Wednesday, May 12, 2021
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आरा का सांगीतिक इतिहास अद्वितीय: अमृतेष सांडिल्य

Virtual Music – संगीतकार अरूण सहाय ने कहा कि आरा में सदैव गुणी कलाकारों का स्वागत हुआ

आरा। नई दिल्ली से पधारे मशहूर तबला वादक अमृतेश सांडिल्य जी ’दि आरा’ म्यूजिकल कैपिटल ऑफ बिहार की ओर से आयोजित (Virtual Music) वर्चुअल संगीत संध्या में स्वतंत्र तबला वादन प्रस्तुत कर समा बांधा। कार्यक्रम में अमृतेश सांडिल्य ने कहा कि आरा का सांगीतिक इतिहास अद्वितीय। आरा महान पखावज वादक बाबू ललन जी की जन्मभूमि है, जहां शास्त्रीय संगीत की प्राचीन परंपरा कायम रही हैं। शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में इस ऐतिहासिक भूमि पर तबला वादन करना एक बड़ी उपलब्धि है।

सांडिल्य जी ने कहा कि ताल संगीत का प्राण है। तबला में स्वतंत्र वादन और संगत की अपनी अपनी महत्ता है। तबला वादन में एक विस्तार है जिसे केवल लय और तैयारी की दृष्टि से नहीं समझा जा सकता। वहीं अमृतेष सांडिल्य ने स्वतंत्र वादन में पेशकार, फर्रुखाबाद घराने का कायदा, रेला, गत एवं फर्द समेत कई क्लिष्ट बंदिशों को सुनाकर वाहवाही लूटा।

संगीतकार अरूण सहाय ने कहा कि आरा में सदैव गुणी कलाकारों का स्वागत हुआ है। देश के जाने माने कलावंतो ने यहां की सांगीतिक पृष्ठभूमि को समृद्ध किया है। इस Virtual Music कार्यक्रम में वरिष्ठ संगीतकार अरूण सहाय व विदुषी विमला देवी ने शॉल एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर अमृतेष सांडिल्य को सम्मानित किया। युवा गायक रौशन कुमार के सफल संचालन ने श्रोताओं को बांधे रखा।  इस वर्चुअल संगीत संध्या आचार्य चंदन ठाकुर, शिवनन्दन प्रसाद, रविशंकर, हर्षिता विक्रम समेत में देश के कई जाने माने कलाकार ऑनलाइन शामिल हुए।

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