Shahpur politics: शाहपुर में “मूंछ प्रकरण” एक बार फिर से चर्चा का विषय बन गया है। इस मुद्दे पर कई सवाल उठ रहे हैं, क्या इससे विधायक जी को लाभ मिलेगा?
- हाइलाइट: Shahpur politics
- “मूंछ प्रकरण” जनता को भ्रमित करने का एक प्रयास है: बिजय कुमार सिंह
- कहा-: स्व: विशेश्वर ओझा के नजदीकियों में से एक थे लालू डेरा के मनेजर यादव
Shahpur politics आरा। शाहपुर में “मूंछ प्रकरण” एक बार फिर से चर्चा का विषय बन गया है। इस मुद्दे पर कई सवाल उठ रहे हैं, क्या इससे विधायक जी को लाभ मिलेगा? आधुनिक विकास की जगह, शाहपुर विधानसभा क्षेत्र में एक बार फिर से पुराने दिनों की यादें ताजा की जा रही हैं। क्या यह सब कुछ चुनावी हैट्रिक लगाने और जनता को भ्रमित करने का एक प्रयास है? राजद विधायक राहुल तिवारी द्वारा मीडियाकर्मी के समक्ष दिए गये ब्यान से शाहपुर विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक हलचलें तेज हो गई हैं।
राजद विधायक राहुल तिवारी ने कहा कि लालू डेरा के लोग पहले डरे-सहमे रहते थे। उस समय लोगों को आने-जाने में भी काफी दिक्कत होती थी। लोग शाहपुर आने का रास्ता छोड़ देते थे क्योंकि पूर्व विधायक का गांव उसी रास्ते के बीच में था, जिसे ओझवलिया गांव कहा जाता है। इस कारण से, लालू डेरा जाने का रास्ता ओझवलिया होकर ही था। उस समय वहां का माहौल इतना आतंकित करने वाला था कि लोग उस रास्ते जाने से कतराते थे। लेकिन अब, विधायक जी का कहना है कि पिछले 10 सालों से यहां शांति है।
विधायक ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी की मूंछ नहीं काबाड़ा। उन्होंने कहा कि किसी मुखिया को अपने द्वार पर बुलाकर नहीं मारा गया। यह सब काम उन्होंने नहीं किया। इसके विपरीत, उन्होंने यह भी बताया कि यहां कई ब्राह्मणों की हत्या की गई है, और कई गौतम ब्राह्मणों की हत्या को लोग आज भी नहीं भूले हैं। इसके अलावा, राजपूत समाज में भी कई हत्याएं हुई हैं, विशेषकर ईश्वरपुरा में। भूमिहार समाज में भी हत्याएं की गई हैं।
विधायक ने सवाल उठाया कि आखिरकार, उन्होंने किसको छोड़ा है? आप सोचिए कि भूमिहार समाज में बिहार स्टेट को उन्होंने कैसे खत्म कर दिया। पप्पू तिवारी की हत्या कर दी गई। एक जांगबली मिश्रा हैं, जिनकी प्रमुख के चुनाव में आधी हत्या कर दी गई थी। शिवजी यादव को चुनाव जीतने के लिए उनकी हत्या कर दी गई। इस प्रकार, बिहार स्टेट की हत्या कर दी गई। बरिसवन गांव के श्रीकांत मुखिया को समझिए कि वे मर ही गए थे, लेकिन किसी तरह बच गए। विधायक ने यह भी कहा कि उन लोगों ने किस समाज को छोड़ा है? ना तो भूमिहारों को छोड़ा, ना ब्राह्मणों को, ना राजपूतों को और ना ही बैकवर्ड क्लास को। लोग आज भी इन घटनाओं को नहीं भूले हैं।
इधर, शाहपुर नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन बिजय कुमार सिंह ने कहा की “मूंछ प्रकरण” पर विधायक जी के ब्यान और उनके द्वारा उठाए गए कई हत्याकांड का मुद्दा केवल क्षेत्र के माहौल को गर्म करने के लिए है। लालू डेरा के मनेजर यादव स्व: विशेश्वर ओझा के नजदीकियों में से एक थे। विकास की जगह अब पूर्व की हत्याकांड को राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है। जनता सब समझ रही है, इससे कुछ होनेवाला नहीं है। लोग यह देखना चाहते है कि 10 साल में विधायक जी ने क्या किया है। क्या अपने वादों को पूरा कर पाएं है?
शाहपुर विधानसभा क्षेत्र में चल रही राजनीतिक गतिविधियों और पुराने मुद्दों की पुनरावृत्ति, क्या यह सब कुछ केवल वोट बैंक की राजनीति है, क्या यह सब बातें चुनावी माहौल में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं? यह सवाल अब भी अनुत्तरित है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले चुनावों में शाहपुर के लोग किस प्रकार के निर्णय लेते हैं। यह सब कुछ समय के साथ स्पष्ट होगा, लेकिन वर्तमान में, शाहपुर विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक हलचलें तेज हो गई हैं।


