Padma Shri Award: पद्मश्री पुरस्कार मिलने के बाद भरत सिंह भारती ने कहा, “यह सम्मान भोजपुरी भाषा और लोक संस्कृति का सम्मान है। जब लोग हमारे गीतों से प्रसन्न होते हैं, वही सबसे बड़ा पुरस्कार है।
- हाइलाइट: Padma Shri Award
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा प्रदान किया गया पद्मश्री अवार्ड
- राजधानी दिल्ली में सोमवार की शाम आयोजित कार्यक्रम में प्रदान किया गया अवार्ड
दिल्ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह में सोमवार को महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जाने-माने भोजपुरी लोक गायक भरत सिंह भारती को कला एवं गायन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘पद्मश्री’ अवार्ड से नवाजा। भरत सिंह भारती को ‘पद्मश्री’ अवार्ड मिलने पर भोजपुर जिले में खुशी का माहौल है। जिले के साहित्यकारो, लेखकों, पत्रकारों एवं प्रबुद्ध लोगों ने उन्हें बधाइयां दी है। पद्मश्री पुरस्कार मिलने के बाद भरत सिंह भारती ने कहा, “यह सम्मान भोजपुरी भाषा और लोक संस्कृति का सम्मान है। जब लोग हमारे गीतों से प्रसन्न होते हैं, वही सबसे बड़ा पुरस्कार है।
बता दें कि भारत सरकार द्वारा पिछले 25 जनवरी 2026 को बिहार के सुप्रसिद्ध और दिग्गज भोजपुरी लोकगायक भरत सिंह भारती को देश के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘पद्मश्री’ से सम्मानित करने की घोषणा की गई थी। यह सम्मान उन्हें लोक गायन और भोजपुरी संस्कृति के संरक्षण में उनके सात दशकों (लगभग 70 वर्षों) से अधिक के अद्वितीय योगदान के लिए दिया गया।
Padma Shri Award : मॉरिशस समेत कई देशों में भोजपुरी लोकसंस्कृति को पहचान दिलाई
बिहार के लोक संगीत की दुनिया में भरत सिंह भारती एक ऐसा नाम है, जिन्होंने न केवल पारंपरिक धुनों को सहेजा, बल्कि उन्हें वैश्विक मंच पर एक नई पहचान भी दिलाई। भरत सिंह भारती का जन्म 20 नवंबर 1936 को बिहार के भोजपुर (आरा) जिले के नोनऊर (अगिआंव) गाँव में हुआ था। उन्होंने मात्र 10 वर्ष की अल्प आयु में ही लोक गायन शुरू कर दिया था। 15 वर्ष की आयु में उन्होंने आरा के प्रसिद्ध मृदंग आचार्य शत्रुंजय प्रसाद सिंह से विधिवत संगीत की शिक्षा ली। उन्हें ‘पूरबी’ (भोजपुरी गायन की एक विशेष विधा) का मर्मज्ञ माना जाता है।
महेंदर मिसिर द्वारा रचित प्रसिद्ध पूरबी गीत ‘अंगूरी में डसले बिया…’ का व्याकरण और धुन भी उन्होंने ही तैयार किया था। 87 वर्षीय भरत सिंह भारती ने 7 दशकों से अधिक समय तक भोजपुरी लोकगीतों, पवरिया, लोरी, जतसार, डोमकच जैसी विलुप्तप्राय विधाओं के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वे 1962 से आकाशवाणी पटना से जुड़े रहें, उन्होंने मॉरिशस समेत कई देशों में भोजपुरी लोकसंस्कृति को पहचान दिलाई। लालटेन की रोशनी में साइकिल से गांव-गांव जाकर लोकगीत गाने वाले भरत सिंह भारती आज भोजपुरी के ‘गुरुजी’ के नाम से जाने जाते हैं।
सूबे के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दी बधाई
करीब सात दशकों से भोजपुरी लोक-संगीत की अमूल्य परंपरा को अपनी साधना और समर्पण से जीवंत बनाए रखने वाले आदरणीय भरत सिंह भारती को पद्मश्री सम्मान मिलने पर सूबे के सीएम सम्राट चौधरी ने बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि पूरबी गायन की व्याकरण-रचना से लेकर लोक-संगीत की शुद्धता और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने तक, उनका योगदान अतुलनीय और प्रेरणादायी है।लोकप्रियता से दूर रहकर भी उन्होंने लोक संस्कृति की जो अलख जगाई है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक धरोहर के रूप में सदैव प्रेरणा देती रहेगी।

