Jun 01, Bihiya: राज्य निर्वाचन आयोग के फैसलों और पटना उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद कानूनी पेंच में फंस गया बिहिया नगर पंचायत के मुख्य पार्षद का पद।
- हाइलाइट: Jun 01, Bihiya
- सचिन कुमार गुप्ता की याचिका पर पटना उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप
- संभावित उम्मीदवारों को झटका, चर्चा के केंद्र में बिहिया नगर पंचायत
- बिहिया नगर पंचायत के चेयरमैन पद के चुनावी भविष्य पर लगा ग्रहण
पटना। राज्य निर्वाचन आयोग के फैसलों और पटना उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद बिहिया नगर पंचायत के मुख्य पार्षद का पद कानूनी पेंच फंस गया है। घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब राज्य निर्वाचन आयोग ने बिहिया नगर पंचायत के चेयरमैन सचिन कुमार गुप्ता को पदमुक्त करने का आदेश जारी किया। इस आदेश के बाद नगर पंचायत में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गईं और आगामी चुनाव की संभावनाओं को देखते हुए कई दावेदारों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दीं। हालांकि, यह चुनावी हलचल उस समय अचानक थम गई जब इस मामले ने कानूनी रूप ले लिया और मामला पटना उच्च न्यायालय की दहलीज तक पहुंच गया।
Jun 01 Bihiya : न्यायालय ने राज्य निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता को दिए स्पष्ट निर्देश
न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत, माननीय न्यायमूर्ति श्री अजीत कुमार की पीठ में इस मामले की सुनवाई हुई। संबंधित रिट याचिका (सिविल रिट क्षेत्राधिकार वाद संख्या 8076, 2026) के माध्यम से जब न्यायालय ने परिस्थितियों का अवलोकन किया, तो 26 मई 2026 को एक महत्वपूर्ण मौखिक निर्देश जारी किया गया। न्यायालय ने राज्य निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता को यह स्पष्ट निर्देश दिए कि याचिका में उठाए गए गंभीर विधिक बिंदुओं के संदर्भ में एक विस्तृत और तथ्यपरक हलफनामा प्रस्तुत किया जाए। न्यायिक दृष्टिकोण से यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि न्यायालय ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आयोग को निर्देशित किया है कि जब तक मामले की अगली सुनवाई पूर्ण नहीं हो जाती, तब तक 28 अप्रैल 2026 के आयोग के आदेश को जल्दबाजी में कार्यान्वित न किया जाए।
इस कानूनी उलझन का एक तकनीकी पहलू भी सामने आया है, प्राप्त जानकारी के अनुसार, न्यायालय के आदेश में प्रतिवादी संख्या 05 के रूप में जिला मजिस्ट्रेट-सह-जिला निर्वाचन पदाधिकारी, पटना का उल्लेख था, जो संभवतः एक लिपिकीय या तकनीकी त्रुटि प्रतीत होती है। इस त्रुटि के कारण, भोजपुर के जिला मजिस्ट्रेट-सह-जिला निर्वाचन पदाधिकारी तक न्यायालय का आधिकारिक आदेश समय पर नहीं पहुंच सका।
बिहिया के चुनावी वातावरण में पसरा सन्नाटा:
न्यायालय ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए अगली सुनवाई की तिथि 30 जून 2026 निर्धारित की है। इस निर्णय के आने के बाद से ही, बिहिया के चुनावी वातावरण में सन्नाटा पसर गया है। जिन उम्मीदवारों ने अपनी जीत के समीकरण बनाने शुरू कर दिए थे और जो क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान चला रहे थे, वे अब दुविधा में हैं। उनके लिए यह प्रतीक्षा का समय है, क्योंकि 30 जून का निर्णय ही यह तय करेगा कि बिहिया नगर पंचायत के चेयरमैन पद पर किसका अधिकार होगा और चुनाव की प्रक्रिया किस रूप में आगे बढ़ेगी।
फिलहाल, बिहिया के संभावित प्रत्याशी उच्च न्यायालय की अगली सुनवाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अंततः, 30 जून को होने वाली सुनवाई ही बिहिया नगर पंचायत के आगामी चुनावी भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगी। तब तक, बिहिया की राजनीति का ऊंट किस करवट बैठेगा, यह देखना अत्यंत रोचक और महत्वपूर्ण होगा।

