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सड़ी धान की फसल: अधिकारियों को देखने का फुर्सत क्यों नहीं? भाई दिनेश

Rotting rice crop: पूर्व विधायक भाई दिनेश ने कहा अधिकारियों को सड़ी हुई फसलें देखने और किसानों का दर्द समझने का फुर्सत नहीं मिल रहा है।

  • हाइलाइट: Rotting rice crop
    • पूर्व विधायक भाई दिनेश ने इस स्थिति को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं चिंताजनक बताया।

आरा। विगत माह पूर्व हुई अप्रत्याशित वर्षा ने बिहार के अन्नदाताओं की कमर तोड़ दी है। धान की तैयार फसलें खेतों में ही सड़ गईं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी है। विडंबना यह है कि इस गंभीर संकट के तीन माह बीत जाने के बाद भी सरकार और संबंधित प्रशासनिक पदाधिकारी इस विषय पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। किसानों की बदहाली चरम पर है, लेकिन अधिकारियों को सड़ी हुई फसलें देखने और किसानों का दर्द समझने का फुर्सत नहीं मिल रहा है। भाई दिनेश ने इस स्थिति को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं चिंताजनक बताया।

भाई दिनेश ने कहा कि किसान इस वक्त दोहरी मार झेल रहे हैं। एक ओर, भारी वर्षा के कारण उनकी खड़ी फसलें नष्ट हो गईं, वहीं दूसरी ओर, जो थोड़ी बहुत फसल बच भी गई है, उसकी उपज गुणवत्ता और मात्रा दोनों में ही बहुत कम है। बची हुई फसल का तौल भी सामान्य उपज का आधा ही हो पा रहा है, जिससे उन्हें अपनी लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। किसान परिवार आर्थिक संकट के भंवर में फंस गए हैं।

Rotting rice crop: राष्ट्रीय जनता दल के नेता और जगदीशपुर के पूर्व विधायक ने लिया जायजा

पूर्व विधायक भाई दिनेश ने जगदीशपुर विधानसभा क्षेत्र के दर्जनों गांवों का सघन दौरा कर इस गंभीर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने खैरही, खीरी कोन, डिहरा, जमुआव, खननी, महुअरी, जितौरा, जगदीशपुर, दलीपुर, पिरो, पीटरो, लहठान, अगिआंव, कटारिया, लहराबाद, नाडी, बराव, कछुई, केशवा, हासवाडीह, वीरपूरा, सालखाना, कथूआ, अकड़ीही जैसे अनेक गांवों में जाकर सीधे किसान बंधुओं से मुलाकात की। भाई दिनेश ने स्वयं खेतों में पहुंचकर सड़ी हुई फसलों का अवलोकन किया और खलिहानों में पहुंचकर किसानों की वर्तमान आर्थिक स्थिति को समझा।

अपने दौरे के उपरांत, भाई दिनेश ने सरकार से किसानों के लिए तत्काल राहत पैकेज की मांग की है। उन्होंने कहा कि किसानों को इस विकट आर्थिक संकट से उबारने के लिए सरकार को प्रति एकड़ 50 हजार रुपए का मुआवजा देना चाहिए। साथ ही, उन्होंने यह भी मांग की कि धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाते हुए प्रति क्विंटल 1 हजार रुपए का बोनस भी दिया जाए, ताकि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सके और वे घाटे से उबर पाएं।

राहत पैकेज के वितरण प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। भाई दिनेश ने कहा कि क्षतिपूर्ति के लिए फॉर्म भरने की प्रक्रिया अत्यंत धीमी और जटिल है, जिसके कारण 98 प्रतिशत किसान अब तक मुआवजा के लिए आवेदन ही नहीं कर पाए हैं। उन्होंने सरकार से किसानों की सुविधा के लिए ऑनलाईन और ऑफलाईन दोनों माध्यमों से फॉर्म भरने की व्यवस्था करने का मांग किया, ताकि सभी प्रभावित किसान आसानी से आवेदन कर सकें और उन्हें समय पर सहायता मिल सके।

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