Jagdishpur Election 2025: लोहिया जी ने इस बात पर भी जोर दिया कि जगदीशपुर एक जीत वाली सीट मानी जाती है, लेकिन इस बार माले का वोट उन्हें नहीं मिला। उनके अनुसार, क्षेत्र में माले के लगभग 18,000 वोट हैं, जो उनके खाते में नहीं आए।
- हाइलाइट: Jagdishpur Election 2025:
- पूर्व विधायक ने कहा: सांसद सुदामा प्रसाद बड़हरा, शाहपुर, जगदीशपुर कहीं प्रचार करने नहीं घूमे
आरा, बिहार। जिले जगदीशपुर विधानसभा क्षेत्र में 2025 के चुनाव में हुई अप्रत्याशित हार के समीक्षा के दौरान जब मीडिया कर्मियों ने पूर्व विधायक राम विशुन सिंह लोहिया से इसका कारण पुछा, तो उन्होंने विस्तार से उन कारणों पर प्रकाश डाला जिनके कारण उनके पुत्र किशोर कुणाल (राजद उम्मीदवार) को इस बार सफलता नहीं मिल पाई। लोहिया जी, जिन्होंने 2015 और 2020 के चुनावों में विजय हासिल की थी, ने कहा की हारे नहीं, हराया गया है। इस हार को कई जटिल कारणों का परिणाम बताया।
पूर्व विधायक लोहिया के अनुसार, उनकी हार का पहला और प्रमुख कारण महागठबंध के सहयोगी, विशेष रूप से माले (CPI-ML) के साथियों द्वारा अपेक्षित वोट न मिलना था। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि माले के समर्थकों ने उन्हें अपना मत नहीं दिया। उनके अनुसार, क्षेत्र में माले के लगभग 18,000 वोट हैं, जो उनके खाते में नहीं आए।
दूसरा महत्वपूर्ण कारण उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चुनाव आचार संहिता के दौरान महिलाओं के खातों में ₹10,000 की राशि हस्तांतरित किए जाने को बताया। लोहिया जी ने इसे “वोट खरीदने” का एक प्रकार करार दिया, विशेष रूप से तब जब आचार संहिता लागू होने पर राजनीतिक दलों के चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थी/अभिकर्ता को खर्च होने वाले एक-एक पैसे का हिसाब देना पड़ता है। कई नियमों का पालन करना पड़ता है।
उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाया, आरोप लगाया कि आयोग ने एनडीए के लोगों को खुलेआम छूट दी। उनके अनुसार, 6 तारीख को मतदान था, लेकिन 3 तारीख तक महिलाओं के खातों में पैसे आते रहे, जिससे जिन महिलाओं का वोट एनडीए को देने का इरादा नहीं था, वे भी ₹10,000 के लालच में आकर वोट देने पर विवश हुईं।
तीसरा और सबसे संवेदनशील कारण उन्होंने अपने ही दल के भीतरघात को बताया। लोहिया जी के अनुसार, उनके दल के कुछ सदस्यों ने उनके खिलाफ काम किया। पहले उन्होंने एक निर्दलीय उम्मीदवार ‘पिंकू’ को खड़ा किया, और जब पिंकू को पर्याप्त समर्थन नहीं मिला, तो उन्हीं पार्टी कार्यकर्ताओं ने अपने निजी वोटों को ‘तीर छाप’ (जेडीयू का चुनाव चिन्ह) पर स्थानांतरित कर दिया। उन्होंने इस भीतरघात को उनकी हार का एक प्रमुख कारण बताया।
भीतरघात के पीछे के कारणों पर पूछे जाने पर, लोहिया जी ने इसे कुछ लोगों की अति महत्वकांक्षा करार दिया। उन्होंने बताया कि ऐसी स्थिति उनके साथ 2015 और 2020 के चुनावों में भी हुई थी। इस बार, वे लोग चिन्हित कर लिए गए हैं। पार्टी द्वारा कार्रवाई किए जाने के सवाल पर, उन्होंने कहा कि यदि पार्टी उनसे सूचना मांगेगी, तो वे उपलब्ध करा देंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पार्टी को हर क्षेत्र के बारे में जानकारी मिल चुकी है, और अब कार्रवाई करना या न करना पार्टी का निर्णय है।
लोहिया जी ने इस बात पर भी जोर दिया कि जगदीशपुर एक जीत वाली सीट मानी जाती है, लेकिन इस बार माले का वोट उन्हें नहीं मिला। उनके अनुसार, क्षेत्र में माले के लगभग 18,000 वोट हैं, जो उनके खाते में नहीं आए। इसके विपरीत, उन्होंने बताया कि उन्होंने सांसद सुदामा प्रसाद के लिए चार गाड़ियाँ लगाकर छह दिनों तक अपने क्षेत्र में प्रचार किया था, ताकि यादवों का वोट आर के सिंह (भाजपा उम्मीदवार) की ओर स्थानांतरित न हो, क्योंकि इससे उनकी बदनामी होती।
हालांकि, उन्हें इस बात का मलाल है कि सुदामा प्रसाद ने इस बात की कोई चिंता नहीं की और न ही उन्होंने जगदीशपुर में एक भी बैठक किया। चंद्रदीप सिंह जैसे पूर्व विधायक भी तरारी भेज दिए गए, और दीपांकर भट्टाचार्य पूरे शाहाबाद में कहीं नहीं आए। सांसद सुदामा प्रसाद बड़हरा, शाहपुर, जगदीशपुर कहीं प्रचार करने नहीं घूमे।


