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कला और विषय संगीत के अलग अलग आयाम

कथक नृत्यांगना आदित्या श्रीवास्तव ने कहा कि ध्वनि विज्ञान का महत्वपूर्ण अध्याय है और ध्वनि से नाद स्वर और श्रुति संगीत का विषय है।

आरा। नई शिक्षा नीति में संगीत को अतिरिक्त विषय से अनिवार्य विषय क़े रूप में शामिल किया गया हैं। संगीत जगत के गुरू स्थापित कलाकार व प्रशिक्षु सरकार के इस फैसले से काफी खुश हैं। संगीत के पाठ्यक्रम व अन्य पहलुओं पर आने वाले दिनों स्थिति और ज्यादा स्पष्ट होगी। स्कूल व कॉलेज में संगीत के अनिवार्य होने से संगीत जगत में खुशी की लहर दौड़ रही हैं।

कथक गुरू बक्शी विकास ने कहा कि सरकार का यह कदम भारतीय संस्कृति और शिक्षण पद्धति को सशक्त बनाएगा। कला और विषय संगीत के अलग अलग आयाम हैं। किन्तु संगीत कला शिक्षण संस्थान में एक विषय हैं, जहां कला के शास्त्र का पठन-पाठन आवश्यक होता है। समाज के ज्यादातर लोग संगीत को आज भी केवल मनोरंजन का साधन मानते हैं। जबकि ऐसा नहीं हैं। संगीत शुरू से एक गहन अध्ययन का विषय रहा है। नई शिक्षा नीति में संगीत कों अनिवार्य करना सरकार का महत्वपूर्ण निर्णय।

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शास्त्रीय गायिका बिमला देवी ने कहा कि शास्त्रकारों ने भारतीय संगीत कों ज्ञान के आकाश में नक्षत्र की भांति स्थापित किया हैं। अन्य विषयों की तुलना में संगीत की पढ़ाई महज कुछ वर्षों में पूरी नहीं की जा सकती हैं किन्तु विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में संगीत क़े क्षेत्र में दृष्टि अवश्य पाया जा सकता हैं। नई शिक्षा नीति की घोषणा हुई हैं तब से संगीत के भविष्य को लेकर संगीतज्ञों में संतोष जगा है।

कथक नृत्यांगना आदित्या श्रीवास्तव

कथक नृत्यांगना आदित्या श्रीवास्तव ने कहा कि ध्वनि विज्ञान का महत्वपूर्ण अध्याय है और ध्वनि से नाद स्वर और श्रुति संगीत का विषय है। यहां यह कहना अप्रासंगिक नहीं होगा कि विज्ञान और संगीत में सामंजस्य बिठाने में ज्यादा दिक्कत नहीं होगी। संगीत चिकित्सा भी मेडिकल में शुमार हैं। रागों से रोगों का इलाज किया जा रहा हैं। इस नई शिक्षा नीति में साइंस का विद्यार्थी भी संगीत की पढ़ाई कर सकेगा।

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तबला वादक आचार्य चंदन कुमार ठाकुर ने बताया कि इस शिक्षण पद्धति में महाविद्यालय में छात्र महज 4-5 साल के कम अवधि तक पढ़ते हैं, फलतः संगीत में पारंगत कलाकार बनाना मुश्किल हैं। छात्रों के अंदर संगीत क़े प्रति दृष्टि अवश्य पैदा की जा सकती है। मौजूदा शिक्षण पद्धति में संगीत के पाठ्यक्रम को भी बदला जाना बहुत आवश्यक हैं। साइंस का विद्यार्थी संगीत पढ़ें, तो उसका पाठ्यक्रम तथा संगीत के विद्यार्थी का पाठ्यक्रम तय करना होगा। नई शिक्षा नीति कितनी कारगर है, आने वाला वक्त बताएगा।

कथक नृत्यांगना सोनम कुमारी ने बताया कि अब विद्यालय में संगीत का एक अनिवार्य विषय होना सुखद हैं। प्राइमरी स्टेज से ही संगीत की पढ़ाई होगी तो बैचलर और मास्टर करते करते छात्रों को अच्छा ज्ञान हो जाएगा। इसलिए नई शिक्षा नीति में संगीत के अनिवार्य होने से संगीत विषय का आगे का मार्ग प्रशस्त होगा।

तबला वादक प्रो. लाल बाबू निराला ने कहा कि अन्य विषय वाले लोगों कि अवधारणा हैं कि ये नचैये, गवैये, बजइए हैं, इनको तो सरकार मुफ्त का पैसा देती हैं, ये अवधारणा भी खत्म हो जाएगी जब संगीत के व्यापक ज्ञान से लोग अवगत हो जाएंगे। भारतीय शास्त्रीय संगीत का प्रायोगिक व्यावहारिक और शास्त्र पक्ष बहुत समृद्ध हैं। पठन पाठन में इसे अनिवार्य करने के लिए सरकार बधाई की पात्र है।

कथक नर्तक अमित कुमार ने कहा कि नई शिक्षा नीति भारत को पुनः विश्वगुरु के रूप में स्थापित करने कि ओर अग्रसर करेगा। हर महाविद्यालय में आज संगीत नृत्य की पढ़ाई नहीं होती। छात्रों को संगीत क़े अध्ययन के लिए बाहर जाना पड़ता है। जिस कारण ज्यादातर गरीब बच्चे संगीत की पढ़ाई नहीं कर पाते। नई शिक्षा नीति में सभी कॉलेजों में संगीत की पढ़ाई अनिवार्य की गई है। अब गरीब बच्चे भी संगीत की पढ़ाई कर सकेंगे और पलायन भी रुकेगी।

KRISHNA KUMAR
KRISHNA KUMAR
बिहार के आरा निवासी डॉ. कृष्ण कुमार एक भारतीय पत्रकार है। डॉ. कृष्ण कुमार हिन्दी समाचार खबरें आपकी के संपादक एवं न्यूज पोर्टल वेबसाईट के प्रमुख लोगों में से एक है।
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