Ara MP: विभाजन के बाद बिहार के अधिकांश प्राकृतिक संसाधन, खनिज संपदा और भारी उद्योग पड़ोसी राज्य झारखंड के हिस्से में चले गए।
- हाइलाइट: Ara MP
- बिहार के पास मुख्यतः जल, बालू, उपजाऊ भूमि और यहां के कर्मठ किसान व मजदूर ही शेष हैं
- सांसद बोले राज्य का नवनिर्माण केंद्र सरकार द्वारा विशेष राज्य के दर्जे की मांग पूरी होने पर ही संभव
आरा। भोजपुर जिले के ऐतिहासिक रमना मैदान स्टेडियम में आयोजित बिहार दिवस समारोह के अवसर पर आरा के सांसद सुदामा प्रसाद ने अपने संबोधन में बिहार के गौरवशाली इतिहास को रेखांकित करते हुए इस बात पर विशेष बल दिया कि राज्य का नवनिर्माण केंद्र सरकार द्वारा विशेष राज्य के दर्जे की मांग पूरी होने पर ही संभव है।
सांसद ने कहा कि बिहार राज्य का इतिहास संघर्ष और जीवंतता की एक अनूठी गाथा रहा है। 22 मार्च 1912 को बंगाल और उड़ीसा से अलग होकर एक स्वतंत्र प्रांत के रूप में स्थापित होने के बाद से बिहार ने विकास के कई सोपान तय किए। हालांकि, 15 नवंबर 2000 को हुए विभाजन ने राज्य की आर्थिक संरचना को व्यापक रूप से प्रभावित किया। अधिकांश खनिज संपदा और भारी उद्योग पड़ोसी राज्य झारखंड के हिस्से में चले गए। वर्तमान में बिहार के पास प्राथमिक संसाधन के रूप में मुख्यतः जल, बालू, उपजाऊ भूमि और यहां के कठोर परिश्रमी किसान व श्रमिक ही शेष हैं।
Ara MP: खेती अब धीरे-धीरे घाटे का सौदा बनती जा रही है
बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि है, लेकिन वर्तमान में यह क्षेत्र गहरे संकट से जूझ रहा है। सांसद सुदामा प्रसाद ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि खेती अब धीरे-धीरे घाटे का सौदा बनती जा रही है। उन्होंने विशेष रूप से ‘बटाईदार किसानों’ की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। बिहार में लगभग 70 प्रतिशत से अधिक खेती बटाईदारी व्यवस्था के अंतर्गत होती है, लेकिन ‘किसान सम्मान निधि’ जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ केवल उन्हीं को मिलता है जिनके नाम पर जमीन है। वास्तविक खेती करने वाले बटाईदार किसान इन लाभों से पूरी तरह वंचित हैं।
सिंचाई परियोजनाओं का आधुनिकीकरण :
राज्य की नहरें वर्तमान में जर्जर अवस्था में हैं। सांसद ने 1990 से लंबित ‘इंद्रपुरी जलाशय योजना’ के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इसके मार्ग की बाधाएं अब समाप्त हो चुकी हैं। यदि सोन नदी पर इस डैम का निर्माण पूर्ण हो जाता है, तो मध्य बिहार के आठ जिलों की लगभग 84 लाख एकड़ भूमि की सिंचाई सुनिश्चित हो सकेगी। यह परियोजना न केवल अकाल की समस्या को जड़ से समाप्त करेगी, बल्कि सोन नदी में आने वाली विनाशकारी बाढ़ से भी सुरक्षा प्रदान करेगी, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती मिलेगी।
युवा शक्ति के विकास:
उन्होंने स्थानीय युवाओं की प्रतिभा को निखारने के लिए अत्याधुनिक खेल स्टेडियम के निर्माण और भोजपुर में कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग को पुरजोर तरीके से रखा। उनका तर्क है कि जब तक युवाओं को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और खेल के अवसर नहीं मिलेंगे, तब तक मेधा पलायन की समस्या को रोकना असंभव होगा। उन्होंने जिला प्रशासन से इन प्रस्तावों को प्राथमिकता के आधार पर राज्य और केंद्र सरकार को भेजने का आग्रह किया है।
सांसद विकास निधि की 5 करोड़ रुपये की वार्षिक राशि
विकास निधि और प्रशासनिक समन्वय पर चर्चा करते हुए सांसद ने यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने कहा कि सांसद विकास निधि (MPLAD) की 5 करोड़ रुपये की वार्षिक राशि जनआकांक्षाओं को पूरा करने के लिए अत्यंत सीमित है, जबकि बुनियादी विकास की मांगें कहीं अधिक विशाल हैं। इसके लिए उन्होंने केंद्र और बिहार सरकार के विशाल बजट के कुशल सदुपयोग पर जोर दिया। उन्होंने जिला प्रशासन और माननीय मंत्रियों से अपील की है कि उनके द्वारा प्रेषित विकास योजनाओं की सूची पर त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई की जाए ताकि विकास की धारा आम जनता के दरवाजे तक सुगमता से पहुंच सके।


