Hindi Journalism Day: हिन्दी पत्रकारिता दिवस के विशेष अवसर पर हम न केवल भाषा की यात्रा का स्मरण करते हैं, बल्कि उन मूल्यों का भी पुनरावलोकन करते हैं जिन्होंने पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बनाया है। इस पावन अवसर पर अपनी बात रखते हुए प्रसिद्ध समाजसेवी और प्रबुद्ध जन राजू ओझा ने पत्रकारिता के स्वरूप और उसके उत्तरदायित्व पर अत्यंत महत्वपूर्ण विचार साझा किए।
राजू ओझा ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि हिन्दी पत्रकारिता केवल सूचनाओं के आदान-प्रदान का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज को जागरूक करने, लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाने और आम जनमानस की भावनाओं को एक सशक्त स्वर देने का मुख्य मंच है। उन्होंने कहा कि पत्रकार वास्तव में समाज का दर्पण होता है, जो समाज की सकारात्मकता और चुनौतियों को निष्पक्षता के साथ समाज के समक्ष रखता है।
Hindi Journalism Day : प्रथम हिन्दी समाचार पत्र ‘उदंत मार्तण्ड’ का प्रकाशन
इतिहास के पन्नों को पलटते हुए उन्होंने बताया कि हिन्दी पत्रकारिता की नींव अत्यंत संघर्षपूर्ण काल में रखी गई थी। लगभग दो शताब्दी पूर्व जब देश में अंग्रेजी, फारसी, उर्दू और बांग्ला भाषाओं का वर्चस्व था, तब 30 मई 1826 का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हुआ। उस दिन पंडित युगुल किशोर शुक्ल ने प्रथम हिन्दी समाचार पत्र ‘उदंत मार्तण्ड’ का प्रकाशन कर हिन्दी पत्रकारिता की मजबूत आधारशिला रखी।
राजू ओझा ने कहा कि ‘उदंत मार्तण्ड’ ने न केवल हिन्दी भाषा को एक नई पहचान दिलाई, बल्कि भारतीय समाज में जनचेतना का संचार भी किया। उस समय ब्रिटिश शासन की कठिन परिस्थितियां थीं और डाक शुल्क में भी रियायत नहीं थी, जिसके कारण यह साप्ताहिक पत्र लंबे समय तक प्रकाशित नहीं रह सका। परंतु, इसके द्वारा डाली गई नींव और इसका ऐतिहासिक योगदान सदैव अमर रहेगा, जिसने भविष्य की पत्रकारिता के लिए मार्ग प्रशस्त किया।
वर्तमान परिप्रेक्ष्य पर चर्चा करते हुए राजू ओझा ने कहा कि आज हिन्दी पत्रकारिता देश के अंतिम छोर तक पहुंच चुकी है और यह समाज की वास्तविक आवाज बन गई है। उन्होंने पत्रकारिता में निष्पक्षता को सबसे बड़ी ताकत बताते हुए जोर दिया कि एक पत्रकार की निर्भीकता ही समाज में न्याय और सत्य की स्थापना करती है।
इस अवसर पर उन्होंने सभी वरिष्ठ पत्रकारों, मार्गदर्शकों, युवा साथियों और नवोदित पत्रकारों को हिन्दी पत्रकारिता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने आह्वान किया कि पत्रकारिता के इस महान कार्य को हमेशा निष्पक्ष, निर्भीक और जनहितकारी मूल्यों के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। समाज के प्रति समर्पित यह निष्पक्ष पत्रकारिता ही देश को प्रगति के पथ पर अग्रसर करने में अपनी महती भूमिका निभाती रहेगी।

