Saturday, October 24, 2020
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लालू यादव के करीबी रघुवंश प्रसाद का निधन

लालू प्रसाद यादव ने कहा था आप (Raghuvansh Prasad) कहि नही जाएंगे..

बिहार के दिग्गज नेता,राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष,पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह (Raghuvansh Prasad) का निधन हो गया। दिल्ली एम्स में उन्होंने अंतिम सांस ली। हाल ही में रघुवंश प्रसाद सिंह की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें दिल्ली एम्स में भर्ती कराया गया था। जहां शुक्रवार की देर रात अचानक ही उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई जिसके बाद उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। डॉ लगातार उनकी सेहत की निगरानी कर रहे थे लेकिन तबीयत लगातार बिगड़ रही थी। इसी बीच आज रविवार को उनका निधन हो गया।

पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह (Raghuvansh Prasad) की पहचान बिहार के कद्दावर नेता के तौर पर होती थी। हाल ही में अचानक तबीयत बिगड़ने की वजह से दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था। दिल्ली एम्स में शिफ्ट कराए जाने के बाद गुरुवार को रघुवंश प्रसाद जी ने आरजेडी मुखिया लालू प्रसाद यादव के नाम एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने आरजेडी छोड़ने का ऐलान किया था। हालांकि उनके आरजेडी से इस्तीफे को लालू यादव यादव ने पत्र लेकर नामंजूर कर दिया था और साथ ही उन्हें मनाने की कोशिश करते हुए लिखा था कि वह कहीं नहीं जा रहे हैं। बिहार में विधानसभा चुनाव के ठीक पहले रघुवंश प्रसाद सिंह का निधन चौकाने वाली खबर है।

रघुवंश बाबू का जीवन परिचय

रघुवंश बाबू (Raghuvansh Prasad) का जन्म 6 जून 1946 को वैशाली के शाहपुर में हुआ था। पैतृक गांव महनार प्रखंड के गोरीगामा पंचायत अंतर्गत पानापुर पहेमि गांव है। बिहार यूनिवर्सिटी से गणित में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की अपनी युवा अवस्था में उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में हुए आंदोलन में भाग लिया। 1973 में उन्हें संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी का सचिव बनाया गया था। 1977 से 1990 तक वे बिहार सभा के सदस्य रहे। 1977 से 1979 तक वे बिहार राज्य के ऊर्जा मंत्री रहे। इसके बाद उन्हें लोक दल का अध्यक्ष बनाया गया। 1985 से 1990 के दौरान वे लोक लेखांकन समिति के अध्यक्ष रहे। 1990 में उन्होंने बिहार विधानसभा के सहायक स्पीकर का पदभार संभाला। लोकसभा सदस्य के रूप में उनका पहला कार्यकाल 1996 से प्रारंभ हुआ वे 1996 के लोकसभा चुनाव में निर्वाचित हुए और उन्हें राज्यमंत्री बनाया गया। लोकसभा में दूसरी बार वे 1998 में निर्वाचित हुए तथा 1999 में तीसरी बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। 2004 में चौथी बार उन्हें लोकसभा सदस्य के रूप में चुना गया और 23 मई 2004 से 2009 तक वे केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रहे इसके बाद 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने पांचवी बाद जीत दर्ज की।

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