Shahpur nagar ke sairaat: पिछले कई दिनों से जारी तमाम तरह की अटकलों और आशंकाओं पर विराम लगाते हुए सोमवार को सैरातों की बंदोबस्ती की प्रक्रिया संपन्न हो गई।
- हाइलाइट: Shahpur nagar ke sairaat
- उपचेयरमैन झुनीया देवी ने सैरातों की बंदोबस्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए बैठक का बहिष्कार किया
- सैरातों की नीलामी प्रक्रिया में मुख्य विपक्षी संवेदक के अनुपस्थित रहने से तरह-तरह की चर्चा होती रही
आरा, बिहार। भोजपुर जिले के शाहपुर नगर पंचायत में पिछले कई दिनों से जारी तमाम तरह की अटकलों और आशंकाओं पर विराम लगाते हुए सोमवार को सैरातों की बंदोबस्ती की प्रक्रिया संपन्न हो गई। नगर प्रशासन की कड़ी चौकसी और प्रशासनिक निगरानी के बीच आयोजित इस नीलामी में शाहपुर के आजाद गुप्ता एंड टीम का दबदबा एक बार फिर कायम रहा।
Shahpur nagar ke sairaat: मिनी वाहनों के लिए इस वर्ष 07.31 लाख में बंदोबस्ती
बंदोबस्ती के प्राप्त परिणामों के अनुसार, इस वर्ष भी आजाद गुप्ता ग्रुप के रंजीत कुमार गुप्ता ने अपना वर्चस्व सिद्ध किया। विदित रहे की जिप टैक्सी और मिनी वाहनों के लिए वर्ष 2024-25 की बंदोबस्ती लगभग 11 लाख रुपये में की गई थी। जो पिछले वित्तीय वर्ष में यही बंदोबस्ती 07 लाख 40 हजार 251 रुपये में हुई थी, इस वर्ष 07.31 लाख में की गई है, जबकि इस बार की आरक्षित राशि 07.19 लाख रुपये निर्धारित थी। वही बंदोबस्ती के दौरान मुख्य पार्षद जुगनू देवी, कार्यपालक पदाधिकारी शुभम कुमार, जयनन्दन चौधरी, सुशील कुमार और कई संवेदक उपस्थित रहे, हलाकी मुख्य विपक्षी संवेदक के अनुपस्थित रहने से तरह-तरह की चर्चा होती रही।
खींचतान और विरोध के स्वर
बंदोबस्ती के बाद, शाहपुर नगर पंचायत के भीतर आंतरिक कलह भी देखने को मिली। उपचेयरमैन झुनीया देवी ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए बैठक का बहिष्कार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बैठक की सूचना मात्र दो घंटे पहले दी गई, जो नियमानुसार अनुचित है। झुनीया देवी के अनुसार, साढ़े 11 बजे होने वाली बैठक की सूचना उन्हें साढ़े 09 बजे मिली। साथ ही, उन्होंने पिछली तिथि में हस्ताक्षर करने के दबाव को भी ठुकरा दिया। उपचेयरमैन ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें सैरातों का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध नहीं कराया गया कि किन-किन सैरातों की बंदोबस्ती की जा रही है। उन्होंने व्यावसायिक ट्रैक्टरों एवं विभिन्न ऑटो स्टैंड की अलग से बंदोबस्ती करने की मांग उठाई ताकि राजस्व में पारदर्शिता बनी रहे।
शाहपुर बाजार की बंदोबस्ती पर सवालिया निशान
बैठक में अनुपस्थित रहने के साथ ही उपचेयरमैन ने हाट-बाजार से प्राप्त होने वाले कम राजस्व पर भी गहरी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक से शाहपुर बाजार की विधिवत बंदोबस्ती नहीं हो सकी है। आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि पिछले 10 वर्षों से नीलामी न होने के बावजूद, बाजार की सुरक्षित जमा राशि (रिजर्व प्राइस) में लगातार वृद्धि की गई, जो अब वर्ष 2026-27 के लिए बढ़कर पांच लाख 93 हजार रुपये तक पहुंच गई है।
दूसरी ओर, विभागीय आंकड़ों के अनुसार, विभागीय वसूली के माध्यम से सरकारी कोष में प्रतिवर्ष केवल 60 हजार से एक लाख रुपये के बीच ही राशि जमा की जा रही है। ज्ञात हो कि पूर्व में इस बाजार की बंदोबस्ती जिला प्रशासन द्वारा की जाती थी, लेकिन वित्तीय वर्ष 2023-24 से इसकी जिम्मेदारी नगर पंचायत को सौंप दी गई है। बाजार की वास्तविक आय और कागजी आंकड़ों के बीच का यह भारी अंतर प्रशासनिक दक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
राजस्व विभाग के प्रावधान और नियम
इस पूरे प्रकरण में राजस्व विभाग के नियम स्पष्ट दिशा-निर्देश प्रदान करते हैं। नियमों के अनुसार, यदि किसी सैरात की बंदोबस्ती लगातार तीन वर्षों तक नहीं हो पाती है, तो उसकी व्यापक समीक्षा करना अनिवार्य है। ऐसी स्थिति में, विभागीय वसूली से प्राप्त होने वाली वास्तविक आय को आधार मानकर सुरक्षित जमा राशि का पुनर्निर्धारण किया जाना चाहिए, ताकि नीलामी प्रक्रिया को व्यावहारिक और राजस्व के अनुकूल बनाया जा सके।


