save Jawainiya : पूर्वजों की जन्मभूमि छोड़ने का दर्द असह्य है; बस्तियाँ पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं, बालू का फैलाव और दूसरी बार आई बाढ़ ने जमीन का स्वरूप बदल दिया है।
- हाइलाइट: save Jawainiya
- विधायक राहुल तिवारी ने प्रधानमंत्री व राज्य के मुख्यमंत्री को भेजा पत्र
आरा। भोजपुर जिला के शाहपुर प्रखंड सह अंचल के भौगोलिक परिप्रेक्ष्य में गंगा नदी के परिवर्तन ने व्यापक चिंता उत्पन्न कर दी है। स्थानीय विधायक राहुल तिवारी ने सैटेलाइट इमेज और मानचित्रों के हवाले से नदी के रास्ते में परिवर्तन का उल्लेख किया। प्राथमिक अवलोकनों से प्रतीत होता है कि गंगा नदी ने पारंपरिक मार्ग से मुड़कर नए रास्ते को अपना लिया है, जिससे जवैनिया तथा आस-पास के क्षेत्रों पर प्रवाह का सीधा प्रभाव पड़ा है।
जवैनिया कटाव की घटना जिले के लिए गंभीर चिंता का विषय है। शाहपुर विधायक राहुल तिवारी ने बताया कि भोजपुर जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया से इस मामले में हमारी बातचित हुई है और जिलाधिकारी ने उत्तर प्रदेश सरकार से समन्वय कर संयुक्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
विधायक राहुल तिवारी ने कहा की सबसे पहले, सैटेलाइट इमेजरी और सर्वेक्षण के बीच अंतर पर ध्यान देना आवश्यक है। सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरें यह दर्शाती हैं कि गंगा नदी ने अपने पारम्परिक मार्ग को छोड़कर जवैनिया की तरफ झुकाव कर लिया है; जबकि आंतरिक सर्वेक्षण में यह परिवर्तन उतने स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं हुआ। ऐसी असंगति प्रशासनिक कदमों और नीतिगत निर्णयों में उलझन पैदा करती है। विधायक ने कहा की उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है तथा राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से ठोस व्यवस्था की मांग कर रहे हैं ताकि प्रभावित जनों के हितों की रक्षा की जा सके। विधायक ने इस संवेदनशील सामाजिक प्रश्न को मुख्यमंत्री के आगामी कार्यक्रम में रखने की बात कही।
विधायक ने यह भी इंगित किया कि विभागीय विशेषज्ञों के बिना समस्या का ठोस निदान और निवारण संभव नहीं है। जल संसाधन विभाग के अनुभवी इंजीनियरों को मौके पर आकर कटाव के कारणों का निरीक्षण करना चाहिए। स्थिति की जटिलता के बावजूद भी तकनीकी विशेषज्ञों की अनुपस्थिति सरकार की कमी को दर्शाती है। स्थानीय लोगों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने हेतु शीघ्र और ठोस कदम उठाना सरकार/प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
विधायक ने जवैनिया के लोगों के जीवन, संपत्ति और भौगोलिक विस्थापन समस्याओं को लेकर कहा की भूमि अधिकार और मुआवजे का जटिल मुद्दा सामने है। ग्रामीणों का आरोप है कि जमीन के पर्चों और नियमों के अंतर्गत ओबीसी तथा जनरल वर्ग के कुछ लोग छूटते जा रहे हैं तथा कई परिवारों को उचित मुआवजा या पुनर्वास नहीं मिला है। इस भयंकर आपदा में यहां के सभी वर्ग के लोग प्रभावित है। पूर्वजों की जन्मभूमि छोड़ने का दर्द असह्य है; बस्तियाँ पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं, बालू का फैलाव और दूसरी बार आई बाढ़ ने जमीन का स्वरूप बदल दिया है।
वे मांग करते हैं कि पारदर्शी मुआवजा नीति और पुनर्वास योजना लागू की जाए। साथ ही यह आवश्यक है कि अभिलेखों के अनुरक्षण और जमीन संबंधित दावों का तर्कसंगत पुनर्मूल्यांकन हो ताकि किसी वर्ग के साथ अन्याय न हो और सभी वंचितों को न्याय मिले।



