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बजट 2026: आम नागरिक पर सीधा असर – क्या हुआ सस्ता, क्या महंगा?

Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से रविवार को बजट 2026 पेश किया गया है। इसमें कई ऐसी घोषणाएं सामने आई हैं, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।

  • हाइलाइट: Budget 2026
    • कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम

Budget 2026: भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के उद्देश्य से, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा रविवार को संसद में बजट 2026 प्रस्तुत किया गया। यह बजट देश के हर वर्ग को प्रभावित करेगा, लेकिन इसका सीधा असर आम आदमी की दैनिक वित्तीय योजनाओं और खर्चों पर स्पष्ट रूप से परिलक्षित होगा। कई प्रमुख घोषणाओं के माध्यम से कुछ वस्तुओं और सेवाओं की लागत में कमी आई है, जिससे नागरिकों को राहत मिलेगी, वहीं कुछ क्षेत्रों में टैक्स वृद्धि के कारण लागत में इजाफा भी हुआ है। इस बजट का गहन विश्लेषण यह समझने में सहायक होगा कि आगामी वित्तीय वर्ष में आपकी जेब पर इसका क्या प्रभाव पड़ने वाला है।

आम आदमी को मिली राहत: क्या हुआ सस्ता?
बजट 2026 में ऐसे कई प्रावधान किए गए हैं जिनका उद्देश्य आम नागरिक के जीवन को आसान और किफायती बनाना है। स्वास्थ्य क्षेत्र में विशेष राहत प्रदान की गई है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, कुल 17 कैंसर दवाओं पर लगने वाले बेसिक कस्टम ड्यूटी को पूरी तरह से हटा दिया गया है। यह घोषणा इन दवाओं को अधिक सुलभ और किफायती बनाएगी, जिससे हजारों परिवारों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी। इसी क्रम में, 7 दुर्लभ बीमारियों के उपचार में उपयोग होने वाली दवाओं और विशिष्ट पोषण आहार (special food) को भी आयात शुल्क से छूट प्रदान की गई है। यह कदम उन परिवारों के लिए वरदान साबित होगा जो इन असाध्य बीमारियों के महंगे इलाज का बोझ उठा रहे थे।

व्यक्तिगत आयात के मोर्चे पर भी राहत प्रदान की गई है। व्यक्तिगत आयात पर लगने वाले टैरिफ को 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे विदेशों से व्यक्तिगत उपयोग के लिए वस्तुओं का आयात करना अब अधिक किफायती हो जाएगा। विदेश यात्रा का सपना देखने वालों के लिए भी खुशखबरी है। विदेश यात्रा टूर पैकेज पर लगने वाले स्रोत पर कर संग्रह (TCS) को 5 प्रतिशत/20 प्रतिशत से घटाकर मात्र 2 प्रतिशत कर दिया गया है। यह कटौती विदेशी यात्राओं को अधिक वहनीय बनाएगी।

इसके अतिरिक्त, कई दैनिक उपयोग की वस्तुओं और सेवाओं पर भी लागत में कमी आने की संभावना है। माइक्रोवेव ओवन, जूते, और विदेश में शिक्षा प्राप्त करना अब पहले से सस्ता होगा। नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए, सोलर एनर्जी से संबंधित उपकरणों और बैटरियों पर भी लागत कम होगी, जिससे हरित ऊर्जा को अपनाने में प्रोत्साहन मिलेगा। बायोफ्यूल मिश्रित सीएनजी, हवाई जहाज के कलपुर्जे, चमड़े का निर्यात और बीड़ी जैसी वस्तुएं भी सस्ती हो जाएंगी। ये घोषणाएं विभिन्न क्षेत्रों में नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाएंगी और उनके खर्चों को कम करने में मदद करेंगी।

बढ़ती लागत: किन चीजों पर पड़ेगा अतिरिक्त बोझ?
राहत के साथ-साथ, बजट 2026 में कुछ ऐसे भी प्रावधान किए गए हैं जो कुछ वस्तुओं और सेवाओं की लागत में वृद्धि करेंगे। इन परिवर्तनों का मुख्य उद्देश्य राजस्व संग्रह में वृद्धि करना और कुछ विशिष्ट गतिविधियों को हतोत्साहित करना है।

सबसे पहले, कोयले और खनिज जैसे वस्तुओं पर आयात शुल्क में इजाफा किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप कबाड़ और खनिज आधारित उत्पादों की लागत में वृद्धि होगी। यह उद्योगों और उपभोक्ताओं दोनों को प्रभावित कर सकता है। शराब पर सरकार ने स्रोत पर कर संग्रह (TCS) की दर को एक प्रतिशत से बढ़ाकर 2 प्रतिशत कर दिया है। यह कदम शराब को महंगा बनाएगा और राजस्व में वृद्धि करेगा।

शेयर बाजार में सट्टेबाजी और डेरिवेटिव ट्रेडिंग को नियंत्रित करने और उस पर लगने वाले कर को बढ़ाने के लिए भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। सरकार ने फ्यूचर्स पर प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) को मौजूदा 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा है। इसी प्रकार, ऑप्शंस पर STT को बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। ये परिवर्तन डेरिवेटिव्स बाजार में व्यापार को हतोत्साहित कर सकते हैं और सट्टेबाजी पर लगाम लगाने का एक प्रयास माने जा सकते हैं। इसके अलावा, सरकार ने बायबैक में शेयर सरेंडर करने पर सभी प्रकार के शेयरधारकों को होने वाले लाभ को पूंजीगत लाभ (Capital Gain) के दायरे में लाने का प्रस्ताव रखा है। इसका अर्थ यह है कि अब बायबैक से होने वाली आय पर अधिक कर लगेगा, जिससे निवेशकों के लिए यह विकल्प कम आकर्षक हो सकता है।

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