Devi Ojha Memorial: अंग्रेजों की फौज को घुटनों पर लाने वाले प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के सिपाही वीर देवी ओझा आज के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है।
- हाइलाइट्स: Devi Ojha Memorial
- देवी ओझा की प्रतिमा व नाम पर पुस्तकालय बनाने की हुई बातें
आरा/शाहपुर : अंग्रेजों की फौज को घुटनों पर लाने वाले प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के सिपाही वीर देवी ओझा आज के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है। जिन्होंने देश के आजादी के लिए अपने प्राणों को चिंता ना करते हुए अंग्रेजों के साथ लोहा ली। उन्होंने स्वतंत्रता के अमर सिपाही बाबू वीर कुंवर सिंह की सेना के तरफ से लड़ते हुए अंग्रेजों को कई बार नाको चने छबवा दिए। जिसके कारण उन्हें महारानी विक्टोरिया तक ने तोप से उड़ा देने का आदेश दिया था।
उक्त बातें संजय गांधी कॉलेज के सेवा निवृत्ति प्रधानाचार्य सह इतिहास के विभागाध्यक्ष डा.कपिल मुनि ओझा ने देवी ओझा मेमोरियल ट्रस्ट के द्वारा आयोजित स्वतंत्रता सेनानी वीर देवी ओझा स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए कहा। उन्होंने कहा कि वह युग पुरुष थे। जिन्होंने अपने छोटे से जीवन को बड़े आयाम में बदल दिया।
वही आरक्षी अधीक्षक सुरक्षा आईपीएस मनीष कुमार सिन्हा ने कहा कि देवी ओझा जी प्रेरणा हैं। इतिहास में उनकी ही पहचान होती हैं जिन्होंने ने दूसरों व अपने आने वाली पीढ़ियों की बेहतरी के लिए जीवन खपा दी हो। दुसरो के लिए जीने वाले ही इतिहास के धरोहर हैं। वीर देवी ओझा ने वीर कुंवर सिंह के साथ अपने जीवन को देश के लिए न्योछावर कर दिया। इसके पूर्व लोगों ने वीर देवी ओझा को श्रद्धांजलि अर्पित की। अतिथियों को आयोजन समिति देवी ओझा ट्रस्ट के दिलीप ओझा, उमेश चंद्र पांडे, ब्रजेश ओझा, अभिनव ओझा, श्याम सुंदर कुशवाहा व सौरभ पांडे द्वारा अंगवस्त्र से सम्मानित किया।
कार्यक्रम को संबोधित करने वालों में शिक्षाविद एम.के. मिश्रा, आईआईटीएन विनय कृष्णा मिश्रा ने देवी ओझा को आज के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बताया और धरोहर के स्वरूप आत्मासाध करने की बातें कही। वही नगर एवं आवास विभाग के इंजीनियर इन चीफ नरेंद्र तिवारी एवं शिक्षाविद श्याम नंदन ओझा ने कहा कि ऐसे महान युग पुरुष के स्मृति में उनकी विशालकाय प्रतिमा बनानी चाहिए। ताकि देवी ओझा आज के लोगों में भी जीवंत रहे। इसके साथ अधिवक्ता अश्विनी कुमार पांडे एवं सीआरपीएफ के पूर्व कमांडेंट सह समाज सेवी हीरालाल ओझा ने भी उन्हें याद करते हुए कहा कि अपने वंशजों को कोई भूला नहीं सकता। इसलिए हमारे पुराने वंश के लोग आज के लिए धरोहर है।
वही शाहपुर प्रखंड विकास पदाधिकारी शत्रुंजय कुमार सिंह ने संबोधित करते कहा कि देश के प्रथम संग्राम के नायक भले ही बाबू वीर कुंवर से थे। लेकिन देवी ओझा जैसे वीरों के कारण ही वो आगे बढ़ सके। कार्यक्रम का संचालन शिक्षविद मुक्तेश्वर मिश्र उर्फ सरजी ने की। कार्यक्रम में रघुराज ओझा, राकेश त्रिपाठी, रवि कुमार, विकास पांडेय, कृष्णा पांडे, राकेश यादव, अंकित पांडे, पिंटू भैया सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए।