Digital Arrest – Arrah: आरा के सदर अस्पताल के एक डाक्टर को डिजिटल अरेस्ट कर 19 लाख रुपए का साइबर फ्रॉड कर लिये जाने का मामला सामने आया गया है।
- हाइलाइट: Digital Arrest – Arrah
- डिजिटल अरेस्ट के जरिए आरा के डाक्टर से 19 लाख की ठगी, दो साइबर अपराधी गिरफ्तार
- तकनीकी और वैज्ञानिक जांच के आधार पर नई दिल्ली से पकड़े गए दो साइबर अपराधी
- एटीएस अधिकारी के नाम पर साइबर अपराधियों ने डाक्टर से ठग लिया 19 लाख
- नागपुर के एक बैंक में ट्रांसफर के बाद दिल्ली के अलग-अलग बैंकों से गयी राशि की निकासी
- चेक के जरिए रुपए की निकासी करने वाले दोनों साइबर अपराधी चढ़े पुलिस के हत्थे
- मुख्य मास्टर माइंड की तलाश, नागपुर के एक बैंक के डिप्टी मैनेजर को भेजा गया नोटिस
Digital Arrest – Arrah: आरा के सदर अस्पताल के एक डाक्टर को डिजिटल अरेस्ट कर 19 लाख रुपए का साइबर फ्रॉड कर लिये जाने का मामला सामने आया गया है। एटीएस अधिकारी बन अपराधियों द्वारा अरेस्ट वारंट का हवाला देकर डाक्टर को डरा दिया और 19 लाख ट्रांसफर करा लिया गया। पीड़ित डाक्टर आरा के कनकपुरी मोहल्ला निवासी राम निवास प्रसाद हैं। 26 मई को साइबर अपराधियों द्वारा उन्हें डिजिटल अरेस्ट किया गया था।
इस मामले में आरा साइबर थाने की पुलिस द्वारा दो अपराधियों को नई दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। दोनों दिल्ली के ही रहने वाले हैं। इनमें लालबाग आजाद पुर निवासी दिलीप कुमार और आदर्श नगर निवासी जिशान खान शामिल हैं। इनके पास से दो मोबाइल भी जब्त किए गए हैं। हालांकि कांड का सरगना और मुख्य मास्टर माइंड भागने में सफल रहा। वह राजस्थान का रहने वाला उपेंद्र सिंह है। उसकी गिरफ्तारी को लेकर छापेमारी की जा रही है।
वहीं इस मामले में अपराधियों का खाता खोलने में मदद करने वाले नागपुर स्थित इंडसंड बैंक को डिप्टी मैनेजर को भी नोटिस दिया गया है। साइबर डीएसपी स्नेह सेतू ने बताया कि उपेंद्र सिंह राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली में गैंग चलाता है। वहीं उन्हीं राज्यों में वह बिहार सहित अन्य राज्यों के लोगों को डिजिटल अरेस्ट कर लाखों की साइबर ठगी करता है। डीएसपी ने बताया कि उपेंद्र सिंह देश में चल रहे डिजिटल अरेस्ट गैंग का अहम किरदार है। छापेमारी के दौरान उसके पास हथियार और वाहन होने की भी सूचना थी। लेकिन वह भागने में सफल रहा है। उसकी गिरफ्तारी को लेकर छापेमारी की जा रही है। पैसे की बरामदगी को लेकर भी प्रयास किया जा रहा है।
Digital Arrest – Arrah: अरेस्ट वारंट का भय दिखाकर अपराधियों ने डाक्टर से की 19 लाख की ठगी
साइबर डीएसपी स्नेह सेतू ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि एक जुलाई को आरा के डाक्टर राम निवास प्रसाद की ओर से आवेदन देकर डिजिटल अरेस्ट कर ठगी करने शिकायत दर्ज कराई गई थी। उसमें कहा गया था कि 26 मई को उनके नंबर पर कॉल आयी। कॉल करने वाला द्वारा खुद को एटीएस अधिकारी बताया गया। कहा गया कि उनके खिलाफ पूणे के एफसी जिले के कोर्ट के एक केस में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अनुराग सेन द्वारा अरेस्ट वारंट जारी किया गया है। उस मामले में गिरफ्तारी का भय दिखाकर कॉल करने वाले द्वारा उनसे 19 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिया गया। इस संबंध में किसी से बात नहीं करने घर से नहीं निकलने की हिदायत भी दी गई।
मामले को गंभीरता से लेते हुए एसपी राज की ओर से अपराधियों की गिरफ्तारी को लेकर एक टीम का गठन किया गया। टीम की ओर से तकनीकी और वैज्ञानिक ढंग से तफ्तीश शुरू की गयी। उस दौरान पता चला कि डाक्टर से ठगी की राशि नागपुर के इंडसंड बैंक के एक व्यक्ति के खाते में ट्रांसफर कराया गया है। उसके बाद राशि अलग-अलग बैंकों में ट्रांसफर किया गया। बाद में दो लोगों द्वारा चेक के जरिए सात सात लाख की निकासी कर ली गई।
तकनीकी जांच के आधार पर पैसे की निकासी करने वाले दोनों अपराधियों की पहचान की गयी। दोनों दिल्ली के निकले। तब टीम को नई दिल्ली भेजा गया। वहां दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। डीएसपी ने बताया कि साइबर ठगी में इस्तेमाल खाता खोलने में अपराधियों की मदद करने वाले बैंक के एक डिप्टी मैनेजर को भी नोटिस भेजा गया है। टीम में इंस्पेक्टर राकेश कुमार रंजन, दारोगा गांधी नाथ पाठक, स्वाति रानी, पीटीसी जीतेंद्र कुमार, शंभू कुमार और चालक सिपाही शाहबाज अहमद शामिल हैं।


