Shahpur NP New NGO: नये एनजीओ के सफाई अभियान की शुरुआत के साथ ही यह स्पष्ट हो गया कि जमीनी स्तर पर तैयारी पूरी तरह नदारद है।
- हाइलाइट: Shahpur NP New NGO
- शाहपुर में स्वच्छता के दावों की जमीनी हकीकत
- एनजीओ की कार्यक्षमता पहले दिन ही इतनी लचर
- क्या एजेंसी ने अन्य नगर निकायों में स्वच्छता कार्यों को किया है?
आरा। जिले की शाहपुर नगर पंचायत में सफाई व्यवस्था को लेकर एक नये एनजीओ को जिम्मेदारी सौंपी गई है। नगरवासियों को उम्मीद थी कि अब सड़कों और गलियों की तस्वीर बदलेगी। लेकिन व्यवस्था परिवर्तन के पहले ही दिन जिस तरह की बदहाली और कुप्रबंधन सामने आया है, उसने न केवल एनजीओ की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, बल्कि नगर को एक बार फिर से अंधेर नगरी वाली कहावत (मुहावरा) कि स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है।
Shahpur NP New NGO: स्वच्छता का लक्ष्य कैसे हासिल करेगी एनजीओ?
सफाई अभियान की शुरुआत के साथ ही यह स्पष्ट हो गया कि जमीनी स्तर पर तैयारी पूरी तरह नदारद थी। आम नागरिकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि एनजीओ द्वारा न तो पर्याप्त संख्या में सफाई कर्मियों की तैनाती की गई और न ही कचरा प्रबंधन के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई। जब कार्य के लिए संसाधन ही नहीं जुटाए गए, तो स्वच्छता का लक्ष्य कैसे हासिल किया जा सकेगा? यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सार्वजनिक सेवा के प्रति गंभीर उदासीनता को दर्शाता है।
नगर के बड़ा बाबू के पास एनजीओ की सेवा शर्त उपलब्ध नहीं
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चिंताजनक पहलू एक व्यवस्थित शिकायत निवारण तंत्र का अभाव है। किसी भी निकाय में एनजीओ की सेवा शर्त व्यवस्था में एक हेल्पलाइन नंबर या शिकायत दर्ज कराने का पोर्टल अनिवार्य होता है ताकि नागरिक अपनी समस्याओं को संबंधित अधिकारियों तक पहुँचा सकें। दुर्भाग्यपूर्ण है कि शाहपुर में इस नई व्यवस्था के तहत न तो कोई शिकायत नंबर जारी किया गया और न ही किसी एनजीओ अधिकारी का नाम सार्वजनिक किया गया। बिना किसी संवाद तंत्र के कोई भी एजेंसी अपनी जवाबदेही से बचती है, और यही स्थिति वर्तमान में शाहपुर की है।
कनीय अभियंता ने एनजीओ का नाम कुमार अभिषेक बताया
जिम्मेवार पदों पर बैठे नगर कर्मियों को एनजीओ का नाम पता तक मालूम नहीं, संबंधित अधिकारी या तो इस विषय पर मौन साधे हुए हैं या फिर टालमटोल की नीति अपना रहे हैं। वही जेइ जयनंदन चौधरी से इस संबंध में पूछे जाने पर एनजीओ का नाम कुमार अभिषेक बताया गया। क्या यह एनजीओ केवल कागजों पर काम करने के लिए अनुबंधित किया गया है? या फिर इसमें मिलीभगत का कोई बड़ा खेल छिपा है? ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब नगर प्रशासन को देना ही होगा।
एनजीओ की कार्यक्षमता पहले दिन ही लचर:- पूर्व उपाध्यक्ष
इधर, पूर्व उपाध्यक्ष गुप्तेश्वर शाह ने कहा की स्वच्छता केवल एक दिखावे का काम नहीं है, यह नागरिकों का मौलिक अधिकार है। यदि एनजीओ की कार्यक्षमता पहले दिन ही इतनी लचर है, तो भविष्य में उनसे क्या उम्मीद की जा सकती है? यह आवश्यक है कि नगर प्रशासन तुरंत प्रभाव से इस एनजीओ के कार्य की समीक्षा करे। यदि एजेंसी के पास न संसाधन हैं और न ही पर्याप्त मैनपावर, तो उनके साथ हुए अनुबंध पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। क्या एजेंसी ने पूर्व में अन्य नगर निकायों में स्वच्छता कार्यों को किया है?

