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अतिक्रमित भूमि की मापी के दौरान भेदभाव के आरोप, शाहपुर नगर के लोगों में असंतोष

Encroached Land Shahpur: डीएम तनय सुल्तानिया के निर्देश पर शाहपुर नगर पंचायत क्षेत्र में वर्षों से सरकारी भूमि पर हुए अतिक्रमण को हटाने की दिशा में अंचलाधिकारी (सीओ) आनंद प्रकाश की देखरेख में सरकारी भूमि की मापी कराई गई।

  • हाइलाइट: Encroached Land Shahpur
    • शाहपुर नगर पंचायत में अतिक्रमण हटाओ अभियान की तैयारी
    • मापी के दौरान भेदभाव के आरोपों से उपजा असंतोष

आरा, बिहार। जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया के निर्देश पर शाहपुर नगर पंचायत क्षेत्र में वर्षों से सरकारी भूमि पर हुए अतिक्रमण को हटाने की दिशा में अंचलाधिकारी (सीओ) आनंद प्रकाश की देखरेख में सरकारी अमीन द्वारा अतिक्रमित भूमि की मापी का कार्य कराया जा रहा है। मंगलवार व बुधवार को मेन रोड NH-84 का मापी कराया गया तथा आज गुरुवार को बनाही रोड का मापी कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि भूमि का सीमांकन कार्य करीब पूर्ण हो चुका है, और अब चिन्हित अतिक्रमित क्षेत्रों को अतिक्रमण मुक्त कराने का कार्य जल्द शुरू किया जाएगा। इस अभियान के लिए प्रशासनिक अमला पूरी तरह तैयार है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक बंदोबस्त किए गए हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि बिना किसी बाधा के इस महत्वपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम दिया जाए।

हालांकि, इस मापी अभियान के दौरान कुछ स्थानीय लोगों ने अपनी नाराजगी और असंतोष व्यक्त किया है। उनका आरोप है कि मापी प्रक्रिया में निष्पक्षता का अभाव रहा है। आरोप लगाने वाले नागरिकों का कहना है कि “पावर पहुंच वाले मजबूत लोगों” को सहायता और रियायतें दी जा रही हैं, जबकि “कमजोर और गरीब लोगों” को थोड़ी भी रियायत नहीं दी जा रही है। इस कथित भेदभाव को लेकर लोगों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। उनका तर्क है कि हम प्रशासन के साथ है लेकिन अतिक्रमण एक समान सबका हटाया जाना चाहिए, जिससे सभी वर्गों का विश्वास बना रहे।

इधर, नगर में असंतोष का एक कारण यह भी है कि अतिक्रमण हटाए जाने से पहले नगर पंचायत द्वारा वेंडर जोन विकसित करने की कोई योजना क्रियान्वित नहीं की गई है। नगर पंचायत क्षेत्र में कई गरीब परिवार अपनी आजीविका चलाने के लिए इन्हीं अतिक्रमित स्थानों पर छोटी दुकानें या ठेले लगाते हैं। वेंडर जोन के अभाव में उन्हें अतिक्रमण हटाए जाने के बाद रोजी-रोटी का संकट झेलना पड़ेगा। ऐसे में इन गरीब परिवारों में भारी मायूसी छाई हुई है। उनका मानना है कि सरकार को पहले उनके पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार करना चाहिए था, ताकि उन्हें अचानक बेरोजगार होने की स्थिति से बचाया जा सके।

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