Bihar Assembly: भाई दिनेश ने विपक्ष के प्रश्नों का उत्तर देने के बजाय केवल “25-25” जैसे असंसदीय शब्दों का प्रयोग कर विपक्ष को अपमानित करने की प्रवृत्ति को सदन की गरिमा के विरुद्ध बताया।
- हाइलाइट: Bihar Assembly
- सदन की गरिमा का क्षरण:
- लोकतंत्र के भविष्य पर गंभीर प्रश्न
आरा। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता एवं जगदीशपुर के पूर्व विधायक भाई दिनेश ने राज्य की सदन में घटित घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि सदन की गरिमा का निरंतर गिरता स्तर लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है। लोकतंत्र लोक-लाज और मर्यादा के सिद्धांतों पर चलता है, किंतु दुर्भाग्यवश आज ये मूलभूत लोकतांत्रिक मूल्य क्षीण होते दिखाई दे रहे हैं।
भाई दिनेश ने कहा की गांव, गरीब, किसान, मजदूर, युवा, छात्र, तथा खेत-खलिहान से जुड़े मूलभूत सवाल, बढ़ते भ्रष्टाचार, लूट, हत्या और दुष्कर्म जैसे गंभीर मुद्दे सरकार की प्राथमिकताओं से पूरी तरह विलुप्त हैं। सरकार न तो इन विषयों पर विपक्ष की बात सुनना चाहती है और न ही सदन में इन पर कोई सार्थक बहस कराना चाहती है।
उन्होंने विपक्ष के प्रश्नों का उत्तर देने के बजाय केवल “25-25” जैसे असंसदीय शब्दों का प्रयोग कर विपक्ष को अपमानित करने की प्रवृत्ति को सदन की गरिमा के विरुद्ध बताया। माननीय मुख्यमंत्री, जो स्वयं सदन के नेता भी हैं,अपने खीज भरे रवैये के कारण आम जनता की समस्याओं और मुद्दों को सुनने के लिए तैयार नहीं हैं।
प्रदेश की प्रथम महिला मुख्यमंत्री एवं बिहार विधान परिषद में विपक्ष की नेता माननीय श्रीमती राबड़ी देवी जी को “लड़की” कहकर संबोधित किया जाना न केवल असंसदीय है, बल्कि यह एक महिला, एक जनप्रतिनिधि और एक पूर्व मुख्यमंत्री का घोर अपमान है। यह टिप्पणी सार्वजनिक जीवन में मर्यादा की समस्त सीमाओं का उल्लंघन करती है।
इससे बड़ा निंदनीय क्या है, जब बिहार विधान परिषद में विपक्ष की नेता श्रीमती राबड़ी देवी जी सहित पूरे विपक्ष को बिना उनकी बात सुने सदन से बाहर कर दिया गया और आसन के आदेश पर 12 घंटे के लिए निष्कासित कर दिया गया। भाई दिनेश ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र पर सीधा आघात और घोर निंदनीय करार दिया है।
पूर्व विधायक भाई दिनेश ने इस अलोकतांत्रिक, असंवैधानिक और अपमानजनक कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए सरकार से पुरजोर मांग की है कि सदन की गरिमा को तत्काल बहाल किया जाए, विपक्ष की आवाज को गंभीरता से सुना जाए और जनहित के मुद्दों पर सार्थक एवं मर्यादित चर्चा सुनिश्चित की जाए। लोकतंत्र की नींव को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि जनप्रतिनिधियों के विचारों का सम्मान हो और सदन में स्वस्थ एवं गरिमामय परिचर्चा का माहौल सुनिश्चित किया जाए।


