PM Surya Scheme: भोजपुर जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया ने इस बात पर जोर दिया कि यहां सवा लाख बीपीएल परिवारों के लिए एक सुनहरा अवसर है कि वे बिजली बिल की चिंता से आजीवन मुक्त हो सकें।
- हाइलाइट: PM Surya Scheme
- भोजपुर में ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण की नई क्रांति
- जिले में अब तक केवल 350 लोगों ने ही योजना का लाभ लिया है
- डीएम तनय सुल्तानिया ने स्वर्णिम अवसर का लाभ उठाने की अपील की
आरा। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत उपभोक्ताओं को प्राप्त होने वाले ऊर्जा, आर्थिक एवं पर्यावरणीय लाभों के विस्तृत विश्लेषण के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया ने योजना की बारीकियों और इसके दूरगामी प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए जिले के निवासियों से इस स्वर्णिम अवसर का लाभ उठाने की अपील की।
जिलाधिकारी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य सरकार की इन योजनाओं के मूल में दो मुख्य उद्देश्य हैं। पहला उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम बढ़ाना है और दूसरा उपभोक्ताओं के बिजली बिल के बोझ को न्यूनतम या शून्य करना है। भोजपुर जिले में इस योजना के सफल क्रियान्वयन के उदाहरण पहले से ही मौजूद हैं। जिले के कई ऐसे सजग उपभोक्ताओं ने सोलर पैनल का अधिष्ठापन कराया है, जिनका बिजली बिल अब शून्य हो चुका है। उल्लेखनीय है कि ये वे उपभोक्ता नहीं हैं जिनकी खपत राज्य सरकार द्वारा निर्धारित 125 यूनिट की सीमा के भीतर थी, बल्कि वे बड़े उपभोक्ता हैं जिनकी खपत इस सीमा से काफी अधिक थी। सौर ऊर्जा के उपयोग से न केवल उनका बिल शून्य हुआ है, बल्कि नेट मीटरिंग के माध्यम से कुछ उपभोक्ताओं का बिल ऋणात्मक (नेगेटिव) भी हो गया है, क्योंकि उन्होंने अपनी अतिरिक्त बिजली ग्रिड को प्रदान की है।
PM Surya Scheme: बिजली बिलिंग प्रणाली में सुधार और स्मार्ट मीटर
जिलाधिकारी ने बताया कि पहले मैनुअल मीटर रीडिंग के दौरान उपभोक्ताओं को अक्सर गलत रीडिंग और अप्रत्याशित बिलों की शिकायत रहती थी। घर बंद होने की स्थिति में औसत बिलिंग से असंतोष पैदा होता था। हालांकि, स्मार्ट मीटर और सोलर पैनल के समन्वय ने इस परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। अब उपभोक्ताओं का सिस्टम पर भरोसा बढ़ा है। स्मार्ट मीटर के माध्यम से लोग अपनी वास्तविक खपत को ट्रैक कर पा रहे हैं, जिससे उनमें बिजली की बचत और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बेहतर प्रबंधन के प्रति जागरूकता आई है।
पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की प्रक्रिया को अत्यंत सरल और पारदर्शी बनाया गया है। राज्य भर में हजारों वेंडर सूचीबद्ध हैं। उपभोक्ताओं को केवल आधिकारिक पोर्टल पर जाकर आवेदन करना है और अपनी पसंद के वेंडर का चयन करना है। इसके बाद वेंडर घर आकर तकनीकी व्यवहार्यता की जांच करते हैं। सरकार इस योजना के तहत भारी सब्सिडी प्रदान कर रही है। वर्तमान प्रावधानों के अनुसार, 1 किलोवाट के अधिष्ठापन पर 30,000 रुपये, 2 किलोवाट पर 60,000 रुपये और 3 किलोवाट तक के पैनल पर अधिकतम 78,000 रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। यदि 3 किलोवाट के सिस्टम की अनुमानित लागत लगभग 2 लाख रुपये आती है, तो सब्सिडी के माध्यम से उपभोक्ता का खर्च लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो जाता है।
भोजपुर जिले के लिए एक विशेष उपलब्धि यह है कि यहां लगभग 1,25,000 बीपीएल उपभोक्ता हैं, जिनकी मासिक खपत सामान्यतः 250 वाट के आसपास रहती है। राज्य सरकार ने इन उपभोक्ताओं के लिए एक विशेष योजना तैयार की है, जिसके तहत उनके घरों की छतों पर निःशुल्क सोलर रूफटॉप पैनल लगाए जाएंगे। इसके लिए उपभोक्ताओं को किसी कार्यालय के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है। उन्हें केवल ‘सुविधा ऐप’ पर जाकर अपनी सहमति (कंसेंट) देनी है। जिलाधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि यह सवा लाख परिवारों के लिए एक सुनहरा अवसर है कि वे बिजली बिल की चिंता से आजीवन मुक्त हो सकें और साथ ही ऊर्जा उत्पादन में सहभागी बनकर राज्य के विकास में योगदान दें।
जिले के जनसांख्यिकीय आंकड़ों को साझा करते हुए जिलाधिकारी ने चिंता व्यक्त की कि लगभग 35 लाख की जनसंख्या और साढ़े छह से सात लाख घरों वाले इस विशाल जिले में अब तक केवल 350 लोगों ने ही पीएम सूर्य घर योजना का लाभ लिया है। हालांकि यह संख्या जिले को राज्य में 10वें स्थान पर रखती है, लेकिन जिले की क्षमता को देखते हुए यह आंकड़ा संतोषजनक नहीं है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों, मीडिया प्रतिनिधियों और बैंक अधिकारियों से इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने का आह्वान किया। विशेष रूप से महादलित टोलों और ग्रामीण क्षेत्रों में जहां बिजली की आवश्यकता अधिक है, वहां इस संदेश को पहुँचाना अनिवार्य है।
पर्यावरण संरक्षण के वैश्विक परिप्रेक्ष्य में यह योजना मील का पत्थर साबित हो सकती है। जिलाधिकारी ने युवा पीढ़ी और इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों के नवाचारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज के प्रोजेक्ट्स में सौर ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि “बूंद-बूंद से ही सागर भरता है।” यदि प्रत्येक परिवार अपने घर में सोलर पैनल लगाता है और अपने आसपास के लोगों को प्रेरित करता है, तो भोजपुर जिला न केवल ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने में अग्रणी भूमिका निभाएगा।


