Shahpur Ward-10: शाहपुर नगर पंचायत प्रशासन द्वारा वार्ड-10 स्थित आबादी के बीच मौजूद तालाब में नाली का गंदा पानी गिराने हेतु हो रहा नाली निर्माण।
- हाइलाइट: Shahpur Ward-10
- मछली पालन से जुड़े लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा
- सरकार को मछली पालन से प्राप्त होने वाला राजस्व भी होगा प्रभावित
आरा। भोजपुर जिले में पर्यावरण संरक्षण के दावों को चुनौती देता एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। शाहपुर नगर पंचायत के वार्ड-10 स्थित आबादी के बीच मौजूद एक प्राचीन तालाब को नाली के गंदे पानी से दूषित करने की तैयारी की जा रही है। नगर पंचायत प्रशासन द्वारा इस कार्य हेतु तेजी से नाले का निर्माण कार्य कराया जा रहा है, जो बिहार सरकार की जल संरक्षण नीतियों के विपरीत है।
जानकारी के अनुसार शाहपुर का यह सरकारी तालाब, जो वार्ड-10 में स्थित है, सिर्फ एक जल स्रोत नहीं बल्कि यह तालाब स्थानीय पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था का अभिन्न अंग है। प्रमुख सैरातो में से एक इस तलाब की बंदोबस्ती मछली पालन हेतु की जाती है, जिससे सरकार को पर्याप्त राजस्व प्राप्त होता है। यह न केवल सरकारी खजाने में वृद्धि करती है बल्कि आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन भी है। ऐसे में, इस महत्वपूर्ण जल स्रोत को दूषित करने का निर्णय कई प्रश्न खड़े करता है।
एक ओर जहाँ बिहार सरकार ‘जल-जीवन-हरियाली’ जैसे महत्वाकांक्षी अभियान के तहत प्रदेश भर में तालाबों, पोखरों और अन्य जल स्रोतों के जीर्णोद्धार, अतिक्रमण मुक्ति और जल संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर शाहपुर नगर पंचायत प्रशासन द्वारा तालाब में गंदा पानी गिराने हेतु नाली निर्माण का यह निर्णय सीधे तौर पर राज्य सरकार की नीतियों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का उल्लंघन है। यह एक विरोधाभासी स्थिति है, जहाँ एक सरकारी निकाय स्वयं ही उन सिद्धांतों और लक्ष्यों को कमजोर कर रहा है जिन्हें प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार प्रयासरत है।
यदि इस तालाब में नाली का गंदा पानी गिराया जाता है, तो इसके भयावह और दूरगामी परिणाम होंगे। सर्वप्रथम, तालाब का स्वच्छ पानी दूषित हो जाएगा, जिससे उसमें रहने वाले जलीय जीवों, विशेषकर मछलियों का जीवन गंभीर खतरे में पड़ जाएगा। मछलियों के मरने से मछली पालन से जुड़े लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा, जिससे उनकी आजीविका पर संकट आ जाएगा। इसके परिणामस्वरूप, सरकार को मछली पालन से प्राप्त होने वाला सरकारी राजस्व भी प्रभावित होगा।
पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी यह एक बड़ी त्रासदी होगी। दूषित पानी से भयानक दुर्गंध फैल सकती है, जिससे आसपास रहने वाले लोगों का जीवन दूभर हो जाएगा। गंदे पानी से कई तरह की जल-जनित बीमारियां जैसे हैजा, टाइफाइड, पीलिया और डायरिया फैलने का जोखिम बढ़ जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह खतरा और भी गंभीर हो सकता है।


