Makhdoom Baba Bihiya: तीन दिवसीय उर्स को लेकर दरगाह को आकर्षक ढंग से सजाया गया, 28 अक्टूबर को होगी चादरपोशी और 29 की रात तकरीर के बाद फातेहा
- हाइलाइट: Makhdoom Baba Bihiya
यहां चुल्लाई यादव की दरगाह के साथ हसन-हुसैन का प्रतीक चिह्न भी स्थापित है। - 27 से 29 अक्टूबर तक मनाया जाएगा हजरत मखदूम बाबा का सालाना उर्स।
- बिहार, उत्तर प्रदेश और बंगाल समेत कई राज्यों से 50 हजार से अधिक अकीदतमंदों के पहुंचने की संभावना।
- 27 अक्टूबर को कुरानखानी व गुस्ल, 28 को चादरपोशी और 29 अक्टूबर को तकरीर के बाद फातेहा।
आरा। भोजपुर जिले के बिहिया में हजरत सैयद शाह सरफुद्दीन एहिया मनेरी रहमतुल्लाह अलैह, जिन्हें अकीदतमंद मखदूम बाबा के नाम से जानते हैं, का 777वां सालाना उर्स 27 से 29 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। तीन दिवसीय उर्स को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। दरगाह परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है।
आयोजकों के अनुसार, उर्स में बिहार, उत्तर प्रदेश और बंगाल समेत कई राज्यों से 50 हजार से अधिक अकीदतमंदों के पहुंचने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं की सुविधा और आयोजन को सफल बनाने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
उर्स के पहले दिन 27 अक्टूबर को सुबह 10 बजे कुरानखानी और बाबा का गुस्ल होगा। इसके बाद 28 अक्टूबर को चादरपोशी की जाएगी। वहीं, 29 अक्टूबर की रात आठ बजे तकरीर का आयोजन होगा। तकरीर के बाद फातेहा होगी। इसके अगले दिन सुबह चार बजे दम मदार का आयोजन किया जाएगा।
Makhdoom Baba Bihiya: बिहारशरीफ में है मखदूम बाबा का मजार
मखदूम बाबा का मजार नालंदा जिले के बिहारशरीफ में स्थित है। मान्यता है कि उन्होंने बिहिया स्थित इस ऐतिहासिक दरगाह पर इबादत की थी। उस समय यह इलाका जंगल से घिरा हुआ था। दरगाह परिसर में चुल्लाई यादव की दरगाह के साथ हसन-हुसैन का प्रतीक चिह्न भी स्थापित है।
मन्नत पूरी होने की आस्था से पहुंचते हैं अकीदतमंद
मखदूम बाबा के प्रति लोगों में गहरी आस्था है। अकीदतमंदों की मान्यता है कि दरगाह पर मन्नत मांगने वाला कोई व्यक्ति खाली हाथ नहीं लौटता। मन्नत पूरी होने के बाद लोग अपनी श्रद्धा और इच्छा के अनुसार प्रसाद चढ़ाते हैं तथा चादरपोशी करते हैं।







