Homekhabren Apkiअशुभ संस्कारों का उपाकरण करना ही आदर्श अध्यापक की पहचान

अशुभ संस्कारों का उपाकरण करना ही आदर्श अध्यापक की पहचान

  • हाइलाइट: Teacher
  • आरा के अमीरचंद बालिका प्लस टू विद्यालय के प्रधानाध्यापक सुरेंद्र प्रसाद सिंह हुए सेवानिवृत्त
  • कर्तव्य एवं समय निष्ठा को लेकर प्रधानाध्यापक के रूप में सुरेंद्र प्रसाद सिंह का कार्य रहा सराहनीय
  • विद्यालय के शिक्षक खुर्शीद अनवर ने प्रधानाध्यापक का लिया प्रभार

Teacher आरा। शहर के जेल रोड स्थित अमीरचंद बालिका प्लस टू विद्यालय, आरा के प्रधानाध्यापक सुरेंद्र प्रसाद सिंह गुरुवार को सेवानिवृत्त हुए। इस दौरान विद्यालय के शिक्षक खुर्शीद अनवर ने प्रधानाध्यापक का प्रभार लिया। इस मौके पर निवर्तमान प्रधानाध्यापक सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि आदर्श अध्यापक उस मोमबत्ती के सदृश्य होते हैं, जो स्वयं जलकर भी दूसरों को प्रकाश देते हैं। शिष्यों के हृदय में शुभ संस्कारों का सृजन और वर्धन तथा अशुभ संस्कारों का उपाकरण करना ही आदर्श अध्यापक की पहचान है। इसलिए गुरुजन भगवान की श्रेणी में आते हैं।

विदित हो कि चंद्रगुप्त और अशोक के कर्म स्थली बिहार राज्य के भोजपुर जिले के कुरमुरी गांव के किसान परिवार में जन्मे सुरेंद्र प्रसाद सिंह की आरंभिक शिक्षा गांव के ही विद्यालय प्राथमिक में हुई। इसके बाद उन्होंने सिकरहटा हाई स्कूल में हिंदी माध्यम से पढाई की। उनकी उच्च शिक्षा रांची विश्वविद्यालय, मगध विश्वविद्यालय एवं काशी विद्यापीठ से हुई।

सुरेंद्र प्रसाद सिंह की प्रथम नियुक्ति वर्ष 1984 में उच्च विद्यालय मचखिया (उस समय का रोहतास अभी का कैमूर) में हुई। तत्पश्चात उन्होंने वर्ष 1989 में प्रोजेक्ट बालिका विद्यालय संझौली रोहतास योगदान दिया। वर्ष 1995 में उच्च विद्यालय बिक्रमगंज, रोहतास एवं वर्ष 2011 में हित नारायण क्षत्रिय विद्यालय, आरा में बतौर शिक्षक कार्य किया। वर्ष 2014 में वे आरा शहर के जेल रोड स्थित अमीरचंद बालिका उच्च विद्यालय में खाना अध्यापक बने। अपने कर्तव्य एवं समय निष्ठा के कारण प्रधानाध्यापक के रूप में उनका कार्य बहुत ही सराहनीय रहा।

- Advertisment -
खबरे आपकी : Latest News in Hindi, Breaking News, हिंदी न्यूज़
खबरे आपकी : Latest News in Hindi, Breaking News, हिंदी न्यूज़

Most Popular