Suhia Bhagad: सर्दियों के मौसम में, हजारों मील का सफर तय कर भोजन और पानी की तलाश में रंग-बिरंगे अप्रवासी साइबेरियन पक्षियों का समूह यहां पहुंचता है, जो प्रकृति के एक अद्भुत और मनमोहक रूप का एहसास कराता है।
- हाइलाइट: Suhia Bhagad
- जैव विविधता के लिए विख्यात सुहिया भागड़ का होगा कायाकल्प
- जिला प्रशासन ने इस आर्द्रभूमि को वन विभाग के लिए किया चिन्हित
आरा। बिहार के भोजपुर जिला अंतर्गत शाहपुर प्रखंड क्षेत्र में स्थित सुहिया भागड़, अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध जैव विविधता के लिए विख्यात यह क्षेत्र अब एक नए अध्याय की ओर अग्रसर है। जिला प्रशासन ने सुहिया भागड़ की 125 एकड़ की महत्वपूर्ण भूमि को वन विभाग के लिए चिन्हित किया है, जिसका उद्देश्य इसे जैव विविधता से समृद्ध करना और आर्द्रभूमि के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सुहिया भागड़ का यह जल क्षेत्र सदियों पूर्व गंगा नदी के क्षरण से अस्तित्व में आया था और एक समय अत्यंत समृद्ध माना जाता था। पिछले कुछ दशकों से यह बिहार में मछली उत्पादन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है। सर्दियों के मौसम में, हजारों मील का सफर तय कर भोजन और पानी की तलाश में रंग-बिरंगे अप्रवासी साइबेरियन पक्षियों का समूह यहां पहुंचता है, जो प्रकृति के एक अद्भुत और मनमोहक रूप का एहसास कराता है। हालांकि, सफेद बालू के अवैध खनन के कारण इस क्षेत्र के जंगल पूरी तरह साफ हो गए हैं, जिससे इसकी प्राकृतिक छटा को गंभीर क्षति पहुंची है। इसके जीर्णोद्धार के लिए सरकार द्वारा समय-समय पर कई योजनाएं बनाई गईं, लेकिन दुर्भाग्यवश, वे आज तक अमल में नहीं आ पाईं।
Suhia Bhagad: कहां स्थित है सुहिया भागड़?
सुहिया भागड़ प्रदेश के भोजपुर जिला के शाहपुर प्रखंड मुख्यालय से लगभग 8 किलोमीटर पश्चिम-उत्तर दिशा में हिरकी पीपरा मौजा में स्थित है। सरकारी अभिलेखों में इसका क्षेत्रफल 125 एकड़ दर्ज है, परंतु वर्षा ऋतु में इसका विस्तार लगभग 8 किलोमीटर तक फैल जाता है, जो इसकी विशालता का परिचायक है। यह भौगोलिक स्थिति इसे पारिस्थितिकीय रूप से और भी महत्वपूर्ण बनाती है।
भागड़ की विशेषता: भागड़ पटना प्रमंडल का सबसे बड़ा जलकर है, जिसकी बंदोबस्ती से प्रत्येक वर्ष लगभग 10 लाख रुपये से ज्यादा का राजस्व प्राप्त होता है। यह सिर्फ राजस्व का स्रोत मात्र नहीं है, बल्कि पूरे वर्ष वृहद पैमाने पर मछली का उत्पादन होने से सैकड़ों परिवारों का जीविकोपार्जन भी इसी पर निर्भर करता है। इसके अतिरिक्त, आसपास के दर्जनों गांवों के पशुपालकों के हजारों मवेशियों को पेयजल भी इसी भागड़ से उपलब्ध होता है, जिससे यह स्थानीय कृषि और पशुपालन अर्थव्यवस्था का एक अभिन्न अंग बन गया है।
भागड़ के जीर्णोद्धार की पूर्ववर्ती योजनाएं: सुहिया भागड़ के जीर्णोद्धार और विकास के लिए विभिन्न समयों पर कई महत्वाकांक्षी योजनाएं बनाई गईं, परंतु उनका क्रियान्वयन नहीं हो सका। सर्वप्रथम, वर्ष 1986-87 में तत्कालीन मुख्यमंत्री पंडित बिंदेश्वरी दुबे की पहल पर इसे इंटर लॉकिंग सिस्टम के माध्यम से गंगा नदी व धर्मावती नदी से जोड़कर नहर बनाने की योजना थी। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य एकीकृत भोजपुर जिले के डुमरांव, सिमरी, चक्की, ब्रह्मपुर, शाहपुर, बिहिया, बड़हरा एवं आरा प्रखंड के हजारों हेक्टेयर असिंचित भूमि को सिंचाई सुविधा प्रदान करना था। यह एक दूरगामी योजना थी जो कृषि क्षेत्र में क्रांति ला सकती थी।
इसके पश्चात, वर्ष 2005-06 में भागड़ में मत्स्य उत्पादन की अपार संभावनाओं को देखते हुए इस पूरे क्षेत्र का सेटेलाइट से सर्वेक्षण कराया गया। सेटेलाइट से ली गई तस्वीरों के विशेषज्ञों द्वारा गहन अध्ययन एवं आंकलन के बाद लगभग 11 करोड़ रुपये की लागत से भागड़ के विकास की एक विस्तृत योजना बनाई गई। इस योजना के तहत भागड़ के दोनों तरफ गंगा नदी तक पैड का निर्माण करने और गंगा नदी पर बने बांध पर स्लूईस गेट लगाकर विषम परिस्थितियों में पानी छोड़ने की परिकल्पना की गई थी। विडंबना यह है कि यह योजना आज भी मत्स्य विभाग की फाइलों में ही दम तोड़ रही है।
इसके उपरांत, वर्ष 2009-10 में राज्य पर्यटन विभाग द्वारा तत्कालीन विधायक मुन्नी देवी की पहल पर इसका सर्वेक्षण कराया गया था। इस सर्वेक्षण के बाद पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस भागड़ को ‘जल संरक्षण सह पक्षी अभयारण्य’ के रूप में विकसित करने के लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कराई गई। यह योजना भी कागजों से बाहर नहीं आ पाई।
वर्तमान पहल और भविष्य की आशा: इन सभी पूर्ववर्ती विफलताओं के बावजूद, वर्तमान में वन विभाग द्वारा सुहिया भागड़ की 125 एकड़ भूमि को जैव विविधता से समृद्ध करने और साइबेरियन पक्षियों के लिए एक आदर्श आश्रय स्थल के रूप में विकसित करने की पहल एक नई आशा जगाती है। यदि यह योजना सफलतापूर्वक कार्यान्वित होती है, तो यह न केवल इस महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि की प्राकृतिक विरासत को संरक्षित करेगी, बल्कि साइबेरियन पक्षियों के लिए एक सुरक्षित पड़ाव प्रदान करेगा और यह पर्यावरणीय पर्यटन को भी बढ़ावा दे सकता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को एक नया आयाम मिलेगा।


