Nagar Panchayat Schemes: शाहपुर नगर पंचायत में अनियमितताओं का बोलबाला: प्राक्कलित राशि से अधिक का एकरारनामा और ठेकेदारी में हावी भाई-भतीजावाद
- हाइलाइट: Nagar Panchayat Schemes
- योजनाओं के आवंटन, जनप्रतिनिधियों के ‘घरेलू व्यवसाय’ का रूप ले चुकी है
आरा। शाहपुर नगर पंचायत इन दिनों विकास कार्यों के नाम पर हो रही वित्तीय अनियमितताओं के कारण चर्चा का विषय बनी हुई है। यहाँ सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में जिस प्रकार की कार्यशैली अपनाई जा रही है, वह हैरान करने वाली है। नगर पंचायत की कार्यप्रणाली में एक ऐसी विसंगति सामने आई है जिसे “अजब-गजब” कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा। एक ओर जहां योजना के एकरारनामा बोर्ड पर 4,43,574 रुपये की राशि अंकित की गई है। वही चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इस योजना की कुल प्राक्कलित राशि 4,22,860 रुपये ही है। यह सरकारी नियमों के विपरीत है कि किसी योजना का एकरारनामा उसकी मूल प्राक्कलित राशि से अधिक का कर दिया जाए। यह वित्तीय गबन की ओर स्पष्ट संकेत करता है और विभागीय अधिकारियों की कार्यकुशलता पर प्रश्न उठाता है। हलाकी, शाहपुर नगर पंचायत के एक अधिकारी ने बताया की बोर्ड पर राशि ऊपर-नीचे अंकित हो गई है।
Nagar Panchayat Schemes: शाहपुर नगर में बड़ी योजनाओं को दो से तीन छोटे-छोटे भागों में विभाजित किया गया
पूर्व के विभागीय नियमों के अनुसार, 15 लाख से बड़ी लागत वाली योजनाओं के लिए खुली निविदा प्रक्रिया अनिवार्य थी ताकि पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। हालांकि, इन दिशा-निर्देशों को दरकिनार करते हुए शाहपुर नगर पंचायत ने निविदा प्रक्रिया से बचकर कई बड़ी योजनाओं को दो से तीन छोटे-छोटे भागों में विभाजित कर दिया गया है, और उन्हें विभागीय स्तर पर ही आवंटित कर अपने चहेतों को लाभ पहुंचाया गया है।
योग्यता, अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता किनारे
वर्तमान परिदृश्य यह है कि योजनाओं के आवंटन की प्रक्रिया शाहपुर नपं के जनप्रतिनिधियों के ‘घरेलू व्यवसाय’ का रूप ले चुकी है। योग्यता, अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता को पूरी तरह किनारे कर दिया गया है। संवेदकों का चयन केवल कागजी औपचारिकता तक सीमित रह गया है, जबकि धरातल पर वास्तविकता इसके उलट है। निर्माण स्थलों पर संवेदकों के स्थान पर वार्ड पार्षद, वार्ड पार्षद के पति, पुत्र, देवर, निकटतम रिश्तेदार और पट्टीदार ही सक्रिय भूमिका में नजर आ रहे हैं। तो कार्यों की निष्पक्ष निगरानी को आप समझ सकते है। यह स्थिति शाहपुर नगर पंचायत के आम जनता के भरोसे के साथ भी खिलवाड़ है।


