी और धनबल का प्रयोग करने वाले लोग सदन में पहुंच रहे हैं, जो आम जनता की समस्याओं से पूरी तरह वाकिफ नहीं होते। जब सदन में बाहुबलियों का प्रभाव बढ़ता है, तो आम जनता की मूलभूत समस्याएं गौण हो जाती हैं।


