Hub for Filth and Pollution शाहपुर नगर पंचायत की घोर लापरवाही: कार्यालय परिसर में कचरे से लदे तीन वाहन खड़े पाए गए, जिनमें एक ट्रैक्टर और दो मैजिक वाहन शामिल हैं।
- हाइलाइट: Hub for Filth and Pollution
- असहनीय बदबू से नगर कार्यालय और उसके आसपास का वातावरण दूषित
- कस्तूरबा विद्यालय की मासूम बच्चियां इस भीषण दुर्गंध के बीच रहने को विवश
आरा। भोजपुर जिले का शाहपुर नगर पंचायत अपनी विशिष्ट कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निर्णयों के कारण अक्सर चर्चा का केंद्र बना रहता है। हालांकि, वर्तमान में एक ऐसा प्रकरण सामने आया है जिसने नगर पंचायत के प्रबंधन की कार्यशैली और मानवीय संवेदनशीलता पर गंभीर प्रश्न चिह्न खड़ा कर दिया है। सोमवार की शाम पांच बजे कार्यालय समय समाप्त होने के पश्चात नगर पंचायत कार्यालय परिसर में कचरे से लदे तीन वाहन खड़े पाए गए, जिनमें एक ट्रैक्टर और दो मैजिक वाहन शामिल हैं।
हैरानी की बात यह है कि ये वाहन न केवल कचरे से पूरी तरह लदे हुए हैं, बल्कि ओवरलोड होने के कारण इनसे निरंतर अत्यंत तीव्र दुर्गंध आ रही है। शुरुआती गर्मी के इस मौसम में सड़ते हुए कचरे से निकलने वाली इस असहनीय बदबू ने कार्यालय और उसके आसपास के पूरे वातावरण को दूषित कर दिया है। विडंबना यह है कि जिस विभाग पर शहर की स्वच्छता और जनस्वास्थ्य सुनिश्चित करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, वह स्वयं ही गंदगी और प्रदूषण फैलाने का केंद्र बना हुआ है।
इस पूरी स्थिति का सबसे चिंताजनक और दुखद पहलू यह है कि नगर कार्यालय के ठीक सामने बीआरसी (BRC) भवन स्थित है। इसी भवन में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय संचालित होता है, जहाँ बड़ी संख्या में छात्राएं निवास कर अपना पठन-पाठन करती हैं। विभाग की इस लापरवाही के कारण विद्यालय की मासूम बच्चियां इस भीषण दुर्गंध के बीच रहने को विवश हैं। कचरे के इन ढेरों और उससे होने वाले वायु प्रदूषण के कारण छात्राओं के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। वर्तमान मौसम में संक्रामक बीमारियों के फैलने की प्रबल आशंका ने अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों के बीच चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।
शिक्षा और स्वास्थ्य किसी भी सभ्य समाज की आधारभूत प्राथमिकताएं होती हैं, लेकिन शाहपुर नगर पंचायत की इस कार्यप्रणाली ने इन दोनों ही स्तंभों को खतरे में डालने वाली है। कार्यालय परिसर में देर रात तक कचरा लदे वाहनों को खड़ा करना, वह भी तब जब समीप ही कस्तूरबा आवासीय विद्यालय स्थित है, विभाग की घोर संवेदनहीनता को दर्शाता है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि उन छात्राओं के मौलिक अधिकारों का भी हनन है जिन्हें एक स्वस्थ वातावरण मिलना चाहिए।
एक ओर जहाँ केंद्र और राज्य सरकारें ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के माध्यम से स्वच्छता के प्रति जन-जागरूकता फैलाने के लिए करोड़ों रुपये व्यय कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर शाहपुर नगर पंचायत की यह गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली उन तमाम दावों की पोल खोल रही है। इस संबंध में जब नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी नेशात आलम से जानकारी हेतु फोन किया गया तो उन्होंने अपनी जवाबदेही से बचने हेतु फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा।


