Rakesh Ojha: मिश्ररौली की घटना के बाद शाहपुर विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भाजपा प्रत्याशी राकेश ओझा ने मिश्ररौली प्रकरण पर मौजूदा विधायक पर तीखा हमला बोला है।
- हाइलाइट: Rakesh Ojha
- राकेश ओझा का पलटवार, विधायक पर लगाए गंभीर आरोप
- कहा: कौन असली है इसका सर्टिफिकेट क्या विधायक देंगे?
- 10 साल के रिपोर्ट कार्ड के बदले विधायक को केवल विशेश्वर ओझा ही याद आ रहे हैं
शाहपुर, भोजपुर: मिश्ररौली की घटना के बाद शाहपुर विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भाजपा प्रत्याशी राकेश ओझा ने मिशरौली प्रकरण पर मौजूदा विधायक पर तीखा हमला बोला है। ओझा ने विधायक पर हार के डर से बौखलाहट में अनर्गल बयानबाजी करने और क्षेत्र में जातिगत उन्माद फैलाने का गंभीर आरोप लगाया है।
मिश्ररौली घटना पर राकेश ओझा का रुख स्पष्ट
राकेश ओझा ने मिश्ररौली घटना में भाजपा समर्थकों की संलिप्तता के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, “क्या हमारी पार्टी का कोई झंडा लेकर वहां लड़ाई कर रहा था? कोई कहीं भी लड़ेगा, तो क्या वह हमारी पार्टी का होगा?” उन्होंने विधायक पर आरोप लगाया कि जनता के बीच अपनी गिरती लोकप्रियता और हर जगह हो रहे विरोध प्रदर्शनों से उपजी नाराजगी के कारण विधायक भाजपा को बेवजह निशाना बना रहे हैं। ओझा ने तंज कसते हुए कहा कि जहां विधायक का स्वागत होता है, वहां उनके कार्यकर्ता होते हैं, लेकिन जहां विरोध होता है, वहां उन्हें भाजपा कार्यकर्ता ही नजर आते हैं। राकेश ओझा ने कहा कि मिश्ररौली घटना में अभियुक्त रहे व्यक्ति किसी और पार्टी के पदाधिकारी रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं है।
मानसिक दिवालियापन का आरोप: ओझा ने विधायक का “मानसिक दिवालियापन” करार देते हुए कहा कि विधायक पूर्ण रूप से मानसिक दिवालियेपन की तरफ बढ़ रहे हैं और इसी बौखलाहट में अनाप-शनाप बयान दे रहे हैं। कभी किसी व्यक्ति विशेष, समाज या गांव को अपना वोटर नहीं होने की बात करते है।
पवन सिंह को हर जाति, वर्ग और समाज के लोग प्यार करते हैं:
राकेश ओझा ने विधायक पर क्षेत्र में जातिगत फूट डालने का आरोप लगाते हुए कहा कि जहां सभी वर्ग और समाज एकजुट हैं, वहीं विधायक जी इसमें फूट डालने का काम कर रहे हैं। उन्होंने पवन सिंह के कटाव पीड़ितों की मदद करने के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि पवन सिंह को हर जाति, वर्ग और समाज के लोग प्यार करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक अपने 10 सालों के कार्यों को छोड़कर जातिगत हिंसा और जातिगत उन्माद को फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया से भी शिकायत करने की बात कही।
कौन असली है इसका सर्टिफिकेट क्या विधायक देंगे?
ओझा ने जोर देकर कहा कि शाहपुर क्षेत्र की जनता इस बार विकास चाहती है और विकास के नाम पर ही वोट करेगी। उन्होंने भाजपा को वोट देने का आह्वान किया। उन्होंने विधायक के उस बयान पर भी पलटवार किया, जिसमें विधायक ने कहा था कि “ओरिजिनल क्षत्रिय” उन्हें वोट देते हैं। ओझा ने सवाल उठाया कि जो एनडीए को क्षत्रिय वोट देते हैं, वे क्या “नकली” हैं? उन्होंने फिर से विधायक को मानसिक दिवालियापन की ओर अग्रसर बताते हुए कहा कि जब आदमी इस स्थिति में पहुंच जाता है, तो कब क्या बोल देगा, उसका कोई ठीक नहीं। उन्होंने पूछा कि कौन असली क्षत्रिय है, कौन असली ब्राह्मण है, कौन असली दलित है, इसका सर्टिफिकेट क्या विधायक देंगे?
10 साल के रिपोर्ट कार्ड के बदले विधायक को केवल विशेश्वर ओझा ही याद आ रहे हैं
राकेश ओझा ने कहा कि अपनी हार देखकर माननीय विधायक पूर्ण रूप से बौखला गए हैं। उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि उन्होंने 10 सालों में क्या किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक ने 10 साल का रिपोर्ट कार्ड अभी तक पेश नहीं किया है, जबकि चुनाव में अब केवल दो दिन शेष रह गए हैं। उन्होंने कहा कि विधायक पूर्ण रूप से जनता को भ्रमित करने और मूल मुद्दे से भटकाने के लिए जात-पात का जहर घोलने का प्रयास कर रहे हैं।
हालांकि, ओझा ने इस बात पर खुशी जताई कि क्षेत्र की जनता सचेत और जागरूक है। उन्होंने कहा कि जनता विधायक के बहकावे और भड़कावे में आने वाली नहीं है। जनता ने संकल्प ले लिया है कि इस बार क्षेत्र में विकास होगा और शाहपुर से भाजपा का कमल खिलेगा। ओझा ने कहा कि विधायक को अपना डेटा देना चाहिए कि उन्होंने कौन-कौन से काम किए। 10 सालों तक विधायक रहने के बावजूद भी उन्हें केवल विशेश्वर ओझा ही याद आ रहे हैं, जो साफ दर्शाता है कि पब्लिक फोरम पर वे असफल रहे हैं।


