HomeNewsबिहारआरा नगर निगम: भाई-भतीजावाद और टेंडर प्रक्रिया में धांधली के आरोप

आरा नगर निगम: भाई-भतीजावाद और टेंडर प्रक्रिया में धांधली के आरोप

Budget Ara: आरा नगर निगम: बजट बैठक में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गंभीर आरोप, पार्षदों ने प्रभावशाली लोगों की तिजोरियां भरने वाला बजट बताया

  • हाइलाइट: Budget Ara
  • महापौर के परिजनों, विशेष रूप से उनके देवरों— रंजन जी और अभिजीत जी— के नाम पर टेंडर के आरोप

आरा। नगर निगम की बजट बैठक हंगामेदार रही, जिसमें पार्षदों ने निगम प्रशासन और नगर महापौर की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्षदों का आरोप है कि वर्तमान बजट न केवल विकास विरोधी है, बल्कि यह भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद को बढ़ावा देने वाला एक ‘लूट का बजट’ है। बैठक से बाहर आते ही पार्षदों द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दों ने नगर निगम के भीतर चल रही वित्तीय अनियमितताओं को उजागर किया है।

नियमों की अनदेखी और संशोधन से इनकार
पार्षदों ने जानकारी दी कि उन्होंने बिहार नगरपालिका अधिनियम की धारा 82-6 के तहत बजट में संशोधन के लिए महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे थे। सदन में नगर महापौर ने स्वयं स्वीकार किया कि बजट में संशोधन की आवश्यकता है और इसके लिए पर्याप्त समय भी उपलब्ध था। हालांकि, जब पार्षदों ने इस पर विस्तृत चर्चा के लिए एक नई तिथि निर्धारित करने का आग्रह किया, तो महापौर ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।

राजस्व प्राप्ति में भारी विसंगतियां
बजट में राजस्व के जो आंकड़े पेश किए गए हैं, वे वास्तविकता से कोसों दूर प्रतीत होते हैं। पार्षदों के अनुसार, विज्ञापन कर (ऐडवरटाइजमेंट टैक्स) से होने वाली आय का अनुमान लगभग 15 करोड़ रुपये था, लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड में इसे शून्य दिखाया गया है। इसी तरह, मोबाइल टावरों से वसूले जाने वाले ‘टावर टैक्स’ को भी शून्य दर्शाया गया है, जो पूरी तरह से निराधार और संदेहास्पद है। सैरात और बाजार से होने वाली आय के संबंध में भी निगम प्रशासन कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया, जिससे भारी वित्तीय गबन की आशंका बलवती होती है।

करोड़ों का सामग्री घोटाला: डस्टबिन और ब्लीचिंग पाउडर
पार्षदों ने पिछले वित्तीय वर्ष में हुई खरीदारी पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि नगर निगम द्वारा लगभग 10 करोड़ रुपये के डस्टबिन खरीदे गए थे, लेकिन ये डस्टबिन किसी भी वार्ड में या किसी भी पार्षद के क्षेत्र में वितरित नहीं किए गए। आखिर जनता की गाढ़ी कमाई से खरीदे गए ये डस्टबिन कहां गायब हो गए, इसका कोई जवाब नहीं है। इसके अतिरिक्त, चूना और ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव के नाम पर करीब दो से ढाई करोड़ रुपये की निकासी की गई है, जबकि धरातल पर इसका कोई प्रभाव नहीं देखा गया।

स्लम बस्तियों की उपेक्षा
नियमों के अनुसार, नगर निगम के कुल बजट का लगभग 25 से 30 प्रतिशत हिस्सा स्लम बस्तियों (मलिन बस्तियों) के उत्थान और वहां मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने के लिए खर्च किया जाना अनिवार्य है। पार्षदों का कहना है कि इन बस्तियों में रहने वाले गरीब परिवारों को न तो पेयजल की सुविधा मिल रही है और न ही शौचालय एवं जल निकासी की व्यवस्था की गई है। जब सदन में स्लम एरिया की सूची और वहां किए गए कार्यों का विवरण मांगा गया, तो मौन साध लिया गया ।

भाई-भतीजावाद और टेंडर प्रक्रिया में धांधली
भ्रष्टाचार के आरोपों में सबसे गंभीर मुद्दा टेंडर आवंटन का है। पार्षदों ने आरोप लगाया कि महापौर के परिजनों, विशेष रूप से उनके देवरों— रंजन जी और अभिजीत जी— के नाम पर टेंडर डाले जा रहे हैं और उन्हें कार्य आवंटित भी किए जा रहे हैं। एक ही परिवार के सदस्यों द्वारा टेंडर से लेकर छोटी से छोटी सामग्री की आपूर्ति का जिम्मा संभालना सीधे तौर पर हितों के टकराव और पद के दुरुपयोग का मामला है।

प्रभावशाली लोगों की तिजोरियां भरने वाला बजट : आरा नगर निगम की इस बजट बैठक के विरोध ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नगर के विकास के नाम पर वित्तीय बंदरबांट का खेल चल रहा है। पार्षदों ने मांग की है कि इन सभी वित्तीय विसंगतियों और भ्रष्टाचार के आरोपों की उच्च स्तरीय जांच की जाए ताकि जनता के पैसे का सही उपयोग हो सके और शहर का वास्तविक विकास सुनिश्चित हो सके। बिना पारदर्शिता और जवाबदेही के, यह बजट केवल कुछ प्रभावशाली लोगों की तिजोरियां भरने का जरिया बनकर रह जाएगा।

Khabre Apki
Khabre Apki
Khabre Apki covers all Breaking News in Hindi
- Advertisment -
Bharat Ji Shahpur
School AD

Most Popular