Flood Crisis: बाढ़ के संभावित खतरों और बढ़ते पानी के दबाव को देखते हुए सारनपुर, सुरेमपुर और लच्छू टोला जैसे प्रभावित गांवों के कई परिवारों ने सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन करना शुरू कर दिया है।
- हाइलाइट: Flood Crisis
- बढ़ते जलस्तर से भोजपुर के दियारा क्षेत्र में गहराया बाढ़ का संकट:
सारनपुर, सुरेमपुर और लच्छू टोला के पशुपालक लिए अस्थायी आश्रय
आरा। बिहार के भोजपुर जिले में सोन और गंगा नदियों के बढ़ते जलस्तर ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित करना शुरू कर दिया है। विशेष रूप से शाहपुर प्रखंड के दियारा इलाकों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। नदियों के जलस्तर में निरंतर हो रही वृद्धि के कारण निचले इलाकों के निवासियों के लिए न केवल अपने घरों की सुरक्षा, बल्कि अपने पालतू मवेशियों को बचाना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।
बाढ़ के संभावित खतरों और बढ़ते पानी के दबाव को देखते हुए सारनपुर, सुरेमपुर और लच्छू टोला जैसे प्रभावित गांवों के कई परिवारों ने सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन करना शुरू कर दिया है। अपने मवेशियों के साथ ये ग्रामीण बिहिया प्रखंड के दोघरा पंचायत अंतर्गत तेघरा गांव के ऊंचे स्थानों (बाल) पर पहुंच गए हैं। वर्तमान में यहां सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण अपने पशुधन के साथ अस्थायी आश्रय बनाकर रह रहे हैं।
Flood Crisis : पशुओं के लिए पर्याप्त चारा को लेकर पशुपालक चिंतित
पशुपालकों की मानें तो बाढ़ की स्थिति में सबसे बड़ी समस्या मवेशियों के चारे और उनके लिए सुरक्षित स्थान की व्यवस्था करना होती है। जलमग्न होते निचले इलाकों में अब न तो पशुओं के लिए पर्याप्त चारा बचा है और न ही उन्हें सुरक्षित रखने के लिए कोई स्थान। ऐसी विकट परिस्थितियों में ऊंचे स्थानों पर शरण लेना ही एकमात्र विकल्प शेष बचा है। मवेशी न केवल इन ग्रामीणों की जीविका का मुख्य साधन हैं, बल्कि उनके परिवार का अहम हिस्सा भी हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा को लेकर लोग बेहद चिंतित हैं।
इधर, स्थानीय प्रशासन भी पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है। बिहिया के अंचलाधिकारी (सीओ) निलेश कुमार ने जानकारी दी कि क्षेत्र में तैनात कर्मचारियों को सतर्क रहने और स्थिति पर लगातार निगरानी रखने के आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने आश्वस्त किया है कि जो लोग विस्थापित हुए हैं या जो पशुपालक सुरक्षित स्थानों की ओर आए हैं, उन्हें प्रशासनिक स्तर पर हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।

