Banahi Road Diversion: भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के रुद्रनगर गांव के समीप छेर नदी पर निर्माणाधीन पुल के कारण बनाया गया डायवर्सन वर्तमान में क्षेत्र के हजारों निवासियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
- हाइलाइट: Banahi Road Diversion
- बारिश में कीचड़, बाढ़ में कटेगा संपर्क! छेर नदी का डायवर्सन बना मुसीबत
- पुल निर्माण के बीच बदहाल डायवर्सन, दर्जनों गांवों का संपर्क टूटने का खतरा
- तीन एनएच को जोड़ने वाला मार्ग संकट में, बारिश ने खोली डायवर्सन की पोल
- छेर नदी में पानी बढ़ते ही महीनों बंद हो सकता है शाहपुर-बनाही मार्ग
आरा। जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के रुद्रनगर गांव के समीप छेर नदी पर निर्माणाधीन पुल के कारण बनाया गया डायवर्सन वर्तमान में क्षेत्र के हजारों निवासियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। यह मार्ग न केवल आवागमन का मुख्य जरिया है, बल्कि तीन प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों को जोड़ने वाली यह सड़क क्षेत्र के लोगों के लिए लाइफ लाइन भी है। दुर्भाग्यवश, पुल निर्माण एजेंसी की लापरवाही और डायवर्सन की लचर व्यवस्था के कारण अब मानसून की पहली फुहारों के साथ ही इस पूरे क्षेत्र के कट जाने का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।
Banahi Road Diversion : थोड़ी सी बारिश होते ही यह डायवर्सन कीचड़ में तब्दील
स्थानीय निवासियों का कहना है कि संवेदक की ओर से तैयार किया गया यह वैकल्पिक मार्ग (डायवर्सन) तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं है। निर्माण कार्य के नाम पर केवल मिट्टी डालकर उसे समतल कर दिया गया है, जिसमें रोड़ा (गिट्टी) या अन्य टिकाऊ सामग्री का कहीं भी उपयोग नहीं किया गया है। इसका परिणाम यह है कि थोड़ी सी बारिश होते ही यह डायवर्सन कीचड़ में तब्दील हो जाता है। कीचड़ के कारण सड़कों पर फिसलन बढ़ जाती है, जिससे दुपहिया और चौपहिया वाहनों का गुजरना जोखिम भरा हो गया है। घंटों तक जाम की स्थिति बनी रहती है और लोग दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।
महीनों के लिए बंद हो सकता है यह मार्ग
ग्रामीणों की चिंता का मुख्य कारण डायवर्सन की ऊंचाई है। नदी के तल से मात्र तीन फीट की ऊंचाई पर बना यह डायवर्सन मार्ग मानसून के दौरान बेहद संवेदनशील हो गया है। आंकड़ों और पिछले वर्षों के जलस्तर को देखें तो जुलाई के उत्तरार्द्ध से सितंबर तक छेर नदी में पांच से दस फीट तक पानी का बहाव बना रहता है। ऐसी स्थिति में नदी का जलस्तर थोड़ा सा भी बढ़ने पर यह कच्चा डायवर्सन पूरी तरह जलमग्न हो जाएगा, जिससे यह मार्ग महीनों के लिए बंद हो सकता है। चूंकि पुल निर्माण के दौरान पुराना पुल और सड़क पहले ही तोड़े जा चुके हैं, इसलिए ग्रामीणों के पास आवागमन का कोई अन्य विकल्प भी शेष नहीं बचा है।
कई गांवों का सीधा संपर्क टूट जाएगा
यह समस्या महज कुछ गांवों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर व्यापक है। यह सड़क शाहपुर के एनएच-84, पटना-बक्सर फोरलेन एनएच-922 और आरा-मोहनिया एनएच-30 को आपस में जोड़ती है। इस मार्ग के अवरुद्ध होने से शाहपुर, बनाही, बिहिया और जगदीशपुर जैसे क्षेत्रों का सीधा संपर्क टूट जाएगा। रुद्रनगर निवासी कृष्णाकांत सिंह का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, तो दर्जनों गांवों का मुख्य बाजारों और रेल संपर्क से जुड़ाव पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
बनाही गांव के निवासी मुन्ना तिवारी ने इस समस्या के मानवीय पहलुओं पर जोर देते हुए कहा कि सड़क बंद होने का सबसे बुरा असर छात्रों और मरीजों पर पड़ेगा। प्रतिदिन अपनी पढ़ाई के लिए शिक्षण संस्थानों तक जाने वाले छात्र-छात्राएं और स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों में शाहपुर के अस्पतालों तक पहुंचने वाले मरीजों के लिए यह स्थिति जानलेवा हो सकती है। एक तरफ जहां समय पर इलाज न मिल पाने का खतरा बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ छात्रों का भविष्य भी बाधित हो रहा है। निर्माण एजेंसी के विरुद्ध ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है।

