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आरा व्यवहार न्यायालय का बड़ा फैसला: करनामेपुर हत्याकांड में दो दोषियों को आजीवन कारावास

Rajendra Tatwa Ramdattahi: आरा व्यवहार न्यायालय का बड़ा फैसला: सात साल पुराने जमीनी विवाद में दो दोषियों को आजीवन कारावास

  • हाइलाइट: Rajendra Tatwa Ramdattahi
  • अदालत ने दोनों दोषियों पर भारी आर्थिक दंड भी अधिरोपित किया
  • करनामेपुर थाना क्षेत्र के रमदत्तही गांव जमीनी विवाद में हुई थी हत्या
  • यह फैसला जमीनी विवादों में हिंसा करने वालों के लिए कड़ा संदेश

आरा। जमीनी विवाद के चलते सात वर्ष पूर्व हुई एक नृशंस हत्या के मामले में आरा व्यवहार न्यायालय ने गुरुवार को अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दो अभियुक्तों को सजा सुनाई। प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह एससी/एसटी विशेष न्यायाधीश शैलेन्द्र कुमार पांडा की अदालत ने मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दो अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, अदालत ने दोनों दोषियों पर भारी आर्थिक दंड भी अधिरोपित किया है।

न्यायालय के इस फैसले के तहत करनामेपुर ओपी क्षेत्र के रमदत्तही गांव निवासी ब्रजेश राय और रामेश्वर राय को राजेंद्र ततवा की हत्या का दोषी पाया गया है। अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद पीड़ित परिवार ने न्याय मिलने पर संतोष व्यक्त किया है।

Rajendra Tatwa Ramdattahi: रमदत्तही गांव के निवासी राजेंद्र ततवा हत्याकांड

घटना का विवरण: अभियोजन पक्ष ने बताया कि सात सितंबर 2017 की शाम को शाहपुर थाना क्षेत्र के करनामेपुर ओपी अंतर्गत रमदत्तही गांव के निवासी राजेंद्र ततवा अपने खेत से घर लौट रहे थे। इसी दौरान पहले से घात लगाए आरोपियों ने उन पर जानलेवा हमला करते हुए ताबड़तोड़ गोलीबारी कर दी। गंभीर रूप से घायल राजेंद्र ततवा को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज हेतु पटना पीएमसीएच रेफर किया गया था, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

इस दुखद घटना के उपरांत मृतक के भाई वीरेंद्र ततवा द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के आधार पर पुलिस ने अनुसंधान शुरू किया। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि इस जघन्य वारदात के पीछे जमीन संबंधी पुराना विवाद मुख्य कारण था। न्यायिक प्रक्रिया के तहत वर्ष 2019 में मामले में आरोप तय किए गए थे। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आठ महत्वपूर्ण गवाहों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया और पुख्ता साक्ष्य रखे।

विशेष लोक अभियोजक सत्येंद्र कुमार सिंह द्वारा प्रस्तुत तर्कों और साक्ष्यों का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए न्यायालय ने दोनों अभियुक्तों को दोषी माना। यह फैसला उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो जमीनी विवादों का निपटारा कानून के दायरे से बाहर जाकर हिंसा के माध्यम से करने का प्रयास करते हैं।

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