Bihar MLC Election: माना जा रहा है कि सोमवार को तेजस्वी यादव पटना लौटेंगे। यही कारण है कि एमएलसी उम्मीदवार की आधिकारिक घोषणा पार्टी की तरफ से नहीं की जा सकी है।
- हाइलाइट: Bihar MLC Election
- पार्टी सूत्रों का कहना है कि सुनील सिंह, जिन्हें राबड़ी देवी का मुंहबोला भाई माना जाता है, इस दौड़ में सबसे प्रबल दावेदार हैं।
पटना। बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर राज्य की सियासत में सरगर्मी अपने चरम पर है। जहां एक ओर एनडीए ने अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है, वहीं दूसरी ओर इंडिया गठबंधन की ओर से प्रत्याशियों के नामों को लेकर सस्पेंस बरकरार है। नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दिन सोमवार को सभी निगाहें राजद के आधिकारिक फैसले पर टिकी हैं। राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं के अनुसार, राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की सहमति से सुनील कुमार सिंह का नाम एमएलसी उम्मीदवार के रूप में सबसे आगे चल रहा है। उन्हें पार्टी की ओर से अपने आवश्यक दस्तावेज तैयार रखने का निर्देश दिया गया है।
राजद की रणनीति और वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता पर गौर करें तो पता चलता है कि लालू प्रसाद यादव अपनी विदेश यात्रा से लौटने के बाद दिल्ली में मौजूद हैं। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी इंडिया गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक में सम्मिलित होने के लिए दिल्ली में रुके हुए हैं। माना जा रहा है कि सोमवार को तेजस्वी यादव पटना लौटेंगे। यही कारण है कि एमएलसी उम्मीदवार की आधिकारिक घोषणा पार्टी की तरफ से नहीं की जा सकी है। तेजस्वी के आते ही पार्टी अपने उम्मीदवार के नाम पर आधिकारिक मुहर लगा देगी।
Bihar MLC Election : प्रत्येक सीट के लिए 25 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता
विधान परिषद चुनाव के गणित को समझें तो प्रत्येक सीट के लिए 25 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है। वर्तमान संख्या बल के आधार पर यह स्पष्ट है कि राजद के पास एक सीट सुरक्षित रूप से जीतने का बहुमत है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि सुनील सिंह, जिन्हें राबड़ी देवी का मुंहबोला भाई माना जाता है, इस दौड़ में सबसे प्रबल दावेदार हैं। उनके अनुभव और पार्टी के प्रति निष्ठा को देखते हुए नेतृत्व ने उन्हें प्राथमिकता दी है।
चुनाव आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, नामांकन पत्रों की जांच 9 जून को संपन्न होगी, जबकि नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 11 जून निर्धारित की गई है। बिहार विधान परिषद की नौ रिक्त सीटों के लिए मतदान 18 जून को होगा। जिन सदस्यों का कार्यकाल इस महीने समाप्त हो रहा है, उनमें गुलाम गौस, कुमुद वर्मा, मोहम्मद फारूक, भीष्म साहनी, संजय प्रकाश, समीर कुमार सिंह, सुनील कुमार सिंह और श्रीभगवान सिंह कुशवाहा जैसे दिग्गज नेता शामिल हैं। श्रीभगवान सिंह कुशवाहा विधानसभा चुनाव में निर्वाचित होने के बाद विधान परिषद की सदस्यता छोड़ चुके हैं।
दूसरी ओर एनडीए की स्थिति अत्यंत मजबूत दिखाई दे रही है। 243 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए के पास लगभग 202 विधायकों का समर्थन है। इस समीकरण के अनुसार एनडीए के लिए आठ सीटों पर जीत सुनिश्चित मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संख्या बल के लिहाज से एनडीए का पलड़ा भारी है, लेकिन राजद एक सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए पूरी तरह आश्वस्त है।

