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बिहार के ‘बिजली आपूर्ति संहिता’ में ऐतिहासिक बदलाव

Electricity Supply Code: राज्य में करीब 19 वर्षों के अंतराल के बाद बिजली आपूर्ति संहिता में व्यापक बदलाव किए गए हैं, जिसका सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा।

  • हाइलाइट: Electricity Supply Code
  • नीतीश सरकार का बड़ा फैसला
  • 3 दिन में नहीं मिला बिजली कनेक्शन तो अफसर रोज भरेंगे 1000 जुर्माना

पटना: बिहार के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। अक्सर राज्य के नागरिक नए बिजली कनेक्शन प्राप्त करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर थे, जिससे उन्हें न केवल मानसिक परेशानी होती थी, बल्कि समय की भी भारी बर्बादी होती थी। अब नीतीश सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए एक अत्यंत सख्त और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। राज्य में करीब 19 वर्षों के अंतराल के बाद बिजली आपूर्ति संहिता में व्यापक बदलाव किए गए हैं, जिसका सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा।

बिहार सरकार द्वारा लिए गए इस निर्णय के अनुसार, अब बिजली विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही तय कर दी गई है। यदि कोई अधिकारी नए बिजली कनेक्शन, मीटर बदलने या बिजली से संबंधित किसी भी सेवा को प्रदान करने में निर्धारित समय सीमा का उल्लंघन करता है, तो उसे व्यक्तिगत रूप से दंडित किया जाएगा। नए नियमों के तहत, दोषी अधिकारी को अपनी जेब से प्रतिदिन 1,000 रुपये का जुर्माना देना होगा। यह कठोर कदम अधिकारियों की कार्यप्रणाली में व्याप्त सुस्ती और मनमानी पर लगाम लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

Electricity Supply Code: नया कनेक्शन देने के लिए समय निर्धारित किया गया

सरकार ने सेवा वितरण के लिए क्षेत्र के आधार पर स्पष्ट समय सीमा निर्धारित की है। शहरी क्षेत्रों में आवेदन के मात्र 3 दिनों के भीतर बिजली कनेक्शन देना अनिवार्य कर दिया गया है। अन्य शहरी क्षेत्रों या टाउनशिप के लिए यह सीमा 7 दिन तय की गई है। वहीं, ग्रामीण इलाकों में अवसंरचना संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए नया कनेक्शन देने के लिए 15 दिनों का समय निर्धारित किया गया है। यदि निर्धारित समय के भीतर सेवा सुनिश्चित नहीं की जाती है, तो चौथे दिन से ही प्रतिदिन के आधार पर जुर्माना लगना शुरू हो जाएगा।

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से इस पहल की जानकारी साझा करते हुए स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का मुख्य उद्देश्य बिजली विभाग की सेवाओं में पारदर्शिता लाना और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है। सरकार का मानना है कि इस जवाबदेही प्रणाली से न केवल काम की गति बढ़ेगी, बल्कि आम उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानियों से मुक्ति भी मिलेगी।

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