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कौन थे रणजीत अहीर, जिन्होंने 1857 के विद्रोह में वीर कुंवर सिंह की सेना का किया था नेतृत्व?

Ranjit Ahir: रणजीत सिंह अहीर 1857 के भारतीय विद्रोह में एक उल्लेखनीय क्रांतिकारी थे, जिन्हें विशेष रूप से दानापुर छावनी में विद्रोह में उनकी भूमिका के लिए जाना जाता है। वह कुंवर सिंह की सेना में कमांडरों में से एक थे।

Ranjit Ahir: रणजीत सिंह अहीर 1857 के भारतीय विद्रोह में एक उल्लेखनीय क्रांतिकारी थे, जिन्हें विशेष रूप से दानापुर छावनी में विद्रोह में उनकी भूमिका के लिए जाना जाता है। वह कुंवर सिंह की सेना में कमांडरों में से एक थे।

jay kumar
  • हाइलाइट्स:Ranjit Ahir
    • आरा शहर पर कब्जा, कई ब्रिटिश अधिकारियों को बनाया बंदी
    • 1857 विद्रोही सेना के कमांडर रणजीत सिंह अहीर का अंग्रेजों में था खौफ

Ranjit Ahir: रणजीत सिंह अहीर 1857 के भारतीय विद्रोह में एक उल्लेखनीय क्रांतिकारी थे, जिन्हें विशेष रूप से दानापुर छावनी में विद्रोह में उनकी भूमिका के लिए जाना जाता है। वह कुंवर सिंह की सेना में कमांडरों में से एक थे।

● प्रारंभिक जीवन और सैन्य सेवा –
रणजीत सिंह अहीर का जन्म तत्कालीन शाहाबाद (अब भोजपुर) जिले के बिहिया परगना के शाहपुर गांव में 1811 में एक अहीर परिवार में हुआ था। उन्होंने बंगाल नेटिव इन्फैंट्री रेजिमेंट में सूबेदार के रूप में काम किया और पटना जिले के दानापुर छावनी में तैनात थे। जब 1857 का विद्रोह, जिसे सिपाही विद्रोह के रूप में भी जाना जाता है, शुरू हुआ, तो वे ब्रिटिश शासन के खिलाफ बिहार में विद्रोह में एक प्रमुख नेता बन गए।

● 1857 के विद्रोह में भूमिका –
25 जुलाई 1857 को दानापुर छावनी में बंगाल नेटिव इन्फैंट्री की 7वीं, 8वीं और 40वीं रेजिमेंट के सैनिकों ने विद्रोह कर दिया। सूबेदार रणजीत सिंह अहीर, सूबेदार सीताराम और अन्य के नेतृत्व में विद्रोहियों ने कई ब्रिटिश अधिकारियों को मार डाला और हथियार और सरकारी खजाना जब्त कर लिया। लगभग 2,000 विद्रोही आरा शहर की ओर बढ़े और जगदीशपुर के विद्रोह के एक प्रमुख नेता कुंवर सिंह के साथ सेना में शामिल हो गए।

26 जुलाई को विद्रोहियों ने रणजीत सिंह अहीर और कुंवर सिंह की सेना के साथ आरा शहर पर कब्जा कर लिया। उन्होंने कई ब्रिटिश अधिकारियों को बंदी बना लिया और 27 जुलाई से 3 अगस्त 1857 तक शहर पर कब्जा कर लिया। उनकी बहादुरी से प्रभावित होकर बाबू कुंवर सिंह ने रणजीत सिंह अहीर को विद्रोही सेना का कमांडर नियुक्त किया।

रणजीत सिंह अहीर ने कुंवर सिंह और अन्य क्रांतिकारियों के साथ मिलकर शाहाबाद और उसके आस-पास के इलाकों में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई जारी रखी। जगदीशपुर की लड़ाई और कुंवर सिंह की मौत के बाद, विद्रोह का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी रणजीत सिंह अहीर के कंधों पर आ गई। रणजीत सिंह अहीर को फुलवा के जगन्नाथ सिंह अहीर और मनेर के अनूप राउत सहित अन्य क्रांतिकारियों से महत्वपूर्ण समर्थन मिला। इन तीनों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ अपनी लड़ाई में निकटता से सहयोग किया।

● कैसे हुई थी उनकी मृत्यु –
1858 के अंत तक, अंग्रेजों ने विद्रोह को काफी हद तक दबा दिया था। शाहाबाद के जंगलों में बचे हुए विद्रोहियों की तलाश में, वे रणजीत सिंह अहीर और उनके साथी जगन्नाथ सिंह अहीर और अनूप राउत को पकड़ने में कामयाब रहे। जगन्नाथ सिंह अहीर को अंडमान द्वीप (काला पानी) में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, लेकिन वे भागने में सफल रहे और गिरमिटिया मजदूर के रूप में मॉरीशस भाग गए। अनूप राउत भी भाग निकले और मनेर में अपने गांव लौट आए। हालांकि, पकड़े जाने के बाद रणजीत सिंह अहीर के बारे में किसी को कोई खबर नहीं मिली। गिरफ्तारी के बाद उन्हें उनके साथियों से अलग ले जाया गया था। गिरफ्तारी के कुछ समय बाद ही उनकी शहादत की खबर उनके गांव में फैल गई थी, हालांकि उनकी मौत की सटीक परिस्थितियां अभी भी अस्पष्ट हैं।

Bijay singh
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