Sanjay Singh Tiger: आरा,भोजपुर। बिहार दिवस के अवसर पर आरा के ऐतिहासिक रमना मैदान स्टेडियम में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए बिहार सरकार के श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग तथा युवा, रोजगार एवं कौशल विभाग के मंत्री संजय सिंह टाइगर ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार की विरासत न केवल प्राचीन है, बल्कि अत्यंत सुदृढ़ और प्रेरणादायी भी रही है।
मंत्री संजय सिंह टाइगर ने कहा कि वर्ष 1912 में बंगाल प्रेसिडेंसी से अलग होकर बिहार एक स्वतंत्र राज्य के रूप में अस्तित्व में आया था। तब से लेकर आज तक, यह प्रदेश निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिहार की यह पावन धरती ज्ञान, विज्ञान और अध्यात्म का अद्भुत संगम है। यह वह भूमि है जिसने हमेशा वैश्विक स्तर पर नेतृत्व प्रदान किया है और विचारों की धुरी बनी रही है।
लोकतंत्र की जननी के रूप में बिहार की भूमिका को रेखांकित करते हुए मंत्री जी ने कहा कि विश्व को जनतंत्र का पहला पाठ इसी प्रदेश ने पढ़ाया है। वैशाली के प्रांगण में ही सबसे पहले लोकतंत्र का जन्म हुआ और यहीं से शासन की लोकतान्त्रिक व्यवस्था का बीजारोपण हुआ, जो आज पूरे विश्व का आधार है।
Sanjay Singh Tiger: गया की धरती ने सिद्धार्थ को गौतम बुद्ध बनाया
अध्यात्म के क्षेत्र में बिहार के योगदान की चर्चा करते हुए उन्होंने गौतम बुद्ध का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इसी बिहार की गया की धरती ने सिद्धार्थ को तपस्या और ज्ञान के माध्यम से गौतम बुद्ध बनाया। बुद्ध ने यहीं से संपूर्ण मानवता को शांति, करुणा और सद्भाव का संदेश दिया, जिसकी गूँज आज भी दुनिया के कोने- कोने में सुनाई देती है। इसी प्रकार, सत्य और अहिंसा के महान सूत्रधार भगवान महावीर की शिक्षाओं ने भी इसी भूमि से समाज को एक नई दिशा प्रदान की।
बिहार के विद्वानों ने अपनी मेधा से वैश्विक ज्ञान के भंडार को समृद्ध किया
बौद्धिक और वैज्ञानिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए संजय सिंह टाइगर ने महान गणितज्ञ आर्यभट्ट का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि आर्यभट्ट ने शून्य और दशमलव के क्रांतिकारी सिद्धांतों से पूरी दुनिया को गणित और खगोल विज्ञान के नए मंत्रों से परिचित कराया। बिहार के विद्वानों ने अपनी मेधा से वैश्विक ज्ञान के भंडार को समृद्ध किया है।


